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मछली पालन में मुनाफा बढ़ाने के लिए बिहार सरकार का बड़ा कदम, तालाबों के लिए एरेटर मशीन खरीदने पर मिलेगी भारी सब्सिडीव्यापार
11 जुल॰ 2026, 4:06 pm (45 दिन पहले)· 6

मछली पालन में मुनाफा बढ़ाने के लिए बिहार सरकार का बड़ा कदम, तालाबों के लिए एरेटर मशीन खरीदने पर मिलेगी भारी सब्सिडी

बिहार सरकार मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी विकास योजना के तहत मछली पालकों को एरेटर मशीन की खरीद पर 50 से 70 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दे रही है, जिससे तालाबों में मछली उत्पादन को दोगुना किया जा सकेगा।

आधुनिक तकनीकों के समावेश से पारंपरिक मत्स्य पालन का तौर-तरीका तेजी से बदल रहा है। आजकल तालाबों में मछलियों के बेहतर स्वास्थ्य और रिकॉर्ड पैदावार के लिए वैज्ञानिक उपकरणों का इस्तेमाल बेहद जरूरी हो गया है। इसी कड़ी में यांत्रिक एरेटर नामक मशीन मछली पालकों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह मशीन तालाब के पानी में ऑक्सीजन की प्रचुरता बनाए रखने का मुख्य कार्य करती है। इसके साथ ही यह पानी को पूरी तरह स्वच्छ रखने और पानी के भीतर पनपने वाली विभिन्न प्रकार की जहरीली गैसों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाती है। यही मुख्य वजह है कि व्यावसायिक स्तर पर सघन मछली पालन करने वाले प्रगतिशील किसानों के बीच इस मशीन की मांग लगातार बढ़ रही है। जब यह एरेटर मशीन पानी में चलती है, तो तालाब के भीतर निरंतर हलचल पैदा होती है। इस सतत मंथन से हवा की ऑक्सीजन पानी में आसानी से घुल जाती है, जिससे मछलियां हमेशा चुस्त-दुरुस्त और सक्रिय रहती हैं। उनके तनाव में भारी कमी आती है, जिसका सीधा और अनुकूल असर उनकी शारीरिक बढ़त पर दिखाई देता है। वे बेहद कम समय में तेजी से विकसित होती हैं, जिससे किसानों को भरपूर मुनाफा मिलता है।

कैसे काम करती है चार पैडल वाली एरेटर मशीन

तकनीकी नजरिए से देखें तो यह एक विद्युत चालित उपकरण है, जिसे संचालित करने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। इस मशीन की बनावट में विशेष तौर पर चार घूमने वाले पैडल लगाए गए हैं। जब मशीन को चालू किया जाता है, तो इसके पैडल पानी की सतह पर तेजी से घूमते हुए तेज हलचल पैदा करते हैं। इस मंथन के कारण पानी की ऊपरी और निचली सतहों का आपस में तेजी से आदान-प्रदान होता है, जिससे पूरे तालाब के हर कोने में ऑक्सीजन का स्तर समान रूप से बढ़ जाता है। विशेष रूप से उन तालाबों में जहां बहुत अधिक संख्या में मछलियां पाली जाती हैं, वहां इस मशीन की उपयोगिता कई गुना बढ़ जाती है। मत्स्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि अगर किसान अपने तालाबों में एरेटर का सही तरीके से उपयोग करें, तो वे अपने मछली उत्पादन में अप्रत्याशित रूप से बड़ी वृद्धि हासिल कर सकते हैं। यह तकनीक कम क्षेत्र में भी अधिक मुनाफा कमाने का एक बेहद सुरक्षित जरिया बन चुकी है।

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सरकारी योजनाओं के तहत 50 से 70 फीसदी तक का अनुदान

मछली पालन उद्योग को बढ़ावा देने और छोटे किसानों की पहुंच आधुनिक तकनीक तक आसान बनाने के लिए बिहार सरकार ने वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है। इसके लिए राज्य सरकार की दो बेहद महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके नाम मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी विकास योजना और तालाब मत्स्यिकी विशेष सहायता योजना हैं। इन दोनों सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को एरेटर मशीन खरीदने के लिए 50 प्रतिशत से लेकर 70 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के अधिक से अधिक मत्स्य पालकों को आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से जोड़ना है ताकि वे अपनी पारंपरिक खेती से बाहर निकलकर उन्नत तकनीकों का लाभ ले सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।

