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ईरान से सस्ता कच्चा तेल खरीदने का सुनहरा अवसर, भारतीय रिफाइनरियों को प्रति बैरल 4 डॉलर की बचतव्यापार
27 जून 2026, 9:13 am (45 दिन पहले)· 3

ईरान से सस्ता कच्चा तेल खरीदने का सुनहरा अवसर, भारतीय रिफाइनरियों को प्रति बैरल 4 डॉलर की बचत

अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में ढील देने के बाद ईरान से सस्ते कच्चे तेल की पेशकश की गई है। इस सौदे से भारतीय रिफाइनरियों को प्रति बैरल 3 से 4 डॉलर तक की सीधी बचत हो सकती है।

नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय तेल शोधन कंपनियों के सामने एक बड़ा मौका हाथ लगा है। दरअसल, वाशिंगटन की ओर से प्रतिबंधों में अस्थायी छूट मिलने के बाद अब ईरान से भारत को सस्ता तेल उपलब्ध कराने के कई प्रस्ताव मिले हैं। यह ऑफर रूस के बजाय एक अन्य पुराने साथी देश की ओर से आया है। अमेरिका ने ईरान पर 60 दिनों के लिए ऊर्जा संबंधी प्रतिबंधों को हटा दिया है, जिसका फायदा उठाकर कई बिचौलिए भारत को छूट पर ईरानी कच्चा तेल बेचने के लिए सक्रिय हो गए हैं। इस सौदे के जरिए भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य के मुकाबले प्रति बैरल 3 से 4 डॉलर तक का लाभ मिल सकता है।

नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी के साथ सीधे संपर्क

भारतीय रिफाइनरी क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि तेहरान अब वाशिंगटन से मिली इस छोटी अवधि की राहत का भरपूर लाभ उठाकर अपना निर्यात बढ़ाना चाहता है। इसी क्रम में, नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) और कई अन्य व्यापारियों ने सीधे भारतीय कंपनियों से संपर्क साधा है। इन बिचौलियों का दावा है कि उन्हें यह तेल सीधे ईरानी सरकारी उत्पादक से प्राप्त हुआ है। एक अधिकारी ने बताया कि भले ही कई व्यापारी उन्हें ईरानी तेल खरीदने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता सीधे नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी के साथ काम करना है।

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कीमतों और आपूर्ति का गणित

नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी की ओर से भारतीय खरीदारों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि उनका कच्चा तेल अन्य क्षेत्रीय ग्रेड के मुकाबले 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल सस्ता रहेगा। जिन व्यापारियों ने भारत से संपर्क किया है, वे मुख्य रूप से सिंगापुर और दुबई की छोटी से मध्यम श्रेणी की ट्रेडिंग कंपनियों से ताल्लुक रखते हैं। हाल ही में ईरानी पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पकनेजाद की नई दिल्ली यात्रा के दौरान कच्चे तेल के अलावा एलपीजी की आपूर्ति पर भी व्यापक चर्चा हुई। हालांकि, भारतीय रिफाइनरियों के सामने तत्काल बड़ी खरीद करने की चुनौती है, क्योंकि ज्यादातर कंपनियों ने अगस्त तक अपनी आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है और मध्य पूर्व के अन्य सप्लायर भी अपने सालाना अनुबंधों को पूरा करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और चुनौतियां

भारत ने पहले भी व्यापारियों के माध्यम से ईरानी एलपीजी का आयात किया है और मौजूदा छूट के चलते इसमें और वृद्धि की संभावना है। हालांकि, व्यावसायिक स्तर पर होने वाली बातचीत में अभी समय लग सकता है, क्योंकि भुगतान के तरीके और बैंकिंग चैनलों को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। याद रहे कि अप्रैल के महीने में जब वाशिंगटन ने 30 दिनों की राहत दी थी, तब भारत को ईरानी तेल के दो कार्गो मिले थे, जिनका भुगतान चीनी युआन में किया गया था। साल 2010 के दौरान ईरान भारत के लिए कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण धीरे-धीरे खरीद घटती गई और मई 2019 से भारत ने ईरान से तेल लेना पूरी तरह बंद कर दिया था।

सवाल-जवाब

ईरान से तेल खरीदने पर भारत को कितनी बचत हो सकती है?
इस सौदे के तहत भारतीय रिफाइनरियों को सामान्य कच्चे तेल की तुलना में प्रति बैरल 3 से 4 डॉलर की बचत होने की उम्मीद है।
अमेरिका ने ईरान पर से प्रतिबंध क्यों हटाए हैं?
अमेरिका ने ऊर्जा व्यापार के लिए 60 दिनों की एक अस्थायी छूट दी है, जिससे ईरान को अपना निर्यात बढ़ाने का मौका मिल रहा है।
भारत को अब तक ईरान से तेल खरीदने में क्या दिक्कत आ रही है?
मुख्य समस्या बैंकिंग चैनल और भुगतान के तरीके को लेकर स्पष्टता न होना है, साथ ही अधिकांश रिफाइनरियों के पास पहले से ही अगस्त तक का अनुबंध फिक्स है।
क्या भारत ने पहले भी ईरान से तेल लिया है?
हां, 2010 के आसपास ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था, लेकिन 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात पूरी तरह बंद हो गया था।
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