भारतीय सिनेमा के इतिहास में वर्ष 1969 एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ, जब हिंदी फिल्म उद्योग को अपना पहला सुपरस्टार मिला। इस दौर में जहां एक तरफ राजेश खन्ना ने अपनी बहुमुखी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज करना शुरू किया, वहीं दूसरी तरफ अभिनेता जितेंद्र और धर्मेंद्र की फिल्मों ने भी सिनेमाघरों में तहलका मचा दिया। उस वर्ष की टॉप 20 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में इन तीनों प्रमुख कलाकारों की कुल 12 फिल्में शामिल थीं। राजेश खन्ना के उफान मारते स्टारडम के बीच जितेंद्र और धर्मेंद्र ने भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, जिसके चलते यह साल हिंदी सिनेमा के सबसे सफल और सुनहरे पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
राजेश खन्ना का सुपरस्टारडम और पांच बड़ी हिट फिल्में
वर्ष 1969 को मुख्य रूप से राजेश खन्ना के करियर के सबसे बड़े मील के पत्थर के रूप में याद किया जाता है। इसी साल उनकी आइकॉनिक फिल्म आराधना सिनेमाघरों में रिलीज हुई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर का ऐतिहासिक दर्जा हासिल किया। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी और यह रोमांटिक ड्रामा कई हफ्तों तक थिएटर्स से उतरने का नाम नहीं ले रहा था। आराधना की अपार सफलता के बाद राजेश खन्ना ने अपने करियर में लगातार 17 सुपरहिट फिल्में देने का एक अद्भुत कीर्तिमान भी स्थापित किया।
केवल आराधना ही नहीं, बल्कि 1969 में राजेश खन्ना की चार अन्य प्रमुख फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुईं और वे सभी हिट साबित हुईं। निर्देशक राज खोसला के निर्देशन में बनी फिल्म दो रास्ते साल की दूसरी सबसे बड़ी कमाऊ फिल्म बनी, जिसमें राजेश खन्ना की जोड़ी अभिनेत्री मुमताज के साथ काफी पसंद की गई। इसके अलावा, मुमताज के साथ ही उनकी एक और फिल्म बंधन उस साल की छठी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म रही। वहीं, अभिनेत्री बबीता कपूर के संग उनकी फिल्म डोली 10वीं सबसे सफल फिल्म बनी। इसके साथ ही निर्देशक यश चोपड़ा की सस्पेंस थ्रिलर फिल्म इत्तेफाक में भी राजेश खन्ना के अभिनय की जमकर सराहना हुई। इस तरह 1969 की टॉप फिल्मों में राजेश खन्ना की 5 फिल्में मुख्य भूमिकाओं में शामिल रहीं।
जितेंद्र की कड़ी टक्कर और धर्मेंद्र का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा
जिस दौर में राजेश खन्ना का स्टारडम पूरे देश में सिर चढ़कर बोल रहा था, उस समय अभिनेता जितेंद्र ने बॉक्स ऑफिस पर उन्हें डटकर मुकाबला दिया। वर्ष 1969 में जितेंद्र की भी 4 फिल्में टॉप 20 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली सूची में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहीं। अभिनेत्री तनुजा के साथ उनकी फिल्म जीने की राह उस साल की 5वीं सबसे बड़ी हिट साबित हुई। इसके साथ ही उनकी अन्य तीन प्रमुख फिल्में जिगरी दोस्त, धरती कहे पुकार के और वारिस भी साल की शीर्ष 20 फिल्मों के चार्ट में मजबूती से शामिल रहीं।
इसी ऐतिहासिक वर्ष में अभिनेता धर्मेंद्र का भी बॉक्स ऑफिस पर जलवा देखने को मिला और उनकी 3 फिल्मों ने टॉप 20 की सूची में अपनी जगह बनाई। अभिनेत्री आशा पारेख के साथ उनकी रोमांटिक फिल्म आया सावन झूम के साल की 8वीं सबसे बड़ी हिट फिल्म बनी। इसके बाद अभिनेत्री सायरा बानो के साथ उनकी फिल्म आदमी और इंसान 11वें स्थान पर रही। वहीं, दिग्गज अभिनेत्री वैजयंतीमाला के संग धर्मेंद्र की फिल्म प्यार ही प्यार 15वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई। इन तीनों मुख्य अभिनेताओं के अलावा शम्मी कपूर, संजय खान और सुनील दत्त जैसे बड़े कलाकारों की फिल्में भी 1969 में सिनेमाघरों की रौनक बढ़ा रही थीं।
वर्ष 1969 की टॉप 20 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्में
हिंदी सिनेमा के इस स्वर्णिम वर्ष में दर्शकों को एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में देखने को मिलीं। उस दौर के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के अनुसार 1969 की 20 सबसे बड़ी फिल्मों का क्रम इस प्रकार रहा
- 1. आराधना (ब्लॉकबस्टर, मुख्य कलाकार: राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर)
- 2. दो रास्ते (सुपरहिट, मुख्य कलाकार: राजेश खन्ना, मुमताज)
- 3. एक फूल दो माली
- 4. प्यार का मौसम
- 5. जीने की राह (मुख्य कलाकार: जितेंद्र, तनुजा)
- 6. बंधन (मुख्य कलाकार: राजेश खन्ना, मुमताज)
- 7. प्रिंस
- 8. आया सावन झूम के (मुख्य कलाकार: धर्मेंद्र, आशा पारेख)
- 9. इंतकाम
- 10. डोली (मुख्य कलाकार: राजेश खन्ना, बबीता कपूर)
- 11. आदमी और इंसान (मुख्य कलाकार: धर्मेंद्र, सायरा बानो)
- 12. तलाश
- 13. जिगरी दोस्त (मुख्य कलाकार: जितेंद्र)
- 14. इत्तेफाक (निर्देशक: यश चोपड़ा, मुख्य कलाकार: राजेश खन्ना)
- 15. प्यार ही प्यार (मुख्य कलाकार: धर्मेंद्र, वैजयंतीमाला)
- 16. साजन
- 17. राजा साब
- 18. धरती कहे पुकार के (मुख्य कलाकार: जितेंद्र)
- 19. वारिस (मुख्य कलाकार: जितेंद्र)
- 20. भाई बहन
इन 20 सफल फिल्मों की वजह से साल 1969 भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक बेहद व्यावसायिक और कलात्मक रूप से समृद्ध वर्ष बनकर उभरा, जिसने आने वाले दशक के लिए हिंदी फिल्म उद्योग की दिशा तय की।


















