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12 अगस्त को रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन में शामिल होंगे नरेंद्र मोदीनेता जी
12 अग॰ 2026, 2:36 am (3 घंटे पहले)· 2

12 अगस्त को रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन में शामिल होंगे नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अगस्त को सुबह 9:30 बजे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles' के विमोचन कार्यक्रम में शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अगस्त को सुबह 9:30 बजे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन कार्यक्रम में शामिल होंगे। मोदी ने 11 अगस्त को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर इस कार्यक्रम में अपनी भागीदारी की जानकारी दी।

किताब और उसका शीर्षक

इस आत्मकथा का शीर्षक 'Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles' है। मोदी की पोस्ट के मुताबिक, इस किताब में रामनाथ कोविंद के निजी सफर और उन संघर्षों को बयां किया गया है जिन्होंने उनके जीवन को आकार दिया। किताब का शीर्षक खुद बताता है कि यह कहानी सिर्फ उपलब्धियों की नहीं बल्कि मुश्किलों से पार पाने की भी है, जो देश के सबसे बड़े संवैधानिक पदों में से एक तक पहुंचने के उनके सफर को दिखाती है। देश के पूर्व राष्ट्रपतियों की आत्मकथाओं की छोटी सी फेहरिस्त में अब यह किताब भी शामिल हो गई है, और इसके विमोचन को एक बड़े साहित्यिक आयोजन के तौर पर देखा जा रहा है।

रामनाथ कोविंद की भूमिका

पोस्ट में रामनाथ कोविंद को देश के पूर्व राष्ट्रपति बताया गया है। उनकी आत्मकथा में उनके सार्वजनिक जीवन के अहम पड़ावों का जिक्र होने की उम्मीद है, हालांकि मोदी की पोस्ट में किताब की पूरी विषयवस्तु के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया। पोस्ट में यह भी नहीं बताया गया कि कोविंद कब राष्ट्रपति पद से हटे थे, यह पोस्ट सिर्फ किताब के विमोचन की जानकारी तक सीमित रही। इस विमोचन कार्यक्रम में खुद प्रधानमंत्री का शामिल होना इसकी अहमियत को दिखाता है।

मोदी ने क्या कहा

अपनी पोस्ट में नरेंद्र मोदी ने बताया कि वे अगली सुबह 9:30 बजे किताब के विमोचन कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे, और इसे हमारे पूर्व राष्ट्रपति, श्री रामनाथ कोविंद जी की आत्मकथा बताया। मोदी की पोस्ट में आदर भरे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, उन्होंने कोविंद को सम्मानपूर्वक जी कहकर संबोधित किया और इस किताब को एक प्रेरणादायक जीवन का लेखा-जोखा बताया। उन्होंने अपनी पोस्ट में कार्यक्रम स्थल या अन्य मेहमानों को लेकर कोई और जानकारी साझा नहीं की।

जनता की प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स ने किताब को लेकर उत्सुकता जताई और रामनाथ कोविंद के सफर को प्रेरणादायक बताया, वहीं कुछ ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को किताब के विमोचन कार्यक्रम में खुद शामिल होने की जरूरत क्यों है और उनसे दूसरे मुद्दों पर ध्यान देने को कहा। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि राजनीतिक नेताओं का साहित्यिक कार्यक्रमों में शामिल होना कितना उचित है, जो राजनीति और सार्वजनिक आयोजनों के घुलमिल जाने पर एक बड़ी बहस को दिखाता है, वहीं समर्थकों का कहना था कि कोविंद के राष्ट्रपति पद तक के सफर को व्यापक पहचान मिलनी चाहिए।

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सवाल-जवाब

नरेंद्र मोदी किस कार्यक्रम में शामिल होंगे?
वे 12 अगस्त को सुबह 9:30 बजे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles' के विमोचन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
यह कार्यक्रम कब और किस समय होगा?
यह कार्यक्रम 12 अगस्त को सुबह 9:30 बजे होगा।
किताब का शीर्षक क्या है और यह किस बारे में है?
किताब का शीर्षक 'Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles' है, यह रामनाथ कोविंद की आत्मकथा है और उनके जीवन तथा संघर्षों पर आधारित है।
रामनाथ कोविंद कौन हैं?
पोस्ट के मुताबिक वे देश के पूर्व राष्ट्रपति हैं।
मोदी ने इस बारे में जानकारी कहां दी?
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर 11 अगस्त को पोस्ट कर इसकी जानकारी दी।
इस पोस्ट पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
प्रतिक्रिया मिली-जुली रही, कुछ यूजर्स ने कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता और सराहना जताई तो कुछ ने प्रधानमंत्री की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Neha Verma@neha-verma·5 मिनट पहले

पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा का विमोचन केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि राजनीतिक हस्तियों की जीवनशैली, उनके पहनावे और सार्वजनिक मंचों पर उनकी प्रस्तुति के अध्ययन का एक नया आयाम भी खोलता है। ऐसे हाई-प्रोफाइल आयोजनों में नेताओं का वस्त्र चयन और उनका सार्वजनिक आचरण हमेशा से फैशन और लाइफस्टाइल की सुर्खियों में रहता है, जो यह दर्शाता है कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में व्यक्तिगत छवि और स्टाइल का कितना गहरा प्रभाव होता है।

Divya Reddy@divya-reddy·5 मिनट पहले

सहकर्मी की टिप्पणी से आगे बढ़ते हुए, यदि हम इसे शिक्षा और युवा परिप्रेक्ष्य से देखें, तो एक पूर्व राष्ट्रपति के संघर्ष और संवैधानिक पद तक के सफर की यह आत्मकथा छात्र-छात्राओं और युवा वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रेरणादायी दस्तावेज बन सकती है। ऐसे प्रकाशनों को विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम या पुस्तकालयों में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि युवा छात्र देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर पहुँचने वाले व्यक्तियों के संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों से रूबरू हो सकें।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

प्रधानमंत्री का इस पुस्तक विमोचन में शामिल होना और दलित पृष्ठभूमि से आने वाले पूर्व राष्ट्रपति के संघर्षों को राष्ट्रीय मंच मिलना वैचारिक और सामाजिक दृष्टिकोण से एक बड़ा संदेश देता है। यह आयोजन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ एक ओर इसे उनके सफर की सराहना के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस पर तीखी बहस छिड़ गई है कि शीर्ष नेतृत्व को ऐसे आयोजनों में कितनी प्राथमिकता देनी चाहिए।

Sophie Laurent@sophie-laurent·1 घंटे पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन में शामिल होना भारतीय राजनीतिक संस्कृति का एक दिलचस्प पहलू उजागर करता है। यूरोपीय राजनीति में भी शीर्ष नेताओं की ऐसी सांस्कृतिक और साहित्यिक सहभागिता अक्सर व्यापक चर्चा और बहस का विषय बनती है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे लोकतांत्रिक देशों में संवैधानिक पदों पर रहे व्यक्तियों के संस्मरण केवल साहित्यिक आयोजन न रहकर राजनीतिक और सामाजिक संवाद का प्रभावी माध्यम बन जाते हैं, जो आने वाले समय में सार्वजनिक बहसों की दिशा तय करते हैं।

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