एक ही खेत, एक जैसी मेहनत — फिर काला तरबूज नामधारी से ₹25-30 महंगा क्यों? किसानों ने खोला राजव्यापार
3 घंटे पहले· 0

एक ही खेत, एक जैसी मेहनत — फिर काला तरबूज नामधारी से ₹25-30 महंगा क्यों? किसानों ने खोला राज

मधुबनी के किसानों के मुताबिक काला गोल तरबूज और चितकबरा नामधारी तरबूज की खेती बिलकुल एक जैसी होती है, फिर भी बाजार में काला तरबूज प्रति 5 किलो ₹25-30 महंगा बिकता है। वजह खेत में नहीं, ग्राहकों की पसंद और मांग में छिपी है।

गर्मी आते ही मधुबनी के बाजार तरबूज से भर जाते हैं, लेकिन खरीदारी करने पहुँचे ग्राहक को अक्सर दो किस्में सामने दिखती हैं — एक गोल और गहरे रंग का काला तरबूज, और दूसरा चितकबरा यानी नामधारी तरबूज। दिलचस्प बात यह है कि दोनों को उगाने में लगने वाला खेत, किसान की मेहनत और करीब 6 महीने का समय लगभग बराबर होता है, फिर भी काला तरबूज नामधारी की तुलना में प्रति 5 किलो ₹25-30 ज्यादा दाम पर बिकता है। आखिर एक जैसी खेती के बावजूद यह फर्क क्यों? इसी सवाल का जवाब खोजने पर एक रोचक बात सामने आई।

पहले समझिए तरबूज की अहमियत

गर्मियों में तरबूज सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में से एक है। इसे सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें लगभग 70% पानी होता है और इसकी मिठास बहुत तेज नहीं होती। यही वजह है कि लू और गर्मी के दिनों में लोग इसे खूब पसंद करते हैं। ऐसे में जब एक ही खेत में उगा काला और नामधारी तरबूज अलग-अलग कीमत पर बिके, तो खरीदार का चौंकना स्वाभाविक है।

दाम का फर्क खेत में नहीं, मांग में है

किसानों से बातचीत में साफ हुआ कि कीमत का यह अंतर खेती की लागत से नहीं, बल्कि बाजार की मांग से तय होता है। काले तरबूज की माँग ज्यादा रहती है, इसलिए यह नामधारी की तुलना में प्रति 5 किलो लगभग ₹25-30 महंगा बिकता है।

TrendKia से बातचीत में किसान उमेश चोरबार ने बताया कि स्वाद के लिहाज से दोनों ही तरबूज अच्छे होते हैं, लेकिन लोगों के मन में यह धारणा बैठी हुई है कि काला तरबूज नामधारी से ज्यादा मीठा होता है और उसका गूदा अंदर से ज्यादा लाल निकलता है। इसी सोच की वजह से बाजार में काले तरबूज की मांग बनी रहती है, और मांग ज्यादा होने के कारण उसका दाम हमेशा नामधारी से प्रति 5 किलो ₹25-30 ऊपर रहता है।

इस समय क्या चल रहे हैं भाव

उमेश के मुताबिक फिलहाल नामधारी तरबूज 5 किलो के हिसाब से ₹90 से ₹100 के बीच बिक रहा है, जबकि काला तरबूज ₹125 से ₹130 प्रति 5 किलो तक पहुँच जाता है। यह ₹25-30 का फासला कोई इस साल की बात नहीं, बल्कि लगभग हर साल इसी तरह बना रहता है।

थोक में दोनों बराबर, खुदरा में खेल

सबसे चौंकाने वाली बात किसानों ने यह बताई कि जब वे सीधे खेत से थोक खरीदारों को तरबूज बेचते हैं, तब दोनों किस्मों का दाम लगभग एक जैसा ही मिलता है। फर्क बाद में पैदा होता है — यही थोक खरीदार आगे बाजार में काले तरबूज को महंगा बेचते हैं। आम ग्राहक खरीदते वक्त इस बारीकी पर ध्यान नहीं देता, लेकिन अगली बार अगर आप दुकानदार से दाम का कारण पूछेंगे तो आपको भी यही वजह सुनने को मिलेगी।

घर पर कितने दिन टिकता है तरबूज

अगर आप तरबूज खरीदकर लाए हैं तो यह भी जान लेना उपयोगी है कि बिना काटे इसे घर में 5 से 6 दिन तक आराम से रखा जा सकता है। वहीं अगर इसे फ्रिज में रखें, तो यह 1 सप्ताह से 10 दिन तक भी खराब नहीं होता।

सवाल-जवाब

काला तरबूज नामधारी से कितना महंगा है?
काला तरबूज नामधारी की तुलना में प्रति 5 किलो लगभग ₹25-30 महंगा बिकता है।
दोनों तरबूज की कीमत में फर्क क्यों होता है?
यह फर्क खेती की लागत से नहीं बल्कि बाजार की मांग से तय होता है, क्योंकि लोग काले तरबूज को ज्यादा मीठा और अंदर से ज्यादा लाल मानते हैं।
अभी मधुबनी में तरबूज के क्या भाव हैं?
नामधारी तरबूज ₹90 से ₹100 और काला तरबूज ₹125 से ₹130 प्रति 5 किलो बिक रहा है।
तरबूज को घर में कितने दिन रखा जा सकता है?
बिना काटे तरबूज को 5 से 6 दिन तक और फ्रिज में रखने पर 1 सप्ताह से 10 दिन तक रखा जा सकता है।
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