खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू होते ही बालाघाट में किसानों के सामने खाद की किल्लत और बढ़ती कीमतों का नया संकट खड़ा हो गया है. इस साल अलनीनो का असर बना हुआ है, जिसकी वजह से कम बारिश की आशंका पहले से जताई जा रही है. इसके बावजूद किसानों ने अपने स्तर पर धान की बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन जरूरी उर्वरकों की उपलब्धता में आई कमी ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है.
कौन सी खाद कितनी महंगी हुई
सोसायटियों में इस साल NPK 102626 उपलब्ध है, जिसकी कीमत 2450 रुपए तय की गई है. वहीं NPK 2020013 कुछ दिन पहले तक 1450 रुपए में मिल रहा था, जो अब बढ़कर 2100 रुपए तक पहुंच गया है, यानी इसकी कीमत में सीधे 650 रुपए का इजाफा हुआ है. SSP खाद भी पहले से महंगी हो गई है, इसका दाम 505 रुपए से बढ़कर 605 रुपए हो गया है. सबसे ज्यादा मांग वाली DAP खाद तो सोसायटियों से पूरी तरह गायब है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है.
लागत दोगुनी, आय जस की तस
भारत की अर्थव्यवस्था में खेती का बड़ा योगदान है, लेकिन जिस किसान ने इस अर्थव्यवस्था को मजबूती दी, वही अब खेती को घाटे का सौदा बताने लगा है. बीते दिनों ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है और खेती अब ज्यादातर उपकरणों पर निर्भर हो चुकी है, इसलिए खेतों में ईंधन की खपत भी बढ़ गई है. इसके साथ ही बढ़ती महंगाई ने मजदूरी की दरें भी ऊपर पहुंचा दी हैं. किसानों का कहना है कि सरकार भले ही उनकी आय दोगुनी न कर सकी हो, लेकिन खेती की लागत जरूर दोगुनी हो गई है.
किसान गर्जना के बैनर तले आंदोलन तेज
बालाघाट में किसान गर्जना के बैनर तले लगातार आंदोलन चल रहे हैं. संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी का कहना है कि आंदोलन चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा. शुरुआत में संगठन की ग्रामीण इकाइयां सोसायटियों में जाकर ज्ञापन सौंपेंगी, इसके बाद बड़े स्तर पर आंदोलन खड़ा किया जाएगा. उनका कहना है कि छोटे और मझोले किसानों की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में सरकार को किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है. दिलचस्प बात यह है कि किसानों के इस मुद्दे पर विपक्ष कहीं नजर नहीं आ रहा है.
जैविक खेती और मिट्टी जांच से मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि लागत कम करने के लिए किसानों को अपनी खेती के तरीकों में बदलाव करना होगा. इससे फसल की गुणवत्ता बनी रहेगी, उत्पादन भी बढ़ेगा और जमीन को रासायनिक खादों की निर्भरता से मुक्ति भी मिलेगी. इसके लिए जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ाने की सलाह दी जा रही है. साथ ही खेती के बदलते तरीकों को अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जैसे DSR पद्धति, जिसमें कम लागत में खेत में सीधी बुवाई की जा सकती है. उर्वरकों की जगह गोबर खाद का इस्तेमाल करने और खेत में हरा-नीला शैवाल डालने की भी सलाह दी गई है.
सबसे अहम सलाह यह है कि किसानों को अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करानी चाहिए. इससे यह पता चलता है कि खेत में कितने पोषक तत्वों की जरूरत है और कौन सी खाद कितनी मात्रा में डाली जानी चाहिए. इससे न सिर्फ लागत घटेगी बल्कि जमीन भी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी.













