जमीन का भाव अक्सर इस बात पर तय होता है कि वह शहर के कितने करीब है, लेकिन बिहार के जमुई जिले में एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है। यहां न सिर्फ शहर के भीतर बल्कि शहरी सीमा से 5 से 10 किलोमीटर दूर बसे गांवों में भी जमीन के दाम इतने ऊंचे हैं कि सुनकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। पिछले महीने जमुई शहर में जो सबसे महंगी जमीन बिकी, उसकी कीमत 90 लाख रुपए प्रति डिसमिल तक पहुंच गई थी। जमीन के कारोबार से जुड़े रियल एस्टेट एजेंट जितेंद्र कुमार का कहना है कि सिर्फ शहर में ही नहीं, बल्कि गांव में भी जमीन की कीमतें कम नहीं आंकी जा सकतीं। उनके मुताबिक जमुई जिले में जमीन का बाजार जितना दिखता है, असल में उससे कहीं ज्यादा उलझा हुआ और तेजी से बदलता हुआ है, क्योंकि लोकेशन में मामूली फर्क भी दाम में लाखों का अंतर ला देता है।
जमुई शहर के पॉश इलाकों में जमीन के दाम
जितेंद्र कुमार के मुताबिक जमुई शहर के रिहायशी इलाकों जैसे महिसौडी चौक, महाराजगंज चौक, कचहरी चौक और वीआईपी कॉलोनी में जमीन की कीमतें सबसे ज्यादा हैं। इन जगहों पर सामान्य तौर पर जमीन की कीमत 60 लाख से लेकर 80 लाख रुपए प्रति डिसमिल तक चली जाती है। अगर जमुई शहर के औसत रेट की बात करें तो यहां जमीन 25 से 30 लाख रुपए प्रति डिसमिल में भी मिल जाती है। लेकिन जितेंद्र बताते हैं कि जैसे ही शहर से बाहर ग्रामीण इलाके की तरफ बढ़ते हैं, वहां भी जमीन के दाम बहुत कम नहीं होते, जो आम धारणा के बिल्कुल उलट है। उनका कहना है कि लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि गांव पहुंचते ही जमीन सस्ती मिल जाएगी, लेकिन जमुई में ऐसा हर जगह लागू नहीं होता।
शहर से सिर्फ 5 किलोमीटर दूर खैरा में आसमान छूते दाम
जमुई शहर से महज 5 किलोमीटर दूर खैरा इलाके में जमीन की कीमतें किसी को भी चौंका सकती हैं। जितेंद्र बताते हैं कि अगर कोई जमुई-खैरा मुख्य मार्ग पर जमीन खरीदना चाहे, तो उसे प्रति कट्ठा 45 लाख रुपए तक चुकाने पड़ सकते हैं। डिसमिल के हिसाब से देखें तो यह कीमत करीब 12 लाख रुपए प्रति डिसमिल तक पहुंच जाती है, जबकि स्क्वायर फीट में इसका रेट 2754 रुपए प्रति स्क्वायर फीट बैठता है। यानी मुख्य सड़क किनारे की यह जमीन शहर के कई पॉश इलाकों से भी महंगी साबित हो रही है, और यही वजह है कि खैरा की जमीन को लेकर इलाके में खासी चर्चा रहती है।
मुख्य सड़क से भीतर जाते ही घट जाते हैं दाम
हालांकि यह ऊंची कीमत सिर्फ उस जमीन की है जो जमुई-खैरा मुख्य मार्ग पर सीधे स्थित है। जितेंद्र समझाते हैं कि जैसे ही सड़क से थोड़ा भीतर जाएंगे, दाम में बड़ा अंतर दिखने लगेगा। मुख्य सड़क से 100 से 200 फीट के दायरे में आने वाली जमीन 20 से 25 लाख रुपए प्रति कट्ठा में मिल जाती है, यानी प्रति डिसमिल के हिसाब से यह कीमत घटकर 6 से 7 लाख रुपए तक सिमट जाती है। इससे साफ है कि मुख्य सड़क से सटे होने का सीधा और बड़ा असर जमीन की कीमत पर पड़ता है, और सिर्फ कुछ फीट की दूरी भी दाम में लाखों का फर्क ला देती है।
पूरी तरह ग्रामीण इलाके में सिर्फ खेती लायक जमीन सस्ती
अगर मुख्य मार्ग को पूरी तरह छोड़कर गांव के अंदरूनी हिस्से में पहुंच जाएं, तो वहां जमीन की कीमतें और नीचे आ जाती हैं। यहां जमीन 10 से 12 लाख रुपए प्रति कट्ठा तक में मिल जाती है, जो प्रति डिसमिल के हिसाब से करीब 3 लाख रुपए बैठती है। हालांकि जितेंद्र स्पष्ट करते हैं कि ऐसी जमीन पूरी तरह शहर और बाजार से कटी हुई होती है, और इसका इस्तेमाल सिर्फ खेती के लिए ही किया जा सकता है, रहने के लिए नहीं। वहीं जो लोग बसने के मकसद से जमीन खरीदना चाहते हैं, यानी जहां रास्ता आसानी से उपलब्ध हो और घर बनाकर रहा जा सके, वहां उन्हें 30 से 45 लाख रुपए प्रति कट्ठा तक चुकाने पड़ सकते हैं। इस तरह जमुई का यह पूरा उदाहरण साफ बताता है कि जमीन की कीमत तय करने में सिर्फ शहर से दूरी मायने नहीं रखती, बल्कि मुख्य सड़क से नजदीकी भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है, और यही वजह है कि एक ही गांव में भी जमीन के दाम कई गुना तक अलग-अलग मिल जाते हैं।


















