दशकों से साइबरपंक उप-विधा ने ऐसे भविष्य की कल्पना की थी, जिसमें क्रोम-प्लेटेड भाड़े के सैनिक, साइबरस्पेस के धाकड़ खिलाड़ी और हैकर्स दुनिया भर में फैली बड़ी कंपनियों से मुकाबला करते थे। आज, चार दशक बाद, वह भविष्य आ तो गया है, लेकिन उस तरह से नहीं जैसा इसके लेखकों ने सोचा था।
न्यूरालिंक जैसे ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से चलने वाले स्मार्ट ग्लास और अत्यधिक उन्नत रोबोटिक प्रोस्थेटिक्स अब विज्ञान कथाओं के उस चमकते भविष्य को वास्तविकता में बदल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, ओपनएआई, xAI, एंथ्रोपिक, मेटा और गूगल जैसी चुनिंदा कंपनियां अब यह तय कर रही हैं कि दुनिया भर के अरबों लोग कैसे संवाद करते हैं, काम करते हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ कैसे जुड़ते हैं।
साइबरपंक नाम से ही स्पष्ट है कि यह अत्याधुनिक तकनीक को पंक आंदोलन की व्यवस्था-विरोधी भावना के साथ जोड़ता है। ब्रूस स्टर्लिंग द्वारा लोकप्रिय बनाई गई 'हाई टेक, लो लाइफ' की अवधारणा एक ऐसी दुनिया दिखाती है, जहां जबरदस्त आविष्कार मौजूद हैं, लेकिन साथ ही गरीबी, अपराध, भ्रष्टाचार और कॉर्पोरेट सत्ता भी अपनी चरम पर है। विलियम गिब्सन की 'न्यूरोमैंसर' से लेकर नील स्टीफेंसन की 'स्नो क्रैश', 'रेडी प्लेयर वन' और 'साइबरपंक 2077' तक, इस विधा ने ऐसी दुनिया की तस्वीर पेश की, जिसमें शरारती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इमर्सिव वर्चुअल रियलिटी, साइबरनेटिक संवर्द्धन और अरासाका तथा मिलिटेक जैसे निगम सरकार को चुनौती देने में सक्षम थे।
अस्सी और नब्बे के दशक में इंटरनेट संस्कृति बनाने वाले कई लोगों के लिए, ये कहानियां चेतावनी नहीं बल्कि भविष्य की तकनीक के लिए एक खाका की तरह थीं।
भ्रम बनाम वास्तविकता
मोंडो 2000 के सह-संस्थापक और साइबरपंक हैंडबुक के सह-लेखक केन गोफमैन, जिन्हें आर.यू. सीरियस के नाम से जाना जाता है, उस दौर को प्रयोगों और आशावाद से भरा मानते हैं।
गोफमैन कहते हैं कि वह सारा डार्क स्टफ यानी अंधेरा पक्ष तब मोंडो में भी था, लेकिन यह सब एक खेल जैसा लगता था। उनका मानना है कि यदि दुस्वप्न या डिस्टोपिया आना था, तो उस समय वह हमारे दिमागों में ही था, जिसके साथ हम रह सकते थे और हंस सकते थे। हालांकि, उनका कहना है कि भविष्य उतना सिनेमाई नहीं निकला। लोग अभी भी सोचते हैं कि प्रलय 'मैड मैक्स' की तरह रोमांचक होगा, लेकिन हकीकत बहुत उबाऊ और साधारण है।
शुरुआती इंटरनेट अग्रदूतों की तरह, गोफमैन को भी लगता था कि पर्सनल कंप्यूटर और नेटवर्किंग तकनीक सरकार और कॉर्पोरेट की ताकत कम कर देगी। उनका मानना था कि ये कंपनियां हमें शक्ति दे रही थीं और हम उसके साथ प्रयोग करने वाले थे, शायद सरकार और पूरी व्यवस्था को पलटने की कोशिश भी करने वाले थे। इसके विपरीत, इन तकनीकों को बनाने वाली कंपनियां ही दुनिया की सबसे शक्तिशाली संस्थाएं बन गईं। उन्हें लगता है कि उनकी सोच में यही गलती थी कि उन्होंने इसके और बदतर होने की संभावना को कम आंका था।
गोफमैन ने इंटरनेट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक 'गुमनामी' को खोते हुए भी देखा है। फेसबुक आने के बाद उन्हें अपना नाम आर.यू. सीरियस से बदलकर केन गोफमैन करना पड़ा, जो उन्हें किसी चीज के अंत की शुरुआत जैसा लगा। आज वे यह सोचते हैं कि क्या साइबरकल्चर आंदोलन ने एक ऐसा इंटरनेट बनाया है जिसे इसके अग्रदूत भी नहीं पहचान पाएंगे।
सत्ता का असली खेल
जॉर्जिया विश्वविद्यालय में एंटरटेनमेंट और मीडिया स्टडीज की प्रोफेसर और 'द अनसीन इंटरनेट' की लेखिका शिरा चेस का मानना है कि साइबरपंक का असली मूल्य उसके सौंदर्य में नहीं, बल्कि इस बात में है कि उसने सत्ता को कितनी गहराई से समझा था।
उनका कहना है कि वे चमक-धमक वाली चीजों को देखते थे लेकिन यह नहीं समझ पाए कि उन चमकती चीजों का मतलब क्या था। साइबरपंक जिन सतहों को दिखाता है, वे हमेशा एक डिस्टोपिया के भीतर जुड़ी होती हैं। चेस के अनुसार, साइबरपंक की सबसे बड़ी भविष्यवाणी साइबरनेटिक अंग या आईने जैसे चश्मे नहीं थे। असली चुनौती तब शुरू हुई जब निगमों ने पूरी तरह से डिजिटल स्पेस पर कब्जा कर लिया।
