मुरादाबाद जिले में कृषि और वेलनेस यानी स्वास्थ्य क्षेत्र में कदम रखने वाले लोगों के लिए कमाई का एक शानदार मौका सामने आ रहा है। आज के समय में नर्सरी या विशेष हर्बल प्लांट लगाने का व्यवसाय बेहद मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है, और इसका बड़ा कारण सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद है। आयुष मंत्रालय के तहत काम करने वाले राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) और विभिन्न राज्यों के कृषि व उद्यान विभाग इस तरह की व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। सरकार की विशेष योजनाओं के अंतर्गत किसानों, व्यक्तिगत उद्यमियों और विभिन्न संस्थाओं को अपनी नर्सरी व हर्बल गार्डन स्थापित करने के लिए 20 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक की बड़ी सब्सिडी दी जा रही है। इस मजबूत सरकारी सहायता की मदद से कोई भी इच्छुक किसान या उद्यमी बिना किसी बड़े आर्थिक दबाव के अपना खुद का हर्बल प्लांट खड़ा कर सकता है।
इस व्यवसाय में उतरने वाले उद्यमियों को दोतरफा मुनाफा कमाने का अवसर मिलता है। पहला फायदा तो सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी के रूप में मिलता है, जो शुरुआत में लगने वाली लागत को काफी हद तक कम कर देती है और एक वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करती है। दूसरा मुनाफा तब होता है जब नर्सरी में तैयार किए गए उच्च गुणवत्ता वाले औषधीय पौधों को बाजार में अच्छे दामों पर बेचा जाता है। सरकारी सहायता और व्यावसायिक संभावनाओं का यह अनूठा संगम इस हर्बल नर्सरी व्यवसाय को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के निवेशकों के लिए एक बेहद आकर्षक विकल्प बनाता है।
हर्बल प्रोसेसिंग प्लांट की बारीकियां और इसकी कार्यप्रणाली
उद्यान विभाग में डीआरपी के पद पर तैनात विमल कुमार तोमर ने इस हर्बल व्यवसाय की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक हर्बल प्रोसेसिंग प्लांट का मुख्य काम औषधीय वनस्पतियों से उनका अर्क निकालना, चूर्ण बनाना, गोलियां तैयार करना और अन्य प्राकृतिक उत्पाद बनाना होता है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य स्थानीय स्तर पर दवाओं के निर्माण को बढ़ावा देना, उनकी अच्छी तरह से पैकेजिंग करना और फिर बाजार में उनकी कुशल मार्केटिंग करना है। यह पूरी प्रणाली प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत संचालित होती है, जिसमें हर्बल और औषधीय उत्पादों को भी पात्रता की श्रेणी में शामिल किया गया है।
वित्तीय सहायता का ढांचा और सब्सिडी की सीमा
यदि इस व्यवसाय के वित्तीय पहलुओं को देखें, तो PMFME योजना उद्यमियों के लिए बेहद मददगार साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत सरकार कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का 35 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के तौर पर देती है। व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमी या लाभार्थी को अपनी जेब से कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा मार्जिन मनी के रूप में लगाना होता है, जबकि शेष राशि बैंक लोन के जरिए आसानी से मिल जाती है। इस सरकारी सब्सिडी की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये तय की गई है, जो आधुनिक प्रोसेसिंग मशीनरी और इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने के लिए एक बड़ी वित्तीय मदद है। विमल कुमार तोमर ने बताया कि आवेदन की पूरी प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई को काफी सरल रखा गया है ताकि स्थानीय स्तर पर ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सकें।
आवेदन की चरणबद्ध प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
इस वित्तीय सहायता योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदकों को कुछ जरूरी दस्तावेज जुटाने होते हैं। इनमें आवेदक का आधार कार्ड, पैन कार्ड, हाल ही का बिजली का बिल, राशन कार्ड और पिछले 6 महीनों का बैंक स्टेटमेंट शामिल है। इसके अलावा, आवेदकों को इस बात का भी पूरा ब्योरा देना होता है कि वे औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों जैसे कच्चे माल की खरीदारी कहां से करेंगे। इन सभी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी उद्यान विभाग में जमा करनी होती है, जिसके बाद विभागीय अधिकारी इसे ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करते हैं। इसके बाद इस डिजिटल आवेदन को जांच के लिए जिला स्तरीय समिति (DLC) के पास भेजा जाता है। जिला स्तरीय समिति से मंजूरी मिलने के बाद फाइल संबंधित बैंक को भेज दी जाती है, जहां लोन की कागजी कार्रवाई और सब्सिडी जारी करने की अंतिम प्रक्रिया पूरी होती है।
मुरादाबाद में हर्बल उद्योग की जमीनी स्थिति
वर्तमान में मुरादाबाद जनपद में कुल तीन हर्बल प्लांट सफलतापूर्वक चल रहे हैं, जो इस व्यवसाय की सफलता को साबित करते हैं। इनमें से सबसे बड़ा और विस्तृत प्लांट कांठ क्षेत्र में स्थित है, जिसे डॉक्टर अनुज द्वारा स्थापित किया गया है। डॉक्टर अनुज का यह यूनिट काफी बड़े पैमाने पर काम कर रहा है और उनके पास औषधीय पौधों की कई दुर्लभ और उपयोगी किस्में मौजूद हैं, जो नए उद्यमियों के लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शक का काम कर सकती हैं। इस काम को गहराई से समझने के लिए इच्छुक लोग कांठ में उनके इस प्लांट का दौरा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, दो अन्य छोटे हर्बल प्लांट मुरादाबाद शहर की सीमा के भीतर चल रहे हैं। जो भी लोग अपना खुद का हर्बल प्रोसेसिंग प्लांट लगाना चाहते हैं, वे सीधे उद्यान विभाग से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं और सरकार की इस बेहतरीन सब्सिडी योजना का लाभ उठा सकते हैं।



















