तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों एक रहस्यमयी फाइल को लेकर गरमाई हुई है, जिसने सूबे के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस पूरे विवाद की शुरुआत विधानसभा के अंदर सड़क निर्माण के दौरान हुई कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों पर चल रही एक तीखी बहस के दौरान हुई थी। सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने विपक्ष को सीधे तौर पर आड़े हाथों लेते हुए चेतावनी दी थी कि उनके पास डीएमके के पुराने शासनकाल के भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज और फाइलें मौजूद हैं।
सदन में सीएम विजय की चेतावनी और मेज पर रखी फाइलें
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री विजय ने बेहद सख्त तेवर दिखाए थे। उन्होंने विपक्षी दलों को चेतावनी के लहजे में कहा था कि सही वक्त आने पर वह डीएमके के पिछले कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार का कच्चा-चिट्ठा सबके सामने उजागर कर देंगे। उन्होंने दावा किया था कि इस वक्त उनकी डेस्क पर ऐसी दो फाइलें रखी हुई हैं और वह चाहते हैं कि उन्हें ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर न किया जाए। इस बयान के बाद से ही राज्य की सियासत में इन फाइलों की चर्चा जोरों पर है और हर तरफ यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इन दस्तावेजों में क्या दर्ज है।
डीएमके और माकपा का तीखा पलटवार
मुख्यमंत्री के इस दावे के बाद विपक्षी खेमे की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आनी शुरू हो गईं। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने इस मामले पर सीधा पलटवार करते हुए चुनौती दी है कि यदि मुख्यमंत्री के पास वास्तव में उनकी पार्टी के भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई ठोस सबूत या फाइल है, तो वह केवल बातें करने के बजाय उसके बारे में खुलकर क्यों नहीं बोलते। चेन्नई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने तंज कसा कि वह इस उम्मीद के साथ विधानसभा गए थे कि मुख्यमंत्री उन फाइलों का जिक्र करेंगे और उन्हें सबके सामने खोलेंगे, लेकिन सदन में इस पर कुछ नहीं कहा गया।
कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है
उदयनिधि स्टालिन ने आगे कहा कि सरकार अच्छी तरह जानती है कि डीएमके के खिलाफ साबित करने के लिए उनके पास असल में कुछ भी नहीं है और केवल झूठे आरोप लगाकर पार्टी तथा उसके नेतृत्व को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ, वामपंथी दल माकपा यानी सीपीआई-एम ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। माकपा का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री विजय के पास डीएमके के खिलाफ भ्रष्टाचार के पुख्ता दस्तावेज मौजूद हैं, तो उन्हें बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए और फाइलें छिपाकर बैठने का कोई मतलब नहीं बनता है।





