हालांकि आज इंटरनेट अधिकांश मामलों में स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है, लेकिन अब इसका एक बड़ा हिस्सा सब्सक्रिप्शन, प्रोपराइटरी AI मॉडल और कुछ कंपनियों द्वारा नियंत्रित बंद इकोसिस्टम के पीछे सिमट गया है। चेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी यही पैटर्न देख रही हैं। वे मशीनों के सचेत होने के बजाय इस बात से ज्यादा चिंतित हैं कि समाज उनके बारे में किस तरह की चर्चा कर रहा है। नवंबर 2022 में एलन मस्क ने चेतावनी दी थी कि मानवता शायद 'शैतान को बुला रही है'। 2014 में एमआईटी में बोलते हुए टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख ने AI शोधकर्ताओं की तुलना उस जादूगर से की थी जो आत्मा को बुलाने की कोशिश कर रहा है। चेस कहती हैं कि वे नहीं मानतीं कि AI के साथ कोई शैतान डिब्बे में बंद है, लेकिन जितना अधिक हम ऐसा व्यवहार करेंगे, भविष्य की पीढ़ियों को यह समझाना उतना ही मुश्किल होगा कि ऐसा कुछ नहीं है।
विद्रोह की नई लहर
फिर भी, उन्हें एक नए साइबरपंक आंदोलन के संकेत दिखाई दे रहे हैं। वे साइबरडेक की बढ़ती लोकप्रियता का उदाहरण देती हैं। रीसायकल किए गए हार्डवेयर, ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर और बाजार में उपलब्ध पुर्जों से बने ये कस्टम कंप्यूटर अपनी व्यक्तिगत तकनीक पर नियंत्रण वापस पाने की एक कोशिश है। वे उम्मीद करती हैं कि साइबरपंक को नया जीवन मिले और साइबरडेक की ओर यह कदम उस तकनीक के बारे में सोचने का पहला चरण हो, जो उस तरह से नियंत्रित नहीं है जैसे अब तक होती आई है।
यह दर्शन सॉफ्टवेयर पर भी लागू होता है। जैसे-जैसे AI कोडिंग असिस्टेंट आम होते जा रहे हैं, चेस को डर है कि डेवलपर्स उन प्रणालियों से और अधिक दूर हो जाएंगे जिन पर वे निर्भर हैं। उनका कहना है कि आप जितना अधिक ऐसा करेंगे, उतनी ही कम संभावना है कि आप सिस्टम को समझेंगे। संघर्ष करने के लिए, उन्हें वास्तव में प्रोग्रामिंग सीखनी होगी और ऐसी चीजें बनानी होंगी जो कॉर्पोरेट की गुलाम न हों।
आज साइबरपंक के मूल में मौजूद संघर्ष वास्तविक दुनिया में फिर से उभर रहा है। 'स्टॉप द AI रेस', 'मशीन इंटेलिजेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट' और अन्य सामुदायिक समूह नए AI डेटा सेंटरों का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पानी के उपयोग, बिजली की मांग और पर्यावरणीय प्रभाव की चिंता है। साथ ही, ओपन-सोर्स डेवलपर्स और प्राइवेसी के पैरोकार तेजी से बंद होते AI इकोसिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। हाल के दिनों में ओपनक्लॉ और हर्मेस एजेंट जैसे AI एजेंट्स ने व्यक्तियों को उनके स्वयं के स्थायी, खुद को सुधारने वाले AI दिए हैं।
चेस के अनुसार साइबरपंक का मुख्य तनाव यह है कि इसे विरोध करने के लिए किसी चीज की आवश्यकता होती है। सभी एंटी-हीरो और विजिलेन्टे के लिए कुछ न कुछ ऐसा होना चाहिए जिसका विरोध किया जा सके, और वह कॉर्पोरेट आधार ही है। सरकार और कॉर्पोरेट उत्पीड़न के खिलाफ कोड का उपयोग करने की लड़ाई क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन स्पेस में भी महसूस की जा सकती है। प्रोजेक्ट स्पार्टाकस जैसे समूह विकिलीक्स अफगान वॉर लॉग्स को संरक्षित करने के लिए बिटकॉइन नेटवर्क का उपयोग करते हैं। 2023 में यह भी पता चला था कि एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम macOS में बिटकॉइन व्हाइटपेपर की एक कॉपी छिपी हुई थी।
साइबरपंक की तरह ही, AI कंपनियों के प्रति गुस्सा कभी-कभी हिंसक भी हो जाता है। अप्रैल में, एक संदिग्ध ने कथित तौर पर ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन के सैन फ्रांसिस्को स्थित घर पर मोलोटोव कॉकटेल फेंका था और उसके बाद ओपनएआई के मुख्यालय को धमकी दी थी। जब पूछा गया कि आगे क्या होगा, तो चेस ने नई पीढ़ी की ओर इशारा किया। उनका मानना है कि कुछ न कुछ तो बदल रहा है। जेन Z और जेन अल्फा के पास उस तकनीक को लेकर बहुत सूक्ष्म भावनाएं हैं जिसके साथ वे बड़े हुए हैं। 'न्यूरोमैंसर' के चालीस साल बाद, साइबरपंक एक असफल भविष्यवाणी के बजाय एक बेहद सटीक भविष्यवाणी की तरह दिखता है। हैरानी की बात यह है कि साइबरपंक की सबसे स्थायी भविष्यवाणी क्रोम यानी धातु नहीं थी, बल्कि इस बात को लेकर संघर्ष था कि उस पर नियंत्रण किसका होगा।













