सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान वित्तीय मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज कराया है। जुलाई से सितंबर 2026 की इस अवधि में बैंक का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बीते वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक ने 20,160 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया था। बैंक की कुल आय और मुख्य ब्याज कारोबार से होने वाली आमदनी दोनों में ही ठोस प्रगति देखने को मिली है।
कुल राजस्व और ब्याज आय में ठोस उछाल
शेयर बाजार को भेजी गई नियामक सूचना के अनुसार, सितंबर 2026 को समाप्त हुई दूसरी तिमाही में बैंक की कुल आय बढ़कर 1,43,796 करोड़ रुपये रही। एक वर्ष पूर्व समान अवधि में यह आंकड़ा 1,34,979 करोड़ रुपये था। बैंक की मूल ब्याज आधारित कमाई में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। समीक्षाधीन तिमाही के दौरान ब्याज से होने वाली आमदनी 1,32,019 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में दर्ज 1,19,654 करोड़ रुपये के मुकाबले अधिक है। यह वृद्धि स्पष्ट करती है कि बैंक को अपने ऋण वितरण और अन्य ब्याज आधारित वित्तीय गतिविधियों से मजबूत प्रतिफल प्राप्त हुआ है।
परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार और घटता एनपीए
बैंक के बहीखाते की सेहत के लिहाज से सबसे अहम बात यह रही कि इसके फंसे हुए कर्ज यानी गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। 30 सितंबर 2026 तक बैंक का सकल एनपीए उसके कुल अग्रिम के अनुपात में घटकर 1.39 प्रतिशत रह गया। एक साल पहले सितंबर तिमाही के अंत में यह अनुपात 1.73 प्रतिशत पर था। इसी प्रकार शुद्ध एनपीए भी कम होकर 0.36 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले वर्ष समान समय में 0.42 प्रतिशत था। इस गिरावट से स्पष्ट संकेत मिलता है कि बैंक के बट्टे खाते या जोखिम भरे कर्ज के अनुपात में लगातार कमी आ रही है और ऋण वसूली मजबूत बनी हुई है।
फंसे कर्जों के लिए प्रावधान में भारी कटौती
परिसंपत्ति गुणवत्ता बेहतर होने का सीधा सकारात्मक असर बैंक की प्रावधान लागत पर दिखाई दिया है। समीक्षाधीन दूसरी तिमाही में एसबीआई ने खराब कर्जों से निपटने के लिए 2,759 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। बीते वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक को इसके लिए 4,132 करोड़ रुपये की राशि अलग रखनी पड़ी थी। फंसे कर्ज के जोखिम में आई इस कमी के कारण बैंक को सुरक्षा कोष के रूप में पहले से काफी कम पूंजी रोकनी पड़ी, जिससे बैंक के समग्र शुद्ध लाभ को सीधा सहारा मिला।
कंसोलिडेटेड स्तर पर समूह का मुनाफा 20 फीसदी बढ़ा
पूरे एसबीआई समूह के समेकित वित्तीय प्रदर्शन को देखें तो कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ में 20 प्रतिशत की जोरदार छलांग देखने को मिली है। समूह का शुद्ध लाभ बढ़कर 25,361 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि बीते वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 21,137 करोड़ रुपये रहा था। इस दौरान एसबीआई समूह की समेकित कुल आय भी पिछले साल के 1,75,898 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,87,756 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई।


