गया जिले को मिला विशेष आवंटन का लक्ष्य

इस वित्तीय वर्ष में गया जिले को एरेटर मशीनों के वितरण के लिए कुल तीन यूनिट का विशेष लक्ष्य सौंपा गया है। इस निर्धारित कोटे को सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न वर्गों में बांटा गया है। इसके अंतर्गत कुल तीन यूनिट में से दो यूनिट सामान्य वर्ग के मत्स्य पालकों के लिए सुरक्षित रखी गई हैं। वहीं, बची हुई एक यूनिट को अत्यंत पिछड़ा वर्ग यानी ईबीसी श्रेणी के लाभार्थियों के लिए आरक्षित किया गया है। सरकारी नियमों के मुताबिक, सामान्य वर्ग के अंतर्गत चयनित होने वाले लाभार्थियों को मशीन की कुल लागत पर 50 प्रतिशत का सीधा वित्तीय अनुदान दिया जाएगा। इसके विपरीत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाले लाभार्थियों को और अधिक राहत देते हुए सरकार की ओर से 70 प्रतिशत तक की बंपर सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा।

लागत का गणित और विशेषज्ञों की जरूरी सलाह

गया के मत्स्य विस्तार पदाधिकारी नागेंद्र कुमार द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बाजार में एक मानक और अच्छी गुणवत्ता वाली एरेटर मशीन की कुल अनुमानित कीमत लगभग 50 हजार रुपये के आसपास होती है। इस मूल्य के आधार पर यदि सामान्य वर्ग का कोई लाभार्थी इस मशीन को खरीदता है, तो उसे सरकार की ओर से 25 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। इसका मतलब है कि सामान्य वर्ग के किसान को अपनी जेब से केवल आधी रकम यानी 25 हजार रुपये ही खर्च करने होंगे। दूसरी ओर, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आने वाले किसान को इस खरीद पर पूरे 35 हजार रुपये की बड़ी सब्सिडी प्राप्त होगी। इस वर्ग के किसानों को मशीन के लिए अपने पास से केवल 15 हजार रुपये का ही योगदान करना होगा। मत्स्य विस्तार पदाधिकारी नागेंद्र कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि बेहतर और टिकाऊ नतीजों के लिए उन्हें हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाली और प्रमाणित ब्रांड की ही एरेटर मशीन खरीदनी चाहिए। इसके साथ ही, मशीन को लंबे समय तक सुरक्षित और कार्यशील बनाए रखने के लिए उसका संचालन बेहद सावधानीपूर्वक और तकनीकी निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया और आधिकारिक वेबसाइट

इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के इच्छुक किसानों के लिए आवेदन की आधिकारिक प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। सभी योग्य और इच्छुक मत्स्य पालक इसके लिए घर बैठे ही इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए किसानों को बिहार मत्स्य निदेशालय के आधिकारिक वेब पोर्टल fisheries.bihar.gov.in पर जाना होगा। इस वेबसाइट पर जाकर वे योजना से संबंधित सभी दिशा-निर्देश पढ़ सकते हैं और अपना ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, मत्स्य विभाग के अधिकारियों द्वारा सभी प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच की जाएगी। इसके बाद पात्र लाभार्थियों का चयन किया जाएगा और उन्हें सीधे अनुदान की राशि का लाभ हस्तांतरित किया जाएगा।

सवाल-जवाब

यांत्रिक एरेटर मशीन का मुख्य कार्य क्या है?
यह मशीन तालाब के पानी में लगातार हलचल पैदा करके ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाती है, पानी को स्वच्छ रखती है और हानिकारक गैसों को बाहर निकालती है।
बिहार सरकार इस मशीन पर कितना अनुदान दे रही है?
बिहार सरकार विभिन्न श्रेणियों के तहत एरेटर मशीन की खरीद पर 50% से 70% तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है।
गया जिले में विभिन्न श्रेणियों के लिए कितने यूनिट का लक्ष्य है?
गया जिले के लिए कुल 3 यूनिट का लक्ष्य है, जिसमें से 2 यूनिट सामान्य वर्ग के लिए और 1 यूनिट अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए निर्धारित की गई है।
एक एरेटर मशीन की कुल कीमत कितनी है और किसानों को कितना भुगतान करना होगा?
मशीन की कीमत लगभग 50,000 रुपये है। सामान्य वर्ग के किसानों को 25,000 रुपये और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के किसानों को केवल 15,000 रुपये का भुगतान करना होगा।
इस योजना के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें?
इच्छुक किसान बिहार मत्स्य निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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