कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत और उसके पीछे ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के फेल होने की चर्चा ने अब एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले लिया है। यह मामला सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए भारत सरकार और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से पूरी घटना की विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट मांग ली है। इस निर्देश के बाद भारतीय दवा नियामक निकायों और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप का माहौल है।
WHO की सख्ती और रिपोर्ट की मांग
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुख्यालय ने भारत सरकार से उन ऑक्सीटोसिन इंजेक्शनों की गुणवत्ता और उनकी जांच से जुड़ी हर बारीक जानकारी मांगी