मानसून में सूअरों को जानलेवा क्लासिकल स्वाइन फीवर से बचाने के लिए डॉक्टर राम ओत्तलवार ने दिए जरूरी सुरक्षा टिप्सकाला सोना की खेती: पलामू के किसान ओंकारनाथ ने पारंपरिक खेती छोड़ अपनाया औषधीय काला धान, कमा रहे रिकॉर्ड मुनाफाबाढ़ की विभीषिका के बीच गाजीपुर के पकड़ी गांव में भारी बिजली कटौती, अंधेरे में सांपों के डर से परेशान हुए ग्रामीणअफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज से पहले मोहम्मद सिराज को मिली बड़ी जिम्मेदारी, रणजी ट्रॉफी में हैदराबाद टीम की करेंगे कप्तानीशिलांग तोड़फोड़ मामला: हाईकोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के छात्रों ने शुरू की शहर में सफाई2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले व्यापार घाटे को पाटने की रणनीति पर काम कर रहा भारतबिना पानी और महंगे क्लीनर के घर पर ऐसे चमकाएं अपना गंदा सोफा, अपनाएं ये आसान तरीकेलाइव: तेलंगाना विधानसभा मानसून सत्र 12 सितंबर: धारा 22A भूमि विवाद और अल नीनो के प्रभावों पर आज होगी चर्चासूर्य, शुक्र और शनि चमकाएंगे मेष सहित चार राशियों का भाग्य, आने वाले तीस दिनों में अचानक धन लाभ और करियर में तरक्की के योगअपराजिता की बेल में फूलों की बौछार लाएगा रसोई का यह आसान नुस्खा, जानिए देखभाल के जरूरी नियम
जून में 72 घरेलू मार्गों पर औसत किराए में 20.5% का उछाल, यात्रियों की जेब पर सीधी मारव्यापार
27 जुल॰ 2026, 11:57 pm (47 दिन पहले)· 2

जून में 72 घरेलू मार्गों पर औसत किराए में 20.5% का उछाल, यात्रियों की जेब पर सीधी मार

जून 2026 में देश के 72 चुनिंदा घरेलू रूट्स पर औसत हवाई किराया करीब 20.5 प्रतिशत तक चढ़ गया, जिसकी जानकारी सरकार ने राज्यसभा में लिखित जवाब के जरिए दी।

गर्मी की छुट्टियों में विमान से सफर का इरादा रखने वालों के लिए इस बार टिकट खरीदना पहले से कहीं भारी साबित हुआ। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में बताया कि जून 2026 के दौरान देश के 72 चुनिंदा घरेलू मार्गों पर औसत हवाई किराया पिछले महीनों के मुकाबले करीब 20.5 प्रतिशत तक ऊपर चला गया। ये आंकड़े विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से जुटाए गए हैं। हालांकि किन 72 रूट्स पर यह उछाल दर्ज हुआ, उनके नाम सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं किए गए।

किराया आखिर चढ़ता क्यों है

मंत्री ने संसद में समझाया कि किसी भी एयरलाइन का परिचालन खर्च लगातार बदलता रहता है, इसलिए टिकट की कीमत भी स्थिर नहीं रहती। इसे कई बड़े कारक एक साथ प्रभावित करते हैं। सबसे अहम है विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल की कीमत। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके दाम जैसे ही बढ़ते हैं, कंपनियों की लागत तुरंत ऊपर चढ़ जाती है। खास बात यह है कि अकेले ईंधन का यह खर्च किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 35 से 40 प्रतिशत तक हिस्सा घेर लेता है।

ये भी पढ़ें

इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, एक्साइज ड्यूटी, वैट और विमानों के लीज रेंट का भी सीधा असर पड़ता है। रुपया कमजोर होने या टैक्स ज्यादा होने पर उड़ान चलाने की कुल लागत बढ़ जाती है और इसका बोझ आखिरकार यात्री तक पहुंचता है।

टिकट का दाम कौन तय करता है

एक और लिखित जवाब में मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हवाई किराए पर सीधे नियंत्रण नहीं रखती। एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 135 के मुताबिक हर एयरलाइन को अपना किराया खुद तय करने की छूट है। कंपनियां अपनी परिचालन लागत, सेवा की गुणवत्ता और वाजिब मुनाफे को आधार बनाकर खुद ही अपनी उड़ानों का टैरिफ तय करती हैं।

यात्रियों की जेब पर असर

गर्मी के मौसम और त्योहारी दिनों में हवाई टिकट की मांग तेजी से चढ़ती है। ऐसे में डायनेमिक प्राइसिंग की व्यवस्था के चलते जैसे ही सीटें कम होने लगती हैं, कंपनियां किराया ऊपर कर देती हैं। यही वजह है कि 20 प्रतिशत से ज्यादा की यह बढ़ोतरी उन लोगों को सबसे ज्यादा चुभती है जो ऐन मौके पर या भीड़भाड़ वाले समय में यात्रा की योजना बनाते हैं। आगे की तस्वीर भी बहुत राहत भरी नहीं दिखती। अगर ईंधन के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे और बाकी परिचालन खर्चों में कमी नहीं आई, तो आने वाले महीनों में भी टिकट महंगे बने रहने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सवाल-जवाब

जून 2026 में हवाई किराया कितना बढ़ा?
देश के 72 चुनिंदा घरेलू रूट्स पर औसत हवाई किराया पिछले महीनों की तुलना में करीब 20.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।
यह जानकारी किसने और कहां दी?
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।
क्या उन 72 रूट्स के नाम बताए गए?
नहीं, सरकार की ओर से उन 72 मार्गों के नामों का खुलासा नहीं किया गया।
हवाई किराया महंगा होने की मुख्य वजह क्या है?
विमान ईंधन (ATF) की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की दर, एक्साइज ड्यूटी, वैट और विमानों का लीज रेंट किराए को प्रभावित करते हैं। अकेले ईंधन कुल परिचालन खर्च का 35 से 40 प्रतिशत होता है।
क्या सरकार हवाई किराया तय करती है?
नहीं, एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 135 के तहत हर एयरलाइन अपना किराया खुद तय करती है, सरकार इस पर सीधा नियंत्रण नहीं रखती।
क्या आगे भी किराया महंगा रह सकता है?
अगर ATF की कीमतें ऊंची बनी रहीं और अन्य परिचालन खर्च नहीं घटे, तो आने वाले महीनों में भी टिकट महंगे बने रहने की आशंका है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR