भारतीय शेयर बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ इन दिनों काफी चर्चा में बना हुआ है और इसे पहले ही दिन तीन गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिल चुका है। इस बहुप्रतीक्षित आईपीओ में पैसे लगाने की अंतिम तारीख 23 अक्टूबर यानी शुक्रवार तय की गई है। कंपनी ने निवेशकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस सार्वजनिक निर्गम को कुल चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है। हर श्रेणी के लिए पात्रता के नियम अलग तय किए गए हैं, इसलिए निवेशकों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि वे किस वर्ग के अंतर्गत आते हैं। सही कैटेगरी में आवेदन करने से शेयरों का आवंटन मिलने के अवसर काफी हद तक बढ़ जाते हैं.
निवेशकों के लिए चार अलग-अलग श्रेणियां
जियो प्लेटफॉर्म्स ने इस आईपीओ के तहत सामान्य खुदरा निवेशकों के अलावा गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए भी विशेष जगह बनाई है। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरधारकों और पूरे समूह के कर्मचारियों के लिए भी अलग से कोटे का प्रावधान किया गया है। इन खास श्रेणियों में आने वाले लोगों को शेयरों का अलॉटमेंट प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि जो निवेशक तय मानदंडों को पूरी तरह से पूरा करेगा, उसके लिए शेयर हासिल करना अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा.
शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्सा
जियो प्लेटफॉर्म्स ने शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ी हिस्सेदारी तय की है और इस कैटेगरी के लिए कुल 2,50 करोड़ रुपये के शेयर सुरक्षित रखे गए हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेशकों के लिए एक समर्पित रूट तैयार किया गया है। ऐसे निवेशक जिनके पास 14 अक्टूबर से पहले आरआईएल के शेयर मौजूद थे, उन्हें इस विशेष श्रेणी के तहत आवेदन करने की अनुमति दी गई है। कंपनी ने 13 अक्टूबर तक टी-1 सेटलमेंट साइकिल के नियमों के तहत आरआईएल के शेयर खरीदने की शर्त रखी है। इस कोटे के तहत निवेशक अधिकतम 2 लाख रुपये तक के शेयर खरीद सकते हैं। हालांकि इस वर्ग में भी शत-प्रतिशत अलॉटमेंट की कोई गारंटी नहीं होती, फिर भी शेयर मिलने की प्रक्रिया काफी सुगम हो जाती है.
कर्मचारी कोटे के नियम और सीमा
कंपनी ने अपने आईपीओ में कर्मचारियों के लिए भी एक अलग कोटा रखा है जिसमें 500 करोड़ रुपये के शेयर शामिल किए गए हैं। इस कोटे के अंतर्गत रिलायंस इंडस्ट्रीज, जियो प्लेटफॉर्म्स और उससे जुड़ी सब्सिडियरी कंपनियों के कर्मचारी ही निवेश करने के पात्र हैं। इस श्रेणी के माध्यम से अधिकतम 5 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। कंपनी की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि सूची में शामिल अधिकृत कर्मचारी ही इसका लाभ उठा सकेंगे। रिलायंस समूह की दूसरी अन्य कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को इस कोटे में आवेदन करने की छूट नहीं दी गई है। योग्य कर्मचारियों को अपने स्टेटस का सत्यापन कराने के बाद निर्धारित फॉर्मेट में ही अपना आवेदन जमा करना होगा.
खुदरा और गैर-संस्थागत निवेशकों के विकल्प
इस आईपीओ की सबसे खुली और लोकप्रिय श्रेणी रिटेल कैटेगरी है क्योंकि इसमें देश का कोई भी आम निवेशक दांव लगा सकता है। इस वर्ग में अधिकतम 2 लाख रुपये तक की राशि का निवेश किया जा सकता है। हालांकि इस कैटेगरी में छोटे निवेशकों को मुख्य रूप से रखा गया है और शेयरों का वितरण सामान्य प्रक्रिया के तहत होता है, इसलिए इसमें अलॉटमेंट मिलने की संभावना थोड़ी कम रहती है। इस ओपन कैटेगरी में शेयरधारकों और कर्मचारियों जैसे कोटे वाले निवेशक भी आवेदन कर सकते हैं। दूसरी तरफ, जो निवेशक 2 लाख रुपये से अधिक की बड़ी राशि लगाना चाहते हैं, उन्हें गैर-संस्थागत निवेशक श्रेणी का चयन करना होगा। हालांकि जो लोग पहले ही खुदरा श्रेणी में आवेदन कर चुके हैं, वे इस रास्ते से निवेश करने के हकदार नहीं होंगे.
एक से अधिक श्रेणियों में आवेदन करने के नियम
जियो प्लेटफॉर्म्स ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी पात्र व्यक्ति इस आईपीओ में एक से अधिक श्रेणियों के तहत भी पैसे लगा सकता है। उदाहरण के लिए, आरआईएल के शेयरधारक वाली श्रेणी का कोई भी निवेशक यदि चाहे तो खुदरा श्रेणी में भी अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। इसी तरह रिलायंस के कर्मचारियों को भी उनके अपने कोटे के अतिरिक्त खुदरा वर्ग में निवेश करने का पूरा अवसर दिया गया है। हालांकि कंपनी ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि एक ही पैन कार्ड का इस्तेमाल करके कई आवेदन किए जाते हैं, तो उन सभी को तुरंत खारिज किया जा सकता है.

















