हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी गांवों में सदियों से बनते आ रहे खास उत्पादों को अब बड़े बाजार तक पहुंचाने की तैयारी है। राज्य सरकार की एक जिला तीन उत्पाद (ODtP) योजना का मकसद है कि प्रदेश के हर जिले की अपनी अलग पहचान बने और वहां के लोगों को घर के पास ही कमाई का पक्का जरिया मिले। इसी सोच के साथ हर जिले से तीन-तीन उत्पाद चुनकर कुल 36 उत्पादों की सूची तैयार की गई है।
किस आधार पर चुने गए ये उत्पाद
ये 36 उत्पाद यूं ही नहीं तय हुए। हर उत्पाद की आर्थिक संभावना, बाजार में उसकी मांग और स्थानीय स्तर पर उसके महत्व को बारीकी से परखा गया, उसके बाद ही उन्हें इस योजना में शामिल किया गया। मकसद साफ है, जो चीज जिस इलाके की खासियत है, उसी को उस जिले की ब्रांड पहचान बनाया जाए।
हर जिले की अपनी खासियत
चुने गए उत्पादों की फेहरिस्त प्रदेश की विविधता को दिखाती है। बिलासपुर से अदरक, रेशम उत्पादन और मत्स्य पालन को जगह मिली है, तो चंबा से चंबा चप्पल, सफेद मक्का और ऊन को। हमीरपुर की पहचान हल्दी, बांस और मक्का बनेंगे, जबकि कांगड़ा से कांगड़ा चाय, मिनिएचर पेंटिंग और गिलोय शामिल किए गए हैं।
किन्नौर से हिमाचली चुल्ली तेल, किन्नौरी शॉल और चिलगोजा को चुना गया है। कुल्लू की झोली में ट्राउट मछली, भांग का तेल और कुल्लू टोपी आई है। लाहौल और स्पीति से सीबकथॉर्न, पुल्ले और हरी मटर को जगह मिली है, वहीं मंडी से सेपू बड़ी, धातु शिल्प और पत्थर व लकड़ी की नक्काशी को चुना गया है।
शिमला से सेब आधारित उत्पाद, स्थानीय शहद, जौ माल्ट और आटा तथा गुच्छी मशरूम को शामिल किया गया है। सिरमौर से लहसुन, अदरक और सिरमौरी लोइया, सोलन से मशरूम, टमाटर और फार्मास्युटिकल्स, और ऊना से आलू, लीची और ड्रैगन फ्रूट इस सूची का हिस्सा हैं।
जमीन पर अब तक क्या हुआ
योजना को आगे बढ़ाने के लिए सरकार पहले ही तीन विक्रेता विकास कार्यक्रम और पांच रोजगार विकास कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है। इनका मकसद स्थानीय लोगों में कारोबारी हुनर बढ़ाना और उत्पादकों को संभावित खरीदारों और उद्योगों से सीधे जोड़ना रहा है।
अगले चरण में अक्टूबर 2026 में इन उत्पादों की एक बड़ी प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसके साथ रिवर्स बायर-सेलर मीट भी होगी। इस आयोजन में उत्पादक, निर्यातक, निवेशक, खुदरा कारोबारी और उद्योग जगत से जुड़े लोग एक ही मंच पर आएंगे, ताकि कारोबारी साझेदारियां बन सकें और बाजार तक पहुंच मजबूत हो। सरकार को उम्मीद है कि इससे स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, युवाओं और महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और उत्पादों में वैल्यू एडिशन के नए मौके खुलेंगे।
निवेश के लिए रियायतों का पैकेज
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के मुताबिक आने वाली औद्योगिक नीति में इन चुने हुए उत्पादों से जुड़े उद्यमों के लिए रियायतों का पूरा पैकेज दिया जाएगा। इसमें जमीन पर छूट, स्टांप ड्यूटी में रियायत, सस्ती बिजली, SGST की वापसी और प्राथमिकता क्षेत्र का दर्जा शामिल रहेगा, ताकि प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग में निवेश को बढ़ावा मिले।
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा कारोबार-अनुकूल माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें स्थानीय उद्यम अपना कारोबार बढ़ा सकें और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुकाबला कर सकें।
ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री पर जोर
मुख्यमंत्री का कहना है कि इन उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर खास ध्यान दिया जाएगा। उत्पादकों को बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा और उन्हें व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों तथा बायर-सेलर मीट में हिस्सा लेने में मदद दी जाएगी। सुक्खू के शब्दों में, यह योजना प्रदेश की समृद्ध विरासत और पारंपरिक हुनर को बचाने के साथ-साथ रोजगार भी पैदा करेगी। उनका मानना है कि इससे ग्रामीण आमदनी बढ़ेगी और राज्य के समग्र आर्थिक विकास में बड़ा योगदान मिलेगा।



















