संसद का सत्र पिछले 20 दिनों से लगातार जारी हंगामे और गतिरोध की भेंट चढ़ रहा है। विपक्ष द्वारा लगातार प्रश्न काल और विधायी कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करने के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने सदन के भीतर सीधी चर्चा की पेशकश की। हालांकि, जंतर मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे राहुल गांधी और इंडी गठबंधन के नेताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय नई शर्तें रख दी हैं।
लोकसभा में चर्चा के लिए समय सीमा और अमित शाह का फॉर्मूला
गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के विरोध का जवाब देते हुए एक स्पष्ट संसदीय प्रक्रिया का प्रस्ताव सामने रखा। उन्होंने कहा कि विपक्ष दोपहर 2 बजे तक लोकसभा स्पीकर को लिखित आवेदन सौंपे ताकि दोपहर 3 बजे से पूरे मामले पर औपचारिक बहस शुरू कराई जा सके। गृह मंत्री ने यह प्रतिबद्धता भी जताई कि वे विपक्षी सांसदों की हर बात और सवाल को ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा अगले दिन सरकार की ओर से विस्तृत जवाब देंगे। इसके बावजूद, विपक्षी दलों की ओर से स्पीकर को कोई औपचारिक पत्र नहीं सौंपा गया।
विपक्ष की शर्तें और संसदीय नियमों पर छिड़ी बहस
चर्चा के तय फॉर्मूले को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तर्क दिया कि गृह मंत्री को बहस का समय और एजेंडा तय करने का अधिकार नहीं है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उन्हें सरकार के व्याख्यान सुनने में कोई रुचि नहीं है और अमित शाह को केवल विपक्ष द्वारा पूछे गए सीमित प्रश्नों का ही उत्तर देना चाहिए। इस पर गृह मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि संसद नियमों और ऑन रिकॉर्ड सवालों से चलती है, न कि मीडिया के माध्यम से लगाई गई व्यक्तिगत शर्तों पर।
संसदीय कार्य मंत्री का हस्तक्षेप और एंटी पेपर लीक बिल का पत्र
अपराह्न 3 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही पुन: प्रारंभ हुई, तो विपक्षी सांसदों ने दोबारा नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में खड़े होकर विपक्षी दलों से तुरंत हंगामा बंद करने और बहस शुरू करने की अपील की। उधर, सरकार की तरफ से अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र लिखकर चर्चा शुरू कराने का आधिकारिक अनुरोध किया। पत्र में उल्लेख किया गया कि एंटी पेपर लीक विषय पर विपक्ष ने अपने विचार प्रस्तुत नहीं किए हैं, फिर भी सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर विस्तृत बहस के लिए पूरी तरह तैयार है।
झारखंड के छात्र आंदोलन और 12 वर्षों के राजनीतिक ट्रैक रिकॉर्ड पर निशाना
संसदीय गतिरोध के साथ-साथ झारखंड में छात्रों का आंदोलन जारी है, जिससे विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। जहां एक ओर राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचने का दावा कर रहे हैं, वहीं झारखंड के घटनाक्रम से उनकी स्वयं की छवि पर असर पड़ता दिख रहा है। वर्ष 2014 और 2016 के बाद से लगातार चुनावी असफलताओं के बावजूद विपक्ष द्वारा एक ही प्रकार के राजनीतिक दांव आजमाए जा रहे हैं। संसद में विदेशी फंडिंग से जुड़े नए विधेयक के आगमन ने इस पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ ला दिया है।



















