लखीमपुर खीरी जिले के मितौली तहसील क्षेत्र में इन दिनों किसानों का मुख्य ध्यान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मूंगफली की खेती पर भी केंद्रित है। इस इलाके की भौगोलिक स्थिति, स्थानीय मिट्टी और यहां का मौसम मूंगफली के उत्पादन के लिए काफी अनुकूल माने जाते हैं, जिस वजह से यहां बड़े पैमाने पर इसकी फसल उगाई जाती है। कम समय में तैयार होने की खूबी के कारण मूंगफली किसानों के लिए कमाई का एक प्रमुख साधन बन चुकी है और कई परिवारों की आजीविका इसी पर निर्भर है।
सालों पुरानी पारिवारिक परंपरा और खेती का दायरा
इस समय मितौली क्षेत्र के दूर-दूर तक फैले खेतों में मूंगफली की फसल की हरियाली नजर आ रही है। इस इलाके की निवासी कुंती देवी का परिवार पिछले 50 वर्षों से भी अधिक समय से लगातार मूंगफली की खेती करता आ रहा है। यह कृषि कार्य उनके यहां पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रहा है। मौजूदा समय में कुंती देवी लगभग चार बीघे जमीन पर मूंगफली की फसल उगा रही हैं। उनका कहना है कि इस खेती में शारीरिक श्रम और मेहनत की जरूरत तो होती है, लेकिन यदि मौसम का साथ मिल जाए और फसल बढ़िया तैयार हो जाए, तो किसानों को काफी अच्छा मुनाफा हाथ लगता है। यही वजह है कि उनके परिवार ने इस पारंपरिक खेती को कभी नहीं छोड़ा और लगातार इसे आगे बढ़ाया है।
बारिश के मौसम में फसल की देखरेख और जल निकासी का महत्व
बरसात के दिनों में खेतों में मौजूद प्राकृतिक नमी की वजह से मूंगफली के पौधों की बढ़वार बहुत तेजी से होती है। किसान समय-समय पर खेतों की निराई-गुड़ाई करते हैं और फसल की पूरी देखभाल करते हैं ताकि पैदावार बेहतरीन हो सके। हालांकि, मूंगफली की खेती के लिए जलभराव सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है। लगातार होने वाली बारिश के दौरान यदि खेतों में पानी खड़ा हो जाए, तो फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है। यही कारण है कि किसान ऐसे खेतों का चुनाव करते हैं जहां पानी की निकासी का पक्का इंतजाम हो। भुरभुरी मिट्टी और जल निकास वाली जमीन इस फसल के लिए बेहद जरूरी है, और बरसात के दौरान किसानों को लगातार अपने खेतों की निगरानी रखनी पड़ती है।
बाजार में मांग और कीमतों का गणित
बाजार में मूंगफली की मांग पूरे साल बनी रहती है। लोग इसे खाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं और इसके अलावा कई तरह के खाद्य उत्पादों में भी इसका उपयोग किया जाता है। खासकर सर्दियों के मौसम में इसकी खपत और मांग काफी बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त मूंगफली से तेल का निर्माण भी किया जाता है। कुंती देवी के अनुसार, स्थानीय बाजारों में अपनी उपज बेचने पर उन्हें अक्सर अच्छे दाम मिल जाते हैं। बाजार में मूंगफली की सामान्य कीमत 120 रुपये से लेकर 200 रुपये तक मिल जाती है। हालांकि, यह दाम फिक्स नहीं होते और मूंगफली की क्वालिटी, बेचने के समय और स्थानीय बाजार की उस वक्त की मांग के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। सही समय पर बढ़िया गुणवत्ता की फसल बेचने से किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय इजाफा होता है।


















