लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए भाषण में देश की आर्थिक शक्ति को बढ़ाने का एक बड़ा विजन प्रस्तुत किया गया। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने के साथ-साथ यह स्पष्ट किया गया कि भारत वर्तमान में दुनिया के 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इन देशों में अमेरिका और यूरोप जैसी विश्व की शीर्ष आर्थिक महाशक्तियां भी शामिल हैं। वैश्विक पटल पर भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार और स्थानीय उद्योगों को मजबूत करने के दृष्टिकोण से यह व्यापारिक नीति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की सीधी पहुंच
व्यापारिक रणनीति का मुख्य उद्देश्य घरेलू उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालना है। लाल किले की प्राचीर से संबोधन के दौरान जोर दिया गया कि भारत को इस वैश्विक अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। देश में निर्मित होने वाली भारी मशीनरी से लेकर जीवन रक्षक दवाइयों तक, हर उत्पाद को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने की तैयारी है। भारतीय विनिर्माण क्षेत्र अब अंतरराष्ट्रीय पैरामीटर को पार कर रहा है। रणनीति यह है कि वैश्विक बाजार में पहले से बिक रहे सामान की तुलना में अधिक गुणवत्ता वाला उत्पाद कम कीमत पर उपलब्ध कराया जाए, जिससे भारतीय ब्रांड्स की साख मजबूत हो सके।
क्या है मुक्त व्यापार समझौता और कैसे मिलता है लाभ?
मुक्त व्यापार समझौता या FTA दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाली एक ऐसी व्यापारिक संधि है, जिसके तहत आयात और निर्यात होने वाली वस्तुओं पर लगने वाले सीमा शुल्क या टैरिफ को या तो पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता है या न्यूनतम स्तर पर ला दिया जाता है। जब भारत किसी देश के साथ FTA पर हस्ताक्षर करता है, तो भारतीय सामान उस देश में बिना किसी अतिरिक्त आयात शुल्क के पहुंचता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्तुओं की कीमत प्रतिस्पर्धात्मक रूप से सस्ती हो जाती है, जिससे उनकी मांग में भारी वृद्धि दर्ज की जाती है। ठीक इसी प्रकार, साझेदार देश का सामान भी बिना भारी टैक्स के भारत आता है। इसका सीधा फायदा घरेलू उपभोक्ताओं को मिलता है, क्योंकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण विदेशी सामान कम कीमत पर उपलब्ध हो जाता है।
किन देशों के साथ कहां तक पहुंची बात?
भारत ने करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में मॉरीशस के साथ FTA पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से इस प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है। इसके पश्चात UAE, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, UK, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ वार्ता का चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त अमेरिका, यूरोप, कनाडा, पेरू, चिली, इजराइल, मालदीव और कोरिया के साथ व्यापारिक बातचीत अपने अंतिम दौर में प्रवेश कर चुकी है। भारत अब तक 17 देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ औपचारिक रूप से FTA लागू कर चुका है।
निर्यात में उछाल: अप्रैल से जून तिमाही के ताजा आंकड़े
सरकारी आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि मुक्त व्यापार समझौतों का सकारात्मक प्रभाव आंकड़ों में दिखने लगा है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान FTA साझेदार देशों को होने वाला भारतीय निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, मॉरीशस, UAE, EU, ASEAN और EFTA जैसे महत्वपूर्ण समूहों और देशों के आंकड़े इस वृद्धि की पुष्टि करते हैं।
- सिंगापुर: निर्यात 101 फीसदी बढ़कर 6.52 अरब डॉलर पहुंच गया।
- श्रीलंका: भारतीय निर्यात में 124 फीसदी का उछाल आया और यह 2.35 अरब डॉलर रहा।
- ASEAN क्षेत्र: व्यापार 61.6 फीसदी बढ़कर 14.61 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा।
- दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र: निर्यात 37 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 6.15 अरब डॉलर रहा।
- मलेशिया: 75 फीसदी की वृद्धि के साथ निर्यात 2.54 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
- ऑस्ट्रेलिया: 25 फीसदी का इजाफा हुआ और आंकड़ा 2.68 अरब डॉलर रहा।
- ब्रिटेन (UK): निर्यात 11 फीसदी बढ़कर 3.69 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
- दक्षिण कोरिया: 22.6 फीसदी की वृद्धि के साथ निर्यात 1.95 अरब डॉलर रहा।
- जापान: 22.4 फीसदी की बढ़त के साथ व्यापार 1.75 अरब डॉलर तक पहुंचा।
- ओमान: 26.4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ निर्यात 1.39 अरब डॉलर रहा।
- नेपाल: 18 फीसदी की वृद्धि के साथ आंकड़ा 2.28 अरब डॉलर दर्ज हुआ।
इन आंकड़ों से साफ है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत के व्यापारिक समझौते देश के निर्यात क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं।



















