लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री विदेशी ताकतों के सहारे सत्ता में आए हैं और देश का पूरा आर्थिक ढांचा आज भी विदेशियों की पकड़ में है। उन्होंने यह दावा भी किया कि सोशल मीडिया के मंचों पर विदेशी ताकतें प्रधानमंत्री के समर्थन में खड़ी नजर आती हैं। इन तीखे आरोपों पर पलटवार करते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है और विपक्षी नेता को संभलकर बयान देने की चेतावनी दी है।
विदेशी और स्वदेशी के मुद्दे पर दी नसीहत
बृजभूषण शरण सिंह ने राहुल गांधी के बयानों का खंडन करते हुए कहा कि विदेशी और स्वदेशी के मामले पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हुई तो बात काफी दूर तक जाएगी। सिंह ने राहुल गांधी की राजनीतिक सोच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं पर भरोसा नहीं है। यही कारण है कि वे अक्सर अमेरिका की घटनाओं का हवाला देते हैं और भारत की तुलना बांग्लादेश के मौजूदा हालातों से करते हैं। इसके अलावा वे नेपाल और पाकिस्तान के नजरिए से भी देश की स्थिति को देखने की कोशिश करते हैं। बृजभूषण ने सवाल दागा कि जब राहुल गांधी इस्तीफे की मांग उठाते हैं, तो इन सभी गंभीर विषयों को देश की संसद में चर्चा के लिए क्यों नहीं लाते।
सड़क के बजाय संसद में बहस की खुली चुनौती
संसदीय मर्यादाओं और बहस के मंच को रेखांकित करते हुए बीजेपी नेता ने स्पष्ट किया कि संसद का गठन ही इसलिए हुआ है ताकि सभी नेता अपनी बात रख सकें। उन्होंने कहा कि कौन विदेशी है और कौन स्वदेशी, इस पर देश की सर्वोच्च पंचायत में ही बात होनी चाहिए क्योंकि पूरा देश असलियत जानता है। राहुल गांधी द्वारा एसआईआर प्रक्रिया में 3 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने के आरोप और गृहमंत्री के उस बयान पर कि वे घुसपैठिए हैं, खुली बहस की मांग उठाई जा रही है। इस पर बृजभूषण शरण सिंह ने सवाल किया कि खुली बहस के लिए संसद से बेहतर और कौन सा स्थान हो सकता है।
सिंह ने टिप्पणी की कि यह संयोग है कि राहुल गांधी इस समय नेता प्रतिपक्ष के संवैधानिक पद पर हैं। ऐसे में संसद को छोड़कर रामलीला मैदान, कुरुक्षेत्र या बांग्लादेश की सीमा पर बहस करने की बातें करना पूरी तरह बेतुका है। डिबेट के लिए देश में पहले से ही एक मजबूत फोरम मौजूद है। हालिया सत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में जब संसद दोबारा शुरू होगी, तो राहुल गांधी को पूरा एक दिन चर्चा के लिए दिया जाना चाहिए। सिंह ने आग्रह किया कि एक पूरा दिन केवल राहुल गांधी के लिए तय कर दिया जाए और अगले दिन बाकी विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर मिले, क्योंकि विपक्ष जरूरी मुद्दों पर वहां चर्चा नहीं करता जहां करनी चाहिए।
एसआईआर और वोटर सूची संशोधन पर दिया स्पष्टीकरण
वोटर लिस्ट में बदलाव और एसआईआर से जुड़े सवालों पर भी बृजभूषण शरण सिंह ने विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत कुल 13 करोड़ मतदाताओं की संख्या घटी है, जबकि 101 करोड़ नाम सूची से हटाए गए हैं। गृहमंत्री द्वारा जिन 3 करोड़ लोगों का जिक्र किया गया था, वे अवैध घुसपैठिए हैं जिनका संबंध बांग्लादेश या रोहिंग्या आबादी और अन्य देशों से हो सकता है। हालांकि इसका आशय यह कतई नहीं है कि हटाए गए सभी मतदाता वही थे।
फारूक अब्दुल्ला द्वारा उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के नाम घटने पर उठाए गए सवालों पर चुटकी लेते हुए सिंह ने कहा कि कई मतदाता ऐसे थे जिनके नाम गांव, शहर और दिल्ली जैसी जगहों पर एक साथ दर्ज थे। कई लोगों के नाम तीन, चार और यहां तक कि पांच जगहों की सूचियों में शामिल थे। इस तरह के मामलों में हिंदू और मुसलमान दोनों ही वर्गों के लोग शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर का यह प्रशासनिक काम किसी धर्म विशेष के नजरिए से नहीं किया गया है, बल्कि इसका एकमात्र उद्देश्य एक वास्तविक और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुल कटे नामों में वे 3 करोड़ लोग भी शामिल हैं, जिनके प्रति विपक्ष का प्रेम समय-समय पर जाग जाता है।

















