उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रेवतीपुर क्षेत्र में स्थित पकड़ी गांव के लोग इन दिनों एक साथ दोहरी मार झेल रहे हैं. एक तरफ जहां पूरा इलाका बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पिछले करीब 10 से 15 दिनों से जारी भयंकर बिजली कटौती ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है. शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे के आगोश में समा जाता है, जिससे गृहणियों को रात का खाना बनाने में भारी दिक्कत हो रही है, बच्चों की पढ़ाई ठप पड़ गई है और रात के समय बाढ़ के पानी के बीच सुरक्षा को लेकर एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
बाढ़ के बीच लंबी बिजली कटौती से बेहाल हुए ग्रामीण
बिजली की इस आंख-मिचौली ने ग्रामीण जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है. पकड़ी गांव के निवासियों का कहना है कि शाम के वक्त कटने वाली बिजली अक्सर पूरी रात गायब रहती है और अगले दिन दोपहर में जाकर ही दर्शन देती है. गांव के निवासी राजदेव यादव ने बताया कि बीते दिनों शाम को कटी बिजली अगले दिन दोपहर करीब दो बजे जाकर बहाल हुई. इसका साफ मतलब है कि ग्रामीणों को लगातार 10 से 12 घंटे तक बिना बिजली के उमस और अंधेरे में रात काटनी पड़ी.
एक अन्य ग्रामीण सुनील यादव ने क्षेत्र की विकट स्थिति को बयां करते हुए कहा कि एक तरफ तो गांव में बाढ़ का पानी भरा हुआ है और दूसरी तरफ ठीक खाना बनाने के समय शाम को बिजली गुल हो जाती है. रोजाना शाम को दो से तीन घंटे तक बिजली का गायब रहना अब आम बात हो गई है और यह सिलसिला पिछले दो सप्ताह से लगातार जारी है. सुनील यादव ने रोष जताते हुए कहा कि गांव के लोग समय पर अपने बिजली बिलों का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियमित और सुचारू बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है.
अंधेरे में सांपों का डर और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची शिकायत
रात के समय होने वाली इस बेतहाशा बिजली कटौती ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है. ग्रामीण अनूप राय ने बिजली विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी कटौती की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताते हैं. उन्होंने बताया कि रात में अक्सर फीडर से बिजली काट दी जाती है. कभी रात नौ से 11 बजे के बीच तो कभी रात 11 से एक बजे के बीच बिजली पूरी तरह से बंद कर दी जाती है.
अनूप राय ने बताया कि बाढ़ के चलते गांव के चारों तरफ पानी भरा हुआ है, जिससे जहरीले सांप और अन्य कीड़े-मकोड़े सूखी जगहों की तलाश में घरों की तरफ रुख कर रहे हैं. अंधेरे के कारण रात में सांपों के डसने का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है. पहले के समय में लोग लालटेन या ढिबरी जलाकर काम चला लेते थे, लेकिन आज के डिजिटल और आधुनिक दौर में घरेलू कामकाज से लेकर रोशनी तक सब कुछ बिजली पर ही निर्भर है. ऐसे में अचानक बिजली गुल होने से लोगों की मुसीबत दोगुनी हो जाती है. इस गंभीर समस्या से आजिज आकर अनूप राय ने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को ई-मेल भेजकर शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने मांग की है कि बिजली विभाग को कटौती के समय और उसकी वजह को लेकर ग्रामीणों को पूरी तरह स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए.
सिंगल फीडर पर अत्यधिक लोड बना संकट की वजह
गांव के बिजली संकट की एक बड़ी वजह वितरण प्रणाली की ढांचागत कमी भी है. अनूप राय ने बताया कि पकड़ी गांव का फीडर बहुत लंबा है और इसी फीडर से पूरे रेवतीपुर क्षेत्र को भी बिजली की सप्लाई दी जाती है. एक ही फीडर पर इतना अधिक बोझ होने के कारण बार-बार तकनीकी खराबी आती है और लोड बढ़ने पर बिजली ट्रिप हो जाती है, जिसका खामियाजा कई गांवों के लोगों को भुगतना पड़ता है.
ग्रामीणों की मांग है कि पकड़ी गांव के फीडर को अलग किया जाना चाहिए और रेवतीपुर क्षेत्र के लिए एक नई और स्वतंत्र विद्युत व्यवस्था की जानी चाहिए. फीडर का बंटवारा होने से पकड़ी गांव की लाइन पर लोड कम होगा और बिजली की आपूर्ति में सुधार होगा. हालांकि, इस फीडर की वास्तविक लंबाई कितनी है, इससे कुल कितने गांव जुड़े हुए हैं और इस पर लोड की वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि बिजली विभाग के दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकेगी.
विभागीय सफाई: उच्च स्तर से जारी है इमरजेंसी रोस्टरिंग
इस गंभीर बिजली संकट को लेकर जब बिजली विभाग के JE आशीष यादव से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्थानीय स्तर पर किसी भी तरह की जानबूझकर की जा रही कटौती से इनकार किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय क्षेत्र में इमरजेंसी रोस्टरिंग के तहत बिजली काटी जा रही है. इसका मतलब यह है कि यह कटौती किसी स्थानीय समय-सारणी या शेड्यूल के तहत नहीं हो रही है, बल्कि लखनऊ या उच्च स्तर से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर की जा रही है.
JE आशीष यादव ने बताया कि शाम के समय ग्रिड पर लोड मैनेज करने के लिए उच्च अधिकारियों द्वारा अलग-अलग समय पर निर्देश दिए जाते हैं. कभी शाम पांच बजे, कभी छह बजे तो कभी सात बजे बिजली कटौती के आदेश या कोड प्राप्त होते हैं, जिनका पालन करते हुए स्थानीय सब-स्टेशन को बिजली की आपूर्ति बंद करनी पड़ती है. उन्होंने स्वीकार किया कि बाढ़ के इस कठिन समय में बिजली न रहने से ग्रामीणों को बेहद असुविधा हो रही है. उन्होंने कहा कि विभाग इस लोड प्रेशर को संभालने के लिए लगातार काम कर रहा है और इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए उच्च अधिकारियों के साथ बातचीत की जा रही है.
क्या होती है इमरजेंसी रोस्टरिंग और कैसे निकलेगा समाधान?
विद्युत विभाग की तकनीकी शब्दावली में इमरजेंसी रोस्टरिंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत ग्रिड को फेल होने से बचाने या फीडर पर अत्यधिक लोड और तकनीकी दबाव को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी रूप से बिजली की आपूर्ति रोक दी जाती है. यह सामान्य घोषित कटौती से पूरी तरह अलग होती है और इसका कोई निश्चित समय नहीं होता. हालांकि, पकड़ी और उसके आस-पास के गांवों में वास्तव में रोजाना कितने घंटे बिजली मिल रही है और कितने घंटे की कटौती की जा रही है, इसका सटीक पता बिजली विभाग के फीडर लॉग, शटडाउन रिकॉर्ड और सब-स्टेशन के आधिकारिक डेटा के मिलान से ही चल पाएगा. इसके लिए ग्रामीणों की लिखित शिकायतों के साथ विभागीय लॉग बुक की निष्पक्ष जांच जरूरी है.


















