घर के आंगन या बालकनी में लगी अपराजिता की बेल जब नीले और बैंगनी रंग के खूबसूरत फूलों से लद जाती है, तो उसकी सुंदरता देखते ही बनती है। हालांकि, कई बार बागवानी के शौकीनों को तब बेहद निराशा होती है जब उनकी हरी-भरी बेल पर फूलों की जगह केवल हरी पत्तियां ही नजर आती हैं। ऐसी स्थिति में घबराकर कई लोग पौधे में जरूरत से ज्यादा पानी डालना शुरू कर देते हैं या बार-बार रासायनिक खाद का इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे फायदे के बजाय नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। अपराजिता की बेल की अच्छी बढ़त और उसमें ढेर सारे फूल पाने के लिए धूप, पानी, मिट्टी की बनावट और सही पोषण के बीच एक सही संतुलन का होना बेहद जरूरी है।
अपराजिता की बेल में फूल न आने के मुख्य कारण
अपराजिता के पौधे को स्वस्थ रखने और उसमें फूल लाने के लिए सबसे जरूरी चीज धूप है। इस बेल को भरपूर और सीधी धूप पसंद होती है। यदि आपने इस पौधे को किसी ऐसे कोने में रखा है जहां बहुत अधिक छाया रहती है, तो बेल की लंबाई तो बढ़ती जाएगी लेकिन उस पर कलियां नहीं बनेंगी। धूप की कमी होने पर पौधा अपनी पूरी ऊर्जा केवल पत्तियां बढ़ाने और रोशनी की तलाश में बेल को लंबा करने में लगा देता है, जिससे फूलों का विकास पूरी तरह रुक जाता है।
दूसरा बड़ा कारण गमले की मिट्टी में पानी का ठहराव होना है। अगर गमले की मिट्टी हर समय गीली और दलदली बनी रहेगी, तो इससे पौधे की जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और वे सड़ने लगती हैं। इसलिए गमले में जल निकासी के लिए उचित छेद होना बेहद जरूरी है ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके।
इसके अलावा, यदि आपके गमले की मिट्टी बहुत पुरानी हो चुकी है, तो उसमें पोषक तत्वों की भारी कमी हो जाती है और नीचे की परत सख्त हो जाती है। ऊपर से मिट्टी भले ही ठीक दिखे, लेकिन नीचे की सख्त परत जड़ों के विकास को रोक देती है। इसके समाधान के लिए समय-समय पर मिट्टी की हल्की गुड़ाई करना और उसमें सड़ी हुई जैविक खाद मिलाना बहुत फायदेमंद होता है।
काली सरसों का घरेलू नुस्खा: मिट्टी को मिलेगा प्राकृतिक पोषण
अपने पौधे की मिट्टी को बिना किसी रसायन के उपजाऊ बनाने के लिए रसोई में रखी चीजें बहुत काम आ सकती हैं। एक साझा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में बागवानी के जानकारों ने बताया है कि काली सरसों के दानों का उपयोग एक बेहतरीन जैविक मिट्टी सुधारक के रूप में किया जा सकता है। सरसों के बीजों में कई तरह के कार्बनिक पदार्थ और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो मिट्टी की सेहत को सुधारने में मददगार होते हैं।
इस नुस्खे को आजमाने के लिए 10 से 12 इंच के गमले के हिसाब से थोड़ी मात्रा में काली सरसों को लेकर मिक्सी में पीस लें। अब इस पिसे हुए पाउडर में से लगभग एक छोटा चम्मच पाउडर लें और उसे गमले की मिट्टी में डालें। ध्यान रखें कि इस पाउडर को पौधे के मुख्य तने के बिल्कुल पास डालने के बजाय गमले के किनारों की मिट्टी में मिलाएं। इसके बाद मिट्टी की ऊपरी परत की हल्की सी गुड़ाई कर दें और फिर सामान्य मात्रा में पानी डाल दें।
इसके अलावा आप सरसों के इस पाउडर को पानी में मिलाकर एक पतला घोल भी तैयार कर सकते हैं। लेकिन यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि घर पर तैयार की जाने वाली ऐसी जैविक खादों का इस्तेमाल बेहद सीमित मात्रा और अंतराल पर ही किया जाना चाहिए। बहुत अधिक मात्रा में जैविक सामग्री डालने से गमले की मिट्टी में सड़न पैदा हो सकती है, जिससे फफूंद लगने और दुर्गंध आने का खतरा बढ़ जाता है।
भरपूर फूल पाने के लिए जरूरी देखभाल के नियम
अपराजिता की बेल में लगातार फूल पाने के लिए पोषक तत्वों के साथ-साथ सही वातावरण देना भी आवश्यक है। अपने गमले को हमेशा ऐसी जगह पर रखें जहां पौधे को रोजाना कम से कम पांच से छह घंटे की अच्छी धूप मिल सके। गर्मियों के मौसम में जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी दिखने लगे तभी पानी दें, जबकि बरसात के दिनों में दोबारा पानी देने से पहले मिट्टी की नमी को अच्छी तरह से जांच लें।
अगर आपकी अपराजिता की बेल केवल पत्तियां बढ़ा रही है, तो उसमें बहुत अधिक नाइट्रोजन युक्त खाद डालने से बचें क्योंकि नाइट्रोजन केवल हरी पत्तियों के विकास को बढ़ावा देता है। बेल के विकास के साथ-साथ उसकी हल्की छंटाई करना भी बेहद फायदेमंद होता है। ऊपरी सिरों की हल्की छंटाई करने से पौधे में नई शाखाएं निकलती हैं, जिन पर आगे चलकर अधिक मात्रा में कलियां और फूल आते हैं। आखिरकार, पौधों को भी इंसानों की तरह ही अत्यधिक देखभाल की नहीं बल्कि सही और संतुलित देखभाल की जरूरत होती है।



















