असम सरकार ने राज्य के युवाओं के कल्याण और ऊर्जा क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य में एक समर्पित युवा विभाग के गठन को हरी झंडी दी गई। इसके साथ ही असम में कच्चे तेल और अन्य खनिज संसाधनों की नई खोज को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई हाइड्रोकार्बन नीति को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।
युवा सशक्तिकरण के लिए समर्पित नया विभाग
कैबिनेट बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने बताया कि सरकार ने 'यूथ एम्पावरमेंट एंड वेलफेयर डिपार्टमेंट' (युवा सशक्तिकरण और कल्याण विभाग) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही असम देश का संभवतः ऐसा पहला राज्य बन जाएगा जहां युवाओं के लिए अलग से एक समर्पित विभाग काम करेगा।
यह नया विभाग 17 सितंबर से औपचारिक रूप से कार्य करना प्रारंभ कर देगा। युवाओं से जुड़े सभी विषयों के संचालन के साथ-साथ यह विभाग एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज की गतिविधियों की भी सीधी देखरेख करेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की लगभग 90 प्रतिशत योजनाएं युवाओं को केंद्र में रखकर तैयार की जाती हैं। 10 में से 9 सरकारी कार्यक्रम युवाओं के लिए समर्पित हैं और युवाओं के विकास पर ध्यान देना सरकार की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
तेल और खनिज खोज के लिए नई प्रोत्साहन नीति
बैठक में असम कैबिनेट ने राज्य में तेल और खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई हाइड्रोकार्बन नीति को मंजूरी दी। इस नीति का मुख्य लक्ष्य उन क्षेत्रों में भी नई खोज को प्रेरित करना है जहां तुरंत वाणिज्यिक सफलता या भंडार मिलने की गारंटी नहीं होती है।
तेल और खनिज पदार्थों की खोज एक जोखिम भरा कार्य है। यदि किसी स्थान पर ड्रिलिंग के बाद कोई भंडार नहीं मिलता है, तो कंपनियों का पूरा निवेश व्यर्थ चला जाता है। इस वित्तीय जोखिम को कम करने और निजी व सरकारी कंपनियों को नए क्षेत्रों में खोज के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से सरकार ने जीएसटी (GST) रिबेट और रियायती दरों पर भूमि लीज समझौतों जैसे आकर्षक प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है।
उत्पादन में गिरावट की आशंका और 20 वर्षों का सूखा
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार असम में हर साल लगभग 4 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चे तेल का उत्पादन किया जाता है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि यह वर्तमान उत्पादन दशकों पहले खोजे गए पुराने तेल भंडारों पर निर्भर है। पिछले 20 वर्षों के दौरान पर्याप्त अन्वेषण न होने के कारण राज्य में खनिजों की कोई बड़ी नई खोज दर्ज नहीं की गई है।
यदि समय रहते नए तेल भंडारों की पहचान नहीं की गई, तो अगले एक दशक के भीतर असम के कच्चे तेल उत्पादन में गिरावट शुरू हो सकती है। इसी संभावित संकट को टालने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई प्रोत्साहन नीति लागू की जा रही है।



















