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2004 पाकिस्तान दौरे पर कराची टेस्ट कराने की परवेज़ मुशर्रफ की मांग, लालकृष्ण आडवाणी ने क्यों ठुकराई थी?क्रिकेट
19 अग॰ 2026, 11:58 am (2 घंटे पहले)· 4

2004 पाकिस्तान दौरे पर कराची टेस्ट कराने की परवेज़ मुशर्रफ की मांग, लालकृष्ण आडवाणी ने क्यों ठुकराई थी?

भारत के 2004 पाकिस्तान दौरे पर कराची में टेस्ट मैच आयोजित करने का दबाव तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ की तरफ से आया था, जिसे तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने सुरक्षा चिंताओं के कारण खारिज कर दिया था।

पड़ोसी मुल्कों के बीच क्रिकेट की द्विपक्षीय प्रतिद्वंद्विता लंबे अरसे से पूरी तरह थमी हुई है। हालांकि, दो दशक पूर्व स्थिति भिन्न थी जब भारतीय क्रिकेट दल ने पाकिस्तान की सरजमीं का ऐतिहासिक दौरा किया था। वर्ष 2004 के उस चर्चित सफर के आगाज से पूर्व पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रप्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की दिली तमन्ना थी कि कराची में भी कम से कम एक टेस्ट मुकाबले की मेजबानी की जाए। इसके लिए इस्लामाबाद प्रशासन ने बाकायदा नई दिल्ली से औपचारिक अनुमति मांगी थी। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट और गंभीर खतरों के मद्देनजर भारतीय पक्ष ने मुशर्रफ के इस आग्रह को सिरे से नकार दिया था।

पूर्व सुरक्षा अधिकारी का बड़ा खुलासा

इस पूरे वाकये के भीतर छिपे कूटनीतिक दबाव और सुरक्षा इंतजामों की अनकही कहानी को पूर्व सुरक्षा व खुफिया अफसर यशोवर्धन आजाद ने अपनी नई किताब 'Policing the Republic: An Inside View of How India Fights Corruption and Crime, and Protects Rights' में उजागर किया है। लेखक के अनुसार, तत्कालीन उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने इस संवेदनशील मसले पर बेहद परिपक्व फैसला लिया था। आडवाणी ने सुरक्षा विशेषज्ञों के आकलन को सर्वोपरि मानते हुए पाकिस्तानी राष्ट्रपति के व्यक्तिगत आग्रह को अस्वीकार कर दिया।

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तीन सदस्यीय सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट

यशोवर्धन आजाद उस तीन अफसरों वाली सुरक्षा टीम के मुखिया थे, जिसे दौरे से पहले पाकिस्तान के सभी खेल मैदानों का जमीनी मुआयना करने भेजा गया था। सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल ने स्टेडियमों का जायजा लेने के बाद पूरी श्रृंखला को हरी झंडी तो दिखाई, मगर साथ ही एक स्पष्ट शर्त रखी। उन्होंने अपनी गोपनीय रिपोर्ट में हिदायत दी कि कराची और पेशावर जैसे अत्यधिक संवेदनशील इलाकों में लंबे टेस्ट मैचों का आयोजन न किया जाए। सुरक्षा दल की नजर में लाहौर, रावलपिंडी और मुल्तान ही टेस्ट क्रिकेट की मेजबानी के लिहाज से महफूज थे।

सुरक्षित लाइन RAX पर उपप्रधानमंत्री की कॉल

सुरक्षा दल द्वारा अपनी अंतिम रिपोर्ट जमा करने के तुरंत बाद आजाद के पास 'रिस्ट्रिक्टेड एरिया एक्सचेंज' (RAX) की विशेष टेलीफोन लाइन पर तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का फोन मिला। आडवाणी ने उनसे सवाल किया, “यशोवर्धन जी, कराची में क्या हम टेस्ट मैच नहीं करा सकते हैं?”

जवाब में आजाद ने उपप्रधानमंत्री को तफसील से समझाया कि कराची तथा पेशावर को टेस्ट स्थलों में क्यों नहीं शामिल किया गया। उन्होंने साफ किया कि इन शहरों में सुरक्षा जोखिम का स्तर बेहद ऊंचा था और टेस्ट मैच पांच दिनों तक चलने के कारण खिलाड़ियों का वहां ज्यादा दिन रुकना खतरे को बढ़ा सकता था। किताब के अध्याय 'Cricket Diplomacy, Security and Politics' में आजाद ने लिखा है कि आडवाणी ने उनसे सुरक्षा रिपोर्ट पर दोबारा विचार करने और इस मुद्दे को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के प्रमुख के समक्ष रखने की हिदायत दी। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वह स्वयं IB निदेशक से इस बारे में चर्चा करेंगे।

