भोपाल के निजी कॉलेज और बैंक अधिकारियों ने ऐसे हड़पे 1 करोड़, छात्रों को पता भी नहीं चलाव्यापार
4 घंटे पहले· 5

भोपाल के निजी कॉलेज और बैंक अधिकारियों ने ऐसे हड़पे 1 करोड़, छात्रों को पता भी नहीं चला

भोपाल में स्कॉलरशिप घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां एमबीए छात्रों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर 1 करोड़ रुपये की सरकारी राशि उड़ा दी गई। सीबीआई ने बैंक मैनेजर और कॉलेज प्रबंधन के छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षा और बैंकिंग व्यवस्था की नींव हिला देने वाला एक बड़ा स्कॉलरशिप घोटाला सामने आया है। इस मामले में उन छात्रों को सबसे बड़ा झटका लगा है, जिनके दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उनके नाम पर गुप्त रूप से बैंक खाते खोले गए। सरकारी छात्रवृत्ति का पैसा सीधे इन फर्जी खातों में भेजा गया और फिर कॉलेज प्रबंधन के साथ मिलकर बैंक अधिकारियों ने मिलीभगत कर पूरी राशि का गबन कर लिया। लगभग एक करोड़ रुपये के इस वित्तीय फर्जीवाड़े की जांच अब सीबीआई द्वारा की जा रही है, जिसने बैंक प्रबंधक समेत छह लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की है। जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से छानबीन कर रही हैं कि इस गोरखधंधे की जड़ें और कितनी गहरी हैं और क्या इसमें अन्य संस्थान भी शामिल हैं।

सीबीआई की प्रारंभिक छानबीन में यह बात स्पष्ट हुई है कि जनवरी 2020 से लेकर अक्टूबर 2021 के बीच इस पूरी साजिश को अंजाम दिया गया। इसमें भोपाल स्थित एक निजी मैनेजमेंट कॉलेज के जिम्मेदार लोगों और यूको बैंक की हबीबगंज शाखा के अधिकारियों ने एक सुनियोजित तालमेल के साथ सरकारी खजाने को चूना लगाया।

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छात्रों को भनक तक नहीं लगी और खुले 118 खाते

जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में एमबीए कर रहे छात्रों के नाम पर कुल 118 बैंक खाते खोले गए। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन छात्रों के नाम इन खातों में दर्ज थे, उनमें से ज्यादातर को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। छात्रों ने कभी स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नहीं किया और न ही वे कभी बैंक शाखा गए, लेकिन उनके नाम पर सक्रिय खाते मौजूद थे जिनमें सरकारी पैसा जमा हो रहा था। आंकड़ों के मुताबिक, इन खातों में कुल 99 लाख 48 हजार रुपये की सरकारी स्कॉलरशिप डाली गई, जिसे छात्रों तक पहुंचने से पहले ही चालाकी से निकाल लिया गया।

बैंक के आला अधिकारियों ने की शिकायत

यह मामला तब प्रकाश में आया जब यूको बैंक के जोनल हेड और डिप्टी जनरल मैनेजर लोकेश कुमार ने बैंक में संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिलते ही औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सीबीआई ने बैंक के आंतरिक रिकॉर्ड और खाता खोलने संबंधी दस्तावेजों को जब्त कर जांच शुरू की। प्राथमिकी में स्पष्ट उल्लेख है कि बैंक खाता खोलने की बुनियादी प्रक्रियाओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। छात्रों के नाम से फॉर्म भरते समय उन पर जाली हस्ताक्षर किए गए और कई जगह व्यक्तिगत जानकारी भी फर्जी दर्ज की गई। केवाईसी नियमों को या तो पूरी तरह अनदेखा किया गया या फिर जाली कागजों के जरिए खानापूर्ति की गई।

मोबाइल नंबर कॉलेज के लोगों का और खाते छात्रों के

इस घोटाले का एक और हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि बैंक खातों के साथ जो मोबाइल नंबर जोड़े गए, वे छात्रों के न होकर कॉलेज से जुड़े लोगों के थे। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि खाते से जुड़े सभी ओटीपी और लेन-देन संबंधी अलर्ट सीधे आरोपियों के मोबाइल पर पहुंचते थे, जिससे छात्रों को अपने नाम से हो रहे इस खेल का पता कभी नहीं चला।

एटीएम कार्ड का दुरुपयोग

बैंकिंग नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, खाते खोलने के बाद जारी किए गए सभी डेबिट कार्ड संबंधित छात्रों को नहीं दिए गए। सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी एटीएम कार्ड कॉलेज के कर्मचारी राम सिंह वर्मा को दे दिए गए। सरकारी धन जैसे ही खातों में आता था, ये आरोपी कार्ड और ओटीपी का इस्तेमाल कर तुरंत पैसा निकाल लेते थे। कई बार तो रकम जमा होने के कुछ ही घंटों के भीतर निकासी कर ली गई ताकि किसी को शक न हो।

सीनियर बैंक मैनेजर पर गंभीर सवाल

सीबीआई ने यूको बैंक की तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा वर्मा को इस साजिश में प्रमुख रूप से जिम्मेदार माना है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बैंक मैनेजर का कर्तव्य था कि वह दस्तावेजों की वास्तविकता की पुष्टि करती और मोबाइल नंबर की जांच करती, लेकिन उन्होंने जानबूझकर लापरवाही बरती। इन अधिकारियों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं।

प्रमुख आरोपी और भविष्य की जांच

इस मामले में नामित आरोपियों में प्रेमा वर्मा, कॉलेज के निदेशक विनय मल्होत्रा, प्रोफेसर आदित्य मल्होत्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज जैन, असिस्टेंट प्रोफेसर विनेश मेश्राम और कॉलेज कर्मचारी राम सिंह वर्मा शामिल हैं। आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारा है, जबकि कॉलेज प्रशासन का दावा है कि वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह घोटाला सिर्फ 118 खातों तक सीमित था या इसके तार और भी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं। डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है, जिससे भविष्य में और गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।

सवाल-जवाब

यह घोटाला कितने रुपयों का है?
इस स्कॉलरशिप घोटाले में लगभग 1 करोड़ रुपये की राशि का गबन किया गया है।
इस मामले में कितने बैंक खाते शामिल थे?
सीबीआई की जांच के मुताबिक, एमबीए छात्रों के नाम पर कुल 118 बैंक खाते खोले गए थे।
आरोपियों ने छात्रों को बिना बताए पैसे कैसे निकाले?
आरोपियों ने बैंक खातों से अपने मोबाइल नंबर जोड़े थे ताकि ओटीपी उन्हें मिले और एटीएम कार्ड कॉलेज कर्मचारी को दिए गए थे।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपियों में यूको बैंक की तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा वर्मा, कॉलेज निदेशक विनय मल्होत्रा और अन्य स्टाफ सदस्य शामिल हैं।

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