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कानपुर में खुलेगा प्रदेश का पहला निजी कृषि विश्वविद्यालय, सरकार ने दी मंजूरीव्यापार
10 जुल॰ 2026, 11:43 am (45 दिन पहले)· 2

कानपुर में खुलेगा प्रदेश का पहला निजी कृषि विश्वविद्यालय, सरकार ने दी मंजूरी

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में महर्षि महेश योगी अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना को सरकार की कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है। यह प्रदेश का पहला निजी कृषि विश्वविद्यालय होगा जो बिल्हौर तहसील के गदनपुर आहार गांव में 51.739 एकड़ में विकसित किया जाएगा।

कानपुर अब केवल अपने औद्योगिक कारखानों के लिए नहीं, बल्कि कृषि शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में भी जाना जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के पहले निजी कृषि विश्वविद्यालय के रूप में 'महर्षि महेश योगी अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय' की स्थापना के प्रस्ताव को अपनी कैबिनेट में मंजूरी दे दी है। यह संस्थान कानपुर जिले की बिल्हौर तहसील के अंतर्गत आने वाले गदनपुर आहार गांव में स्थापित किया जाएगा। कुल 51.739 एकड़ के विशाल भूभाग पर बनने वाला यह विश्वविद्यालय आधुनिक कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक शोध और खेती से जुड़ी नई संभावनाओं को तलाशने का एक बड़ा माध्यम बनेगा।

किसानों के लिए शोध का केंद्र

इस संस्थान को स्थापित करने का काम 'ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट' के माध्यम से किया जाएगा। विश्वविद्यालय के मास्टर प्लान के अनुसार, परिसर के भीतर लगभग 37 एकड़ का एक बड़ा कृषि फार्म बनाया जाएगा। इस फार्म का मुख्य उद्देश्य विभिन्न फसलों पर गहन शोध करना होगा। यहां सहजन, गेंदा और पपीता जैसी फसलों की उन्नत खेती के साथ-साथ उनकी नई किस्मों को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। जैविक खेती, मिट्टी की उर्वरता की जांच, जल संरक्षण और कृषि के आधुनिक तौर-तरीकों पर यह संस्थान विशेष रिसर्च सेंटर की तरह काम करेगा। विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल छात्रों को शैक्षिक उपाधि प्रदान करना नहीं है, बल्कि यह किसानों के लिए भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा, जहां कार्यशालाओं और कृषि शिविरों के जरिए उन्हें विशेषज्ञों से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा।

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युवाओं के लिए शैक्षणिक और रोजगार के अवसर

महर्षि महेश योगी अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए स्नातक और परास्नातक स्तर के कृषि पाठ्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी। योजना के अनुसार, भविष्य में यहां पीएचडी और उच्च स्तरीय शोध कार्यक्रमों का भी संचालन होगा। पाठ्यक्रम में केवल कृषि विज्ञान ही नहीं, बल्कि बागवानी, एग्री बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग, बीज तकनीक और आधुनिक कृषि प्रबंधन जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगा, जो वर्तमान बाजार में रोजगार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस विश्वविद्यालय के खुलने से न केवल कानपुर बल्कि आसपास के जिलों के छात्रों को भी घर के करीब उच्च स्तरीय कृषि शिक्षा मिलेगी, जिसके लिए उन्हें पहले दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। इसके अलावा, विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर शिक्षकों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और प्रशासनिक स्टाफ की नियुक्ति से स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

कृषि अनुसंधान की नई दिशा

प्रशासनिक स्वीकृति मिल जाने के बाद, अब विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शैक्षणिक और औपचारिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा। जैसे ही सभी आवश्यक अनुमतियां मिल जाएंगी, परिसर का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह संस्थान उत्तर प्रदेश में एक मील का पत्थर साबित होगा। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह विश्वविद्यालय न केवल खेती को वैज्ञानिक आधार देगा, बल्कि इसे अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। औद्योगिक शहर के रूप में विख्यात कानपुर अब अपनी इस नई पहचान के साथ कृषि अनुसंधान के नक्शे पर एक मजबूत केंद्र बनकर उभरेगा।

सवाल-जवाब

कानपुर में कौन सा नया विश्वविद्यालय बनेगा?
कानपुर में महर्षि महेश योगी अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।
यह विश्वविद्यालय कहां स्थित होगा?
यह विश्वविद्यालय कानपुर जिले की बिल्हौर तहसील के गदनपुर आहार गांव में बनेगा।
इस विश्वविद्यालय के लिए कितनी जमीन आवंटित की गई है?
यह विश्वविद्यालय करीब 51.739 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के मुख्य शोध केंद्र का उद्देश्य क्या है?
यहां आधुनिक तकनीकों पर शोध होगा और किसानों को जैविक खेती, जल संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
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