ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदानिज़ादेह ने मंगलवार को एक कड़े बयान में स्पष्ट किया कि उनका देश अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से विरोधी देश पर आर्थिक आतंकवाद थोपने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ईरान के पास भी अपने साधन मौजूद हैं और वह इस खेल को अच्छी तरह खेलना जानता है।
रक्षात्मक रवैये से आगे की रणनीति
मंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देश की मौजूदा रक्षा प्रणाली अब केवल बचाव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विरोधियों को अब एक आक्रामक प्रतिक्रिया के लिए भी तैयार रहना चाहिए। अली मदानिज़ादेह के अनुसार, न तो चीन और न ही रूस ने अमेरिका की इन दंडात्मक कार्रवाइयों को स्वीकार किया है, और उन्हें पूरी उम्मीद है कि अन्य देश भी इन कदमों के खिलाफ डटकर खड़े रहेंगे।
कच्चे तेल बाजार और डब्ल्यूटीआई क्रूड का हाल
इस बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार में अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) में तेजी का रुख देखा जा रहा है। इस खबर के लिखे जाने के समय डब्ल्यूटीआई ऑयल 85 डॉलर के स्तर को दोबारा छूने की कोशिश में जुटा हुआ है और इसमें 0.32% की बढ़त दर्ज की गई है। डब्ल्यूटीआई क्रूड वह कच्चा तेल है जिसकी खरीद-फरोख्त अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रमुखता से होती है।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के रूप में मशहूर यह तेल ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ दुनिया के तीन मुख्य तेल बेंचमार्क में शुमार किया जाता है। अपनी कम डेंसिटी और कम सल्फर मात्रा के कारण इसे लाइट और स्वीट श्रेणी में रखा जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल बेहद आसानी से रिफाइन हो जाता है। अमेरिका में उत्पादित होने वाला यह तेल कुशिंग हब के रास्ते वितरित किया जाता है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन क्रॉसरोड्स कहा जाता है।
तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
अन्य सभी वित्तीय परिसंपत्तियों की तरह डब्ल्यूटीआई ऑयल की कीमतें भी मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों पर चलती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर में तेजी आने से तेल की मांग बढ़ती है, जबकि सुस्त आर्थिक रफ्तार इसका उल्टा असर डालती है। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और प्रतिबंध जैसी स्थितियां आपूर्ति की श्रृंखला को बाधित कर कीमतों में उतार-चढ़ाव लाती हैं।
प्रमुख तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के फैसले भी इस बाजार पर सीधा असर डालते हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की चाल भी डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों को तय करती है क्योंकि तेल का कारोबार मुख्य तौर पर डॉलर में ही होता है। डॉलर के कमजोर होने से तेल सस्ता महसूस होता है और मजबूत होने पर कीमतें प्रभावित होती हैं।
इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक की भूमिका
अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई और ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक तेल भंडार रिपोर्टें कीमतों में हलचल पैदा करती हैं। एपीआई की रिपोर्ट हर मंगलवार को आती है और ईआईए की रिपोर्ट उसके अगले दिन प्रकाशित होती है। ईआईए के आंकड़ों को सरकारी एजेंसी होने के कारण ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।
ओपेक यानी पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है जो साल में दो बार बैठक कर सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। इस समूह के फैसलों से डब्ल्यूटीआई की कीमतें सीधे तौर पर प्रभावित होती हैं। ओपेक प्लस में दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य देश भी शामिल हैं जिनमें रूस सबसे प्रमुख नाम है।
विदेशी मुद्रा बाजार और कीमती धातुओं का रुझान
सप्ताह की शुरुआत में जीबीपी/एसडी (GBP/USD) जोड़ी अपनी हालिया रिकवरी को पीछे छोड़ते हुए 1.3600 के निचले दायरे में लौट आई है। अमेरिकी डॉलर में आई बढ़त के बीच निवेशक आगामी अमेरिकी आंकड़ों और जैक्सन होल सम्मेलन को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसी तरह यूरो/एसडी (EUR/USD) जोड़ी भी वॉल स्ट्रीट के पिछले सत्र के बाद 1.1660 के आसपास कमजोर रुख के साथ कारोबार कर रही है।
दूसरी ओर, सोने की कीमतें मई के मध्य के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं और खरीदारों की नजर अब 4,700 डॉलर के आंकड़े पर टिकी हुई है। अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बाजार में हस्तक्षेप के विफल होने से राजकोषीय स्थिरता को लेकर चिंताएं गहरी हुई हैं, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग तेजी से बढ़ी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी की संभावनाओं के कम होने से भी इस पीली धातु को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी के कदम और बाजार जोखिम
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की है कि वह 10-वर्षीय से 20-वर्षीय और 20-वर्षीय से 30-वर्षीय क्षेत्रों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन के आकार को कम से कम दोगुना कर देगा। इसके तहत अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है, जो 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक चलेगा।
बाजार से जुड़े इन तमाम पहलुओं में निवेश करने से पहले पाठकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वित्तीय बाजारों में भारी जोखिम होता है और इसमें पूंजी डूबने की पूरी संभावना बनी रहती है। इसलिए किसी भी प्रकार के निवेश निर्णय से पहले अपनी स्वतंत्र और गहन रिसर्च अवश्य करें।



















