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गया के किसान ने उगाया पीला तरबूज, एक एकड़ में 25 टन की पैदावार और सिलीगुड़ी तक पहुंची मांगव्यापार
15 जून 2026, 11:18 pm (89 दिन पहले)· 1

गया के किसान ने उगाया पीला तरबूज, एक एकड़ में 25 टन की पैदावार और सिलीगुड़ी तक पहुंची मांग

बिहार के गया में किसान धर्मेंद्र कुमार ने पहली बार आरोही किस्म का पीला तरबूज उगाकर एक एकड़ से 25 टन उत्पादन लिया, जो लाल तरबूज से किलो पर 5 रुपये महंगा बिक रहा है और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में इसकी जबरदस्त मांग है।

गया के एक खेत में इस बार लाल नहीं, बल्कि पीले रंग का तरबूज तैयार हुआ है और यही बदलाव किसान धर्मेंद्र कुमार के लिए मुनाफे का नया रास्ता खोल रहा है। उन्होंने आरोही प्रजाति का तरबूज लगाया, जिसकी पैदावार आम लाल तरबूज से कहीं बेहतर निकली। जहां एक एकड़ में लाल तरबूज की पैदावार करीब 20 टन तक रहती है, वहीं इस किस्म ने प्रति एकड़ 25 टन का उत्पादन दिया।

लाल से ज्यादा कीमत, सबसे ज्यादा मांग सिलीगुड़ी में

बाजार में यह पीला तरबूज लाल तरबूज की तुलना में प्रति किलो 5 रुपये ज्यादा दाम पर बिक रहा है। इसकी सबसे बड़ी खपत पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर में है, जहां से इसकी सबसे ज्यादा मांग आ रही है। अपने अलग स्वाद और ज्यादा मिठास की वजह से बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को इसका बेहतर दाम भी मिल रहा है।

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तीन साल का अनुभव, पहली बार नई किस्म

धर्मेंद्र कुमार पिछले 3 साल से लाल तरबूज की खेती कर रहे हैं और हर साल लगभग 10 से 12 एकड़ में इसकी फसल लगाते हैं। इस बार उन्होंने पहली बार पीले तरबूज की खेती की, और वह भी हाजीपुर के किसान अनिल मिश्रा के मार्गदर्शन में। उन्होंने एक एकड़ में यह तरबूज लगाया और अब तक 2 लाख रुपये से अधिक का तरबूज बेच चुके हैं। फिलहाल फसल का उत्पादन खत्म होने के कगार पर है।

90 दिन की फसल, देर से बुवाई का असर

आरोही किस्म का यह तरबूज करीब 90 दिनों की फसल है और बुवाई के 60 दिनों में ही इसमें फलन शुरू हो जाता है। इस बार देर से लगाने के कारण उत्पादन पर कुछ असर पड़ा। धर्मेंद्र कुमार के सलाहकार अनिल मिश्रा बताते हैं कि अगर 10 फरवरी तक खेतों में यह तरबूज लगा दिया जाए, तो प्रति एकड़ 25 टन तक उत्पादन लिया जा सकता है।

स्वाद, सेहत और भंडारण में आगे

अनिल मिश्रा के अनुसार लाल की तुलना में पीला तरबूज ज्यादा मीठा होता है और सेहत के लिहाज से भी ज्यादा गुणकारी माना जाता है। इसमें कई ऐसे गुण होते हैं जो शरीर के लिए काफी लाभदायक हैं, और दोनों के स्वाद में भी अच्छा खासा अंतर रहता है। एक बड़ी खूबी इसकी भंडारण क्षमता भी है, जो लाल तरबूज से ज्यादा होती है।

हार्वेस्टिंग के बाद रखें यह सावधानी

अनिल मिश्रा एक जरूरी सलाह भी देते हैं। उनके मुताबिक पीले तरबूज की हार्वेस्टिंग के तुरंत बाद उसे गाड़ी में लोड नहीं करना चाहिए। तोड़ने के बाद फल को करीब चार घंटे धूप में रहने देना चाहिए और उसके बाद ही गाड़ी में लादना चाहिए, वरना पूरा फल बर्बाद हो सकता है।

सवाल-जवाब

धर्मेंद्र कुमार ने कौन सी किस्म का पीला तरबूज लगाया है?
उन्होंने आरोही प्रजाति का पीला तरबूज लगाया है, जो करीब 90 दिनों की फसल है और 60 दिनों में फलन शुरू कर देती है।
पीले तरबूज की पैदावार और कीमत लाल तरबूज से कितनी अलग है?
लाल तरबूज की एक एकड़ में करीब 20 टन पैदावार होती है, जबकि पीले की 25 टन प्रति एकड़ रही, और यह किलो पर 5 रुपये ज्यादा दाम पर बिकता है।
इस पीले तरबूज की सबसे ज्यादा मांग कहां है?
इसकी सबसे ज्यादा मांग पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर में है।
हार्वेस्टिंग के बाद किस सावधानी की जरूरत है?
तोड़ने के तुरंत बाद फल को गाड़ी में लोड नहीं करना चाहिए, बल्कि करीब चार घंटे धूप में रखने के बाद ही लादना चाहिए, वरना फल बर्बाद हो सकता है।
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