अमेरिका से आए ठंडे महंगाई आंकड़ों ने मंगलवार को डॉलर की हवा निकाल दी और इसका सीधा फायदा सोने, कच्चे तेल और कई बड़ी करेंसियों को मिला। छह प्रमुख करेंसियों के मुकाबले डॉलर की चाल दिखाने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) करीब 0.4% गिरकर 100.90 पर आ गया, क्योंकि कारोबारियों ने डॉलर पर अपने दांव घटा दिए। एक ही आंकड़े ने करेंसी बाजार से लेकर कमोडिटी तक की चाल को पलट दिया।
महंगाई ठंडी पड़ी, डॉलर पर दबाव
असली वजह रही जून का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI)। हेडलाइन आंकड़ा महीने दर महीने आधार पर 0.4% गिरा और सालाना रफ्तार घटकर 3.5% रह गई, जो बाजार की उम्मीद से नरम थी। खाने और ऊर्जा की उतार चढ़ाव वाली कीमतों को हटाकर देखा जाने वाला कोर CPI महीने दर महीने स्थिर रहा और सालाना आधार पर ठंडा होकर 2.6% पर आ गया। कुल मिलाकर ये आंकड़े इशारा कर रहे हैं कि महंगाई की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। जब महंगाई नरम होती है तो फेडरल रिजर्व के सख्त रुख बनाए रखने की गुंजाइश कमजोर होती है, और ऊंची ब्याज दरों का सहारा घटते ही डॉलर की चमक फीकी पड़ जाती है।
बड़ी करेंसियों में कैसी रही चाल
अपनी प्रमुख प्रतिद्वंदी करेंसियों के मुकाबले डॉलर की चाल मिलीजुली रही, लेकिन इसकी सबसे मजबूत पकड़ जापानी येन पर दिखी। कमजोर डॉलर ने येन को थोड़ी राहत दी और USD/JPY करीब 0.2% फिसलकर 162.20 की ओर आ गया। इसके बावजूद यह जोड़ी अब भी कई दशकों के ऊंचे स्तरों के करीब मंडरा रही है, जिससे जापानी अधिकारियों की ओर से बाजार में दखल यानी इंटरवेंशन की आशंका लगातार बनी हुई है।
ब्रिटिश पाउंड ने डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाई और पहले के नुकसान की भरपाई करते हुए 1.3375 के इलाके में लौट आया। इसकी नजर अब 200 दिनों के सिंपल मूविंग एवरेज पर टिकी है, जो एक लोकप्रिय तकनीकी संकेतक है और 1.3400 से कुछ ही पिप्स नीचे बैठा है। यही स्तर पिछले करीब दो हफ्तों से पाउंड की तेजी पर ढक्कन लगाता आ रहा है।
यूरो की कहानी भी दबे हुए डॉलर की ही रही। EUR/USD पहले उछलकर 1.1460 के पार कई दिनों के ऊंचे स्तर पर पहुंचा, फिर उत्तरी अमेरिकी सत्र के आखिर में लुढ़ककर 1.1400 के निचले हिस्से में आ गया। साल के बाकी हिस्से में फेड के सख्ती बढ़ाने की घटती उम्मीदों और कमजोर CPI आंकड़ों ने मिलकर डॉलर को कमजोर किया और यूरो समेत जोखिम से जुड़ी दूसरी संपत्तियों को नई ताकत दी।
भू राजनीतिक तनाव से कच्चे तेल में उछाल
कच्चा तेल दिन के सबसे बड़े चढ़ने वालों में रहा। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल करीब 2.1% चढ़कर 79.60 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ गया, क्योंकि भू राजनीतिक चिंता एक बार फिर भड़क उठी। इसकी वजह रही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह ऐलान, जिसमें उन्होंने ईरानी बंदरगाहों से आने जाने वाले जहाजों पर एक और नाकेबंदी की घोषणा की। इस कदम ने दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा रास्तों में से एक की सप्लाई को लेकर आशंकाएं फिर से जगा दीं, और जब सप्लाई पर संकट का डर बढ़ता है तो तेल की कीमतें तुरंत ऊपर भागती हैं।
सोने की 4,000 डॉलर के पार वापसी
सोने ने हाल की सुस्ती झटककर मंगलवार को मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर के पार फिर छलांग लगाई और यह रिकवरी 4,100 डॉलर के इलाके की ओर रफ्तार पकड़ती दिखी। इस कीमती धातु को डॉलर की गिरावट और फेड के वॉर्श की टिप्पणियों से ताकत मिली। ताजा लाइव भाव के मुताबिक सोना करीब 4,057 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 3,997 डॉलर से करीब 1.49% ऊपर है। हालांकि इसका रुझान दिखाने वाला 14 दिनों का RSI अब भी करीब 42 पर सुस्त बना हुआ है। नजदीकी चार्ट पर करीब 3,994 डॉलर पर सपोर्ट और 4,116 डॉलर के आसपास रुकावट दिख रही है, जबकि दिन का पिवट करीब 4,053 डॉलर पर है। बीते एक साल में यह धातु 3,264 से 5,586 डॉलर के चौड़े दायरे में घूमी है, और मंगलवार का कारोबार असामान्य रूप से भारी वॉल्यूम पर हुआ, जो 20 दिनों के औसत से करीब 18 गुना रहा।
बाजार के अनुमानों में 4,100 डॉलर के स्तर को सोने की अगली बड़ी लड़ाई का मैदान बताया जा रहा है। कमजोर डॉलर, महंगाई का बना रहता डर और मध्य पूर्व में रह रहकर उठता तनाव, ये तीनों मिलकर सोने में खरीदारी की भूख को जिंदा रखे हुए हैं।
अमेरिकी हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी के सामने अर्धवार्षिक मौद्रिक नीति रिपोर्ट पेश करते हुए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श अपनी बात पर कायम रहे और उन्होंने दोहराया कि केंद्रीय बैंक कीमत स्थिरता और 2% महंगाई के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है।
फेड को लेकर बदलता बाजार का मूड
बड़ी तस्वीर यह है कि बाजार पूरे महीने इस बात को लेकर पसोपेश में रहा कि फेड का अगला कदम क्या होगा। जुलाई की शुरुआत दिसंबर में ब्याज दर बढ़ाने के अनुमान के साथ हुई थी, लेकिन उसके बाद के पांच कारोबारी सत्र इसी सोच को भूलने और फिर से अपनाने की कवायद बनकर रह गए। 57 हजार के कमजोर पेरोल आंकड़े ने सख्ती के दांव को बाजार से बाहर कर दिया, तो होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा बंद होने ने उन्हें वापस अंदर धकेलना शुरू कर दिया। इसी उठापटक के बीच बुधवार को जून की FOMC बैठक के मिनट्स सामने आए, जो ऐसी परिस्थितियों का ब्योरा दे रहे थे जिन्हें बाजार तब तक पीछे छोड़ चुका था।
आगे की बात करें तो अब निगाहें अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और बुधवार को वॉर्श की दूसरी गवाही पर टिकी हैं। ये दोनों ही कारोबारियों को ब्याज दरों की अगली साफ दिशा तलाशने में व्यस्त रखेंगी और तय करेंगी कि डॉलर, सोने और तेल की मौजूदा चाल आगे किस ओर मुड़ती है।











