टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली विमानन कंपनी एयर इंडिया आने वाले समय में अपनी उड़ानों की संख्या में फिर से बढ़ोतरी कर सकती है। कंपनी के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर कैंपबेल विल्सन ने संकेत दिए हैं कि यदि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम रहता है और हवाई क्षेत्र पर लगी पाबंदियों में ढील के साथ-साथ ATF यानी विमान ईंधन की कीमतों में गिरावट का दौर जारी रहता है, तो एयरलाइन अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की गई हालिया कटौती को वापस ले सकती है।
मई महीने में उड़ानों में की गई थी बड़ी कटौती
उल्लेखनीय है कि एयर इंडिया ने बीते मई महीने में हवाई मार्गों पर लगी पाबंदियों और ईंधन की आसमान छूती कीमतों के कारण अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 27 प्रतिशत की बड़ी कटौती की थी। ईंधन की बढ़ी हुई दरों की वजह से अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानों के संचालन की लागत काफी ज्यादा बढ़ गई थी। इस वित्तीय दबाव और घाटे से निपटने के लिए कंपनी ने अस्थायी रूप से अपनी घरेलू उड़ानों में भी 22 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की थी।
तनाव कम होने से मिली राहत लेकिन अनिश्चितता बरकरार
कर्मचारियों को शुक्रवार को भेजे गए एक संदेश में विल्सन ने स्पष्ट किया कि हालांकि पश्चिम एशिया में वर्तमान में तनाव कम हुआ है, लेकिन भविष्य में इसके दोबारा न बढ़ने की कोई ठोस गारंटी नहीं है। इसके बावजूद, मौजूदा शांत और स्थिर माहौल की वजह से अधिक हवाई मार्ग उपलब्ध हो गए हैं और ATF की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि यह सकारात्मक रुख आगे भी बना रहता है, तो एयरलाइन बीते महीनों में की गई कटौतियों को वापस लेने में सक्षम होगी और जल्द ही परिचालन सामान्य स्तर पर लौट सकेगा।
हवाई क्षेत्र की पाबंदियां और बेड़े का विस्तार
पश्चिम एशिया में विवाद बढ़ने के बाद सुरक्षा कारणों से कई हवाई क्षेत्रों को बंद कर दिया गया था, जिससे विमान ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया था। किसी भी विमानन कंपनी के कुल परिचालन खर्च में विमान ईंधन यानी ATF की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से भी अधिक होती है। ऐसे में कीमतों में आई नरमी एयर इंडिया के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। विल्सन ने यह भी जानकारी दी कि इस वर्ष एयर इंडिया के बेड़े में 8 नए या पुनर्निर्मित बड़े आकार वाले विमान शामिल किए जाएंगे। इनमें इस वीकेंड पर शामिल होने वाला नया B-787-9 विमान भी शामिल है।













