साल 2027 की शुरुआत के साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था के बड़े पर्व अर्धकुंभ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस विशाल धार्मिक आयोजन को पूरी तरह सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए शासन, प्रशासन और अन्य सभी संबंधित विभाग अपनी कार्य योजनाओं को जमीन पर उतारने में पूरी शिद्दत से जुट गए हैं। हरिद्वार का कुंभ क्षेत्र और प्रसिद्ध हर की पौड़ी का इलाका घने वन क्षेत्रों से सटा हुआ है, जिसके कारण इस पूरे इलाके में जंगली जानवरों की आवाजाही आए दिन देखने को मिलती है। मेले के दौरान यहां पहुंचने वाले लाखों और करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनके सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए हरिद्वार वन प्रभाग ने अभी से एक व्यापक और मजबूत सुरक्षा रणनीति तैयार कर ली है।
श्रद्धालुओं और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
इस पूरे मामले को लेकर हरिद्वार के प्रभागीय वनाधिकारी स्वप्निल अनिरुद्ध से विस्तार से बातचीत की गई। उन्होंने आगामी सुरक्षा तैयारियों के बारे में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इस बड़े आयोजन के दौरान कुंभ क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा विभाग के लिए सबसे पहली और अहम प्राथमिकता है। मेले के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता है।
हाथियों की लोकेशन ट्रैक करने के लिए लगेंगे रेडियो कॉलर
प्रभागीय वनाधिकारी ने आगे बताया कि घनी आबादी और मुख्य मेला क्षेत्र की तरफ हाथियों के संभावित मूवमेंट और आवाजाही को लगातार ट्रैक करने के लिए हाथियों को विशेष रूप से रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे। इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से हाथियों की रियल टाइम लोकेशन सीधे तौर पर वन विभाग के मुख्य नियंत्रण कक्ष में उपलब्ध रहेगी, जिससे उनकी हर गतिविधि पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी।
नियंत्रण कक्ष से होगी हाथियों की实时 निगरानी
हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाने से यह फायदा होगा कि यदि हाथियों का कोई भी झुंड रिहायशी इलाकों या कुंभ क्षेत्र की तरफ रुख करता है, तो वन विभाग की त्वरित टीम तुरंत मौके पर सक्रिय हो जाएगी। इसके बाद इन जंगली जानवरों को पूरी सुरक्षा के साथ वापस घने जंगलों की ओर सुरक्षित तरीके से खदेड़ने और भेजने का काम किया जाएगा।
मेला क्षेत्र में बनाया जाएगा विशेष वॉच टावर
हरिद्वार वन प्रभाग के अधिकारियों के अनुसार निगरानी तंत्र को पूरी तरह से अभेद्य और मजबूत बनाने के लिए कुंभ मेला क्षेत्र के भीतर एक विशेष वॉच टावर का निर्माण भी किया जाएगा। इस नए वॉच टावर पर वन विभाग के प्रशिक्षित जवानों की चौबीसों घंटे यानी चौबीसों घंटे तैनाती की जाएगी। ये जवान दूरबीन और अन्य आधुनिक उपकरणों के जरिए जंगली जानवरों के मूवमेंट पर लगातार पैनी नजर बनाए रखेंगे।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ाई जाएगी सुरक्षा गश्त
वन विभाग की तरफ से सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त को काफी ज्यादा बढ़ाया जाएगा, ताकि मेले के दौरान किसी भी स्थिति में मानव और वन्यजीव संघर्ष की संभावना को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके। इन तमाम पुख्ता इंतजामों का उद्देश्य यही है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अर्धकुंभ 2027 के दौरान बिना किसी डर और भय के पावन स्नान और दर्शन का लाभ उठा सकें।





















