राजस्थान के बाड़मेर में एक ऐसा परिवार है जिसने आधुनिक युग की चकाचौंध के बीच अपनी 100 साल पुरानी विरासत को पूरी तरह से जीवित रखा है। आज के दौर में जहां कई पारंपरिक व्यवसाय समय के साथ दम तोड़ चुके हैं, वहीं यह परिवार अपनी पुरानी रोस्टेड मसालों और अनाज की परंपरा को उसी पुराने जुनून और तरीके से आगे बढ़ा रहा है। इस अनोखे कारोबार की शुरुआत केदार अग्रवाल ने की थी, जिन्होंने भट्टी पर अनाज भूनने की नींव रखी थी।
पांच पीढ़ियों का अटूट सफर
इस कारोबार की कमान अब परिवार की पांचवीं पीढ़ी के हाथों में है। केदार अग्रवाल के बाद इस काम को लक्ष्मण अग्रवाल, मिश्रीमल अग्रवाल और किशोरीलाल अग्रवाल ने आगे बढ़ाया। वर्तमान में नारायण अग्रवाल इस पूरे काम को देख रहे हैं। नारायण अग्रवाल का मानना है कि बाजार में आधुनिक मशीनों और ढेर सारे पैक्ड स्नैक्स की भरमार होने के बावजूद, पारंपरिक भट्टी पर भुने हुए अनाज का स्वाद आज भी बेजोड़ है। लोग इस पुराने स्वाद और इसकी खुशबू के कारण आज भी इसे पहली प्राथमिकता देते हैं।
मुल्तानी मिट्टी से तैयार होते हैं 25 तरह के आइटम
इस भट्टी की सबसे बड़ी खासियत इसके तैयार करने की तकनीक है। यहां करीब 25 अलग-अलग तरह के रोस्टेड आइटम बनाए जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से काला चना, सफेद चना, पोदीना चना, मतीरा बीज, चावल, मक्का, मूंगफली, बाजरा, ज्वार, मूंग और मोठ जैसे अनाज शामिल हैं। इन उत्पादों को तैयार करने में मुल्तानी मिट्टी का उपयोग किया जाता है। मुल्तानी मिट्टी में धीमी आंच पर पकने के कारण इनका प्राकृतिक स्वाद और पौष्टिकता पूरी तरह बरकरार रहती है, जो आज के कृत्रिम और मसालेदार स्नैक्स में मिलना बहुत मुश्किल है।
स्वास्थ्य और स्वाद का अनूठा संगम
नारायण अग्रवाल बताते हैं कि यह काम उनके लिए केवल एक धंधा नहीं बल्कि उनके परिवार की एक अमूल्य धरोहर है, जिसे वे आने वाली पीढ़ियों तक पूरी तरह सुरक्षित पहुंचाना चाहते हैं। इन रोस्टेड स्नैक्स की सबसे खास बात यह है कि इन्हें बिना तेल या हानिकारक मसालों के बनाया जाता है, जिसके कारण ये स्वास्थ्य के नजरिए से भी बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। फास्ट फूड और केमिकल युक्त पैक्ड स्नैक्स के इस दौर में बाड़मेर की यह पारंपरिक भट्टी अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाए हुए है। आर्थिक रूप से भी यह व्यवसाय काफी सफल है, जिससे सालाना करीब 10 लाख रुपये का टर्नओवर प्राप्त होता है। यह परिवार अपनी इस पुरानी तकनीक के जरिए न केवल अपनी विरासत को बचा रहा है बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पसंद भी बना हुआ है।











