प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अगस्त को सुबह 9:30 बजे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन कार्यक्रम में शामिल होंगे। मोदी ने 11 अगस्त को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर इस कार्यक्रम में अपनी भागीदारी की जानकारी दी।
किताब और उसका शीर्षक
इस आत्मकथा का शीर्षक 'Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles' है। मोदी की पोस्ट के मुताबिक, इस किताब में रामनाथ कोविंद के निजी सफर और उन संघर्षों को बयां किया गया है जिन्होंने उनके जीवन को आकार दिया। किताब का शीर्षक खुद बताता है कि यह कहानी सिर्फ उपलब्धियों की नहीं बल्कि मुश्किलों से पार पाने की भी है, जो देश के सबसे बड़े संवैधानिक पदों में से एक तक पहुंचने के उनके सफर को दिखाती है। देश के पूर्व राष्ट्रपतियों की आत्मकथाओं की छोटी सी फेहरिस्त में अब यह किताब भी शामिल हो गई है, और इसके विमोचन को एक बड़े साहित्यिक आयोजन के तौर पर देखा जा रहा है।
रामनाथ कोविंद की भूमिका
पोस्ट में रामनाथ कोविंद को देश के पूर्व राष्ट्रपति बताया गया है। उनकी आत्मकथा में उनके सार्वजनिक जीवन के अहम पड़ावों का जिक्र होने की उम्मीद है, हालांकि मोदी की पोस्ट में किताब की पूरी विषयवस्तु के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया। पोस्ट में यह भी नहीं बताया गया कि कोविंद कब राष्ट्रपति पद से हटे थे, यह पोस्ट सिर्फ किताब के विमोचन की जानकारी तक सीमित रही। इस विमोचन कार्यक्रम में खुद प्रधानमंत्री का शामिल होना इसकी अहमियत को दिखाता है।
मोदी ने क्या कहा
अपनी पोस्ट में नरेंद्र मोदी ने बताया कि वे अगली सुबह 9:30 बजे किताब के विमोचन कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे, और इसे हमारे पूर्व राष्ट्रपति, श्री रामनाथ कोविंद जी की आत्मकथा बताया। मोदी की पोस्ट में आदर भरे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, उन्होंने कोविंद को सम्मानपूर्वक जी कहकर संबोधित किया और इस किताब को एक प्रेरणादायक जीवन का लेखा-जोखा बताया। उन्होंने अपनी पोस्ट में कार्यक्रम स्थल या अन्य मेहमानों को लेकर कोई और जानकारी साझा नहीं की।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स ने किताब को लेकर उत्सुकता जताई और रामनाथ कोविंद के सफर को प्रेरणादायक बताया, वहीं कुछ ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को किताब के विमोचन कार्यक्रम में खुद शामिल होने की जरूरत क्यों है और उनसे दूसरे मुद्दों पर ध्यान देने को कहा। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि राजनीतिक नेताओं का साहित्यिक कार्यक्रमों में शामिल होना कितना उचित है, जो राजनीति और सार्वजनिक आयोजनों के घुलमिल जाने पर एक बड़ी बहस को दिखाता है, वहीं समर्थकों का कहना था कि कोविंद के राष्ट्रपति पद तक के सफर को व्यापक पहचान मिलनी चाहिए।






























