उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी की रहने वाली प्रियांशी इन दिनों युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। वह एक ही समय में अपनी उच्च शिक्षा, नौकरी और कृषि कार्यों की तीनों बड़ी जिम्मेदारियों को बेहद कुशलता के साथ निभा रही हैं। अपनी कड़ी मेहनत और समय के सही प्रबंधन के दम पर उन्होंने साबित कर दिया है कि लगन हो तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है।
पढ़ाई और नौकरी के साथ खेती का जिम्मा
पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर रही प्रियांशी अपनी शिक्षा के साथ-साथ पानी संस्थान में सीआरपी के पद पर कार्यरत रहकर नौकरी भी कर रही हैं। अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर उन्होंने कृषि के क्षेत्र में उतरने का फैसला किया और वर्तमान में करीब दो बीघा खेत में मचान विधि से लौकी और तोरई की फसल उगाई है। उन्हें इस आधुनिक खेती से अच्छी आमदनी की पूरी उम्मीद है।
खुद संभालती हैं खेत की हर गतिविधि
प्रियांशी पांडेय ने बातचीत के दौरान साझा किया कि वह अपने रोजाना के पढ़ाई और नौकरी के सभी जरूरी काम समय पर पूरे करने के बाद सीधे खेतों का रुख करती हैं। खेतों की सिंचाई करना, बेलों की सही देखभाल करना और समय-समय पर तैयार सब्जियों की तुड़ाई करने जैसे सभी काम वह खुद अपने हाथों से करती हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि दिनभर की दिनचर्या में समय का सही तालमेल बिठाया जाए, तो शिक्षा और कृषि को एक साथ आसानी से आगे बढ़ाया जा सकता है।
कम लागत में बंपर मुनाफे की उम्मीद
प्रियांशी ने जानकारी दी कि उन्होंने लगभग दो बीघा भूमि पर मचान तकनीक का इस्तेमाल करके लौकी और तोरई की फसल लगाई है। इस पूरी खेती को तैयार करने में उनकी तरफ से लगभग 10 से 15 हजार रुपये की लागत आई है। उनका कहना है कि अगर मौसम का मिजाज और बाजार में सब्जियों के दाम दोनों अनुकूल रहे, तो उन्हें इस फसल से लाखों रुपये तक का भारी मुनाफा मिल सकता है।
जैविक खादों का हो रहा है विशेष उपयोग
फसल की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रियांशी रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बहुत ही कम करती हैं। इसकी बजाय वह खेतों में गोबर की खाद और अन्य प्राकृतिक जैविक खादों का ही अधिक से अधिक प्रयोग करती हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से उगाई जाने वाली सब्जियों का प्राकृतिक स्वाद बेहतरीन रहता है और साथ ही मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है।
भविष्य की योजनाएं और सालभर की कमाई
प्रियांशी मौसम के बदलाव को ध्यान में रखते हुए लगातार अलग-अलग सब्जियों की खेती करने की योजना पर काम कर रही हैं। वर्तमान में बरसात के सीजन में वह लौकी और तोरई का उत्पादन कर रही हैं, जबकि इस फसल के कटने के बाद उनकी योजना धनिया, मिर्च और गोभी जैसी अन्य फसलों की खेती करने की है। उनका मुख्य उद्देश्य पूरे बारह महीने अलग-अलग तरह की सब्जियां उगाकर एक नियमित और स्थिर आय प्राप्त करना है। प्रियांशी की यह पूरी यात्रा युवाओं को यह संदेश देती है कि मेहनत, आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और जैविक खेती के जरिए कम पैसों में भी शानदार कमाई की जा सकती है।



















