बिहार के बेगूसराय जिले में किसानों के लिए एक नई राहत भरी खबर है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय ने बीज मसाला फसलों की खेती को बढ़ावा देने वाली योजना शुरू की है। इसके तहत जिले के किसान धनिया, मेथी, सौंफ और अजवाइन जैसी फसलें उगाकर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी पा सकते हैं। योजना का दायरा अधिकतम 2 हेक्टेयर तक रखा गया है, यानी एक पात्र किसान को अधिकतम ₹40 हजार तक का अनुदान मिल सकता है।
प्रति हेक्टेयर कितना मिलेगा अनुदान
बेगूसराय के जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. अमरजीत कुमार राय के मुताबिक, इस योजना के तहत बीज मसाला फसलों की खेती की प्रति हेक्टेयर इकाई लागत ₹50 हजार तय की गई है। इस लागत पर किसानों को 40 प्रतिशत यानी ₹20 हजार प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। चूंकि किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर तक ही इस योजना का लाभ ले सकते हैं, इसलिए किसी भी एक किसान को अधिकतम ₹40 हजार तक की सब्सिडी मिल पाएगी। यह रकम सीधे खेती की लागत घटाकर किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ हल्का करेगी।
जिले को मिला 125 हेक्टेयर का लक्ष्य
कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बेगूसराय जिले को बीज मसाला योजना के तहत अलग-अलग फसलों का लक्ष्य आवंटित किया है। इसके मुताबिक जिले में 50 हेक्टेयर में धनिया, 25 हेक्टेयर में मेथी, 25 हेक्टेयर में सौंफ और 25 हेक्टेयर में अजवाइन की खेती कराई जाएगी। इस तरह चारों फसलों को मिलाकर जिले में कुल 125 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य तय किया गया है। यह लक्ष्य पूरा होने के बाद इस वित्तीय वर्ष में आगे किसी नए आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बिहार कृषि ऐप से करना होगा आवेदन
इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपने मोबाइल फोन में बिहार कृषि ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य होगा। आवेदन की पूरी प्रक्रिया इसी ऐप के जरिए ऑनलाइन पूरी करनी होगी और ऑफलाइन आवेदन का कोई विकल्प फिलहाल नहीं रखा गया है। कृषि विभाग ने साफ किया है कि किसानों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर योजना का लाभ दिया जाएगा। यानी जो किसान समय रहते आवेदन कर देंगे, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी और जिले का तय लक्ष्य भरते ही आगे के आवेदन बंद कर दिए जाएंगे। इसलिए इच्छुक किसानों को बिना देर किए आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।
योजना पर खर्च और इसका मकसद
कृषि विभाग के पत्र के मुताबिक, राज्य योजना मद से संचालित इस योजना पर बेगूसराय जिले में करीब ₹25 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का मकसद मसाला फसलों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना, किसानों को परंपरागत फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना और उनकी आमदनी में इजाफा करना है। धनिया, मेथी, सौंफ और अजवाइन जैसी मसाला फसलों की बाजार में मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए इन्हें उगाने वाले किसानों को बेहतर दाम और स्थिर आमदनी मिलने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि विभाग इस योजना के जरिए किसानों को परंपरागत खेती से हटकर मसाला फसलों की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहा है।











