पहली बारिश में ही खेत तैयार कर लगा दिए मूली के 10000 पौधे, 15-20 दिन में दिखेगी हरियाली और फिर शुरू होगी कमाईव्यापार
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पहली बारिश में ही खेत तैयार कर लगा दिए मूली के 10000 पौधे, 15-20 दिन में दिखेगी हरियाली और फिर शुरू होगी कमाई

छत्तीसगढ़ के सरगुजा के मैनपाट में एक अनुभवी किसान ने मानसून की पहली बौछार के साथ मेड़ बनाकर मूली की बुवाई कर दी है। जानिए यह तरीका क्यों फायदेमंद है और कैसे कम लागत में अच्छी कमाई होती है।

मानसून की पहली बौछार पड़ते ही छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में खेतों की रौनक बदलने लगती है। यहां के किसान अब खरीफ सीजन में पारंपरिक फसलों के बजाय सब्जी वर्गीय खेती की तरफ रुख कर रहे हैं, क्योंकि इसमें कम समय में अच्छा मुनाफा मिलने की गुंजाइश रहती है। इसी सोच के साथ मैनपाट के एक किसान ने बारिश शुरू होते ही अपने खेत में मूली के करीब 10000 पौधे लगा दिए हैं।

पहली बारिश के साथ ही क्यों की बुवाई

मैनपाट में पिछले 10 साल से खेती कर रहे किसान अजय दास ने बताया कि उन्होंने भुरभुरी मिट्टी में मेड़ बनाकर मूली की बुवाई की है। इस खेती में उन्होंने करीब 10000 पौधों के हिसाब से बीज डाले हैं। मानसून की पहली बरसात के तुरंत बाद बुवाई करने के पीछे साफ वजह है — इस मौसम में मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है और फसल की बढ़वार तेज होती है। पौधा जल्दी, यानी 10 से 15 दिन में तैयार हो जाए, इसके लिए उन्होंने गोबर खाद का इस्तेमाल किया है। अच्छी बढ़वार के लिए गोबर खाद के साथ-साथ दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी फसल को दिए जाएंगे।

भुरभुरी मिट्टी और खेत की तैयारी

अजय दास के मुताबिक मूली के लिए भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे मुफीद मानी जाती है। खेत को तैयार करने के लिए पहले ट्रैक्टर से जुताई कराई गई। शुरुआती दौर में पौधों को पोषण मिलता रहे, इसके लिए डीएपी खाद का प्रयोग किया गया। उन्होंने बताया कि बुवाई के लगभग 15 से 20 दिन बाद खेत में मूली के पौधे साफ दिखाई देने लगते हैं। बरसात के मौसम में फसल की बढ़वार बेहतर रहती है और इसी वजह से बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बनी रहती है।

बाजार और बिक्री की स्थिति

मूली की मांग को लेकर किसान निश्चिंत हैं। उनका कहना है कि पूरे मैनपाट क्षेत्र में इस सब्जी की अच्छी मांग रहती है। स्थानीय बाजारों के अलावा आसपास के इलाकों में भी इसकी आपूर्ति होती है, जिसके चलते किसानों के सामने फसल बेचने की कोई बड़ी दिक्कत नहीं आती।

देखभाल, सिंचाई और कीट प्रबंधन

अजय दास आगाह करते हैं कि मूली की फसल पर कीटों का हमला हो सकता है, इसलिए समय-समय पर दवाओं का छिड़काव करते रहना जरूरी है। सिंचाई की व्यवस्था के तौर पर उनके पास पंप मौजूद है, जिसकी मदद से जरूरत पड़ने पर फसल को पानी दिया जाता है।

आसान खेती और कम लागत

किसान का मानना है कि मूली ऐसी फसल है जिसे उगाना अपेक्षाकृत आसान है। मेड़ बनाकर खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दवाओं का छिड़काव और फसल की देखभाल कहीं ज्यादा सुविधाजनक हो जाती है, साथ ही लागत भी घट जाती है।

10वीं पास किसान ने खेती को बनाया पेशा

अजय दास ने सिर्फ 10वीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद खेती-किसानी में गहरी दिलचस्पी होने की वजह से उन्होंने इसी को अपना व्यवसाय बना लिया। उनका कहना है कि खेती से उनके परिवार का जीवनयापन बेहतर ढंग से हो रहा है और इस काम में उन्हें भरपूर संतोष मिलता है।

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