कूटनीतिक चैनल और मुशर्रफ का सीधा आग्रह

भारतीय दल का वह ऐतिहासिक दौरा मार्च 2004 में कराची के पहले एकदिवसीय मैच से शुरू होकर अप्रैल महीने तक चला था। कराची में टेस्ट मैच कराने की सुगबुगाहट से आजाद काफी फिक्रमंद हो गए थे। मामले की तह तक पहुंचने के लिए आजाद ने विदेश मंत्रालय के पाकिस्तान प्रभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत अपने सहपाठी अरुण सिंह से संपर्क साधा।

जब आजाद ने पूछा कि यह विचार सीधे उपप्रधानमंत्री के जरिए क्यों आया, तो अरुण सिंह ने साफ किया कि वह आग्रह खुद पाकिस्तानी राष्ट्रप्रमुख द्वारा प्रेषित किया गया था, जिसे पड़ोसी देश के विदेश मंत्री के जरिए भारतीय नेतृत्व तक पहुंचाया गया था। आजाद अपनी किताब में रेखांकित करते हैं कि आडवाणी के पास सुरक्षा दल के फैसले को खारिज करने का पूरा अधिकार था, लेकिन उन्होंने राजनीतिक इच्छा पर सुरक्षा विशेषज्ञों की रिपोर्ट को प्राथमिकता दी और स्वीकृत शेड्यूल में रत्ती भर बदलाव नहीं होने दिया।

सचिन तेंदुलकर और परमाणु बटन का वाकया

गंभीर कूटनीतिक तनाव के बीच किताब में इस्लामाबाद एयरपोर्ट से जुड़ा एक मनोरंजक प्रसंग भी दर्ज है। टीम की वापसी के वक्त दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर सुरक्षा प्रमुख आजाद के ठीक बगल में विराजमान थे। हवाई अड्डे पर काले परिधान पहने और हाथों में ब्रीफकेस संभाले मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों को देखकर सचिन ने काफी मासूमियत से पूछा, “क्या यह परमाणु बटन है?”

आजाद ने मुस्कुराते हुए उन्हें स्पष्ट किया कि वे कोई परमाणु बटन नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को रोकने वाले 'जैमर' हैं। सचिन की जिज्ञासा इतने पर ही नहीं थमी; उन्होंने जैमर की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल दागे जब तक कि वह पूरी तरह आस्त न हो गए। आजाद ने लिखा कि क्रिकेट के इस महान खिलाड़ी के साथ बातचीत का अनुभव शानदार था, क्योंकि खेल के अलावा अन्य विषयों को गहराई से जानने में उनकी गहरी रुचि थी।

'मैत्री दौरे' में भारत की ऐतिहासिक कामयाबी

सौरव गांगुली के नेतृत्व में खेला गया यह यादगार सफर इतिहास में 'मैत्री दौरा' के नाम से मशहूर हुआ। कूटनीतिक उथल-पुथल के बीच मैदान पर उतरी भारतीय टीम ने उम्दा प्रदर्शन किया। भारत ने पांच मुकाबलों की वनडे श्रृंखला में 3-2 से सफलता अर्जित की और तीन मुकाबलों की टेस्ट सीरीज पर भी 2-1 से ऐतिहासिक कब्जा जमाया।

सवाल-जवाब

2004 में भारत के पाकिस्तान दौरे पर कराची में टेस्ट मैच क्यों नहीं हुआ?
भारतीय सुरक्षा दल की समीक्षा में कराची और पेशावर को उच्च खतरे वाला क्षेत्र पाया गया था, इसलिए सुरक्षा कारणों से वहां टेस्ट मैच नहीं कराया गया।
परवेज़ मुशर्रफ की मांग को किसने ठुकराया था?
तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने सुरक्षा दल की रिपोर्ट को प्राथमिकता देते हुए राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के कराची में टेस्ट मैच कराने के अनुरोध को ठुकरा दिया था।
यशोवर्धन आजाद कौन हैं और उनकी किताब का नाम क्या है?
यशोवर्धन आजाद पूर्व खुफिया एवं सुरक्षा अधिकारी हैं जिन्होंने 2004 सुरक्षा दल का नेतृत्व किया था। उनकी पुस्तक का नाम 'Policing the Republic' है।
सचिन तेंदुलकर ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर क्या पूछा था?
सचिन तेंदुलकर ने काले ब्रीफकेस लिए सुरक्षा अधिकारियों की ओर इशारा करते हुए मासूमियत से पूछा था कि क्या वह परमाणु बटन है।
2004 के 'मैत्री दौरे' में क्रिकेट सीरीज का क्या परिणाम रहा?
सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम ने वनडे सीरीज 3-2 से और टेस्ट सीरीज 2-1 से जीती थी।
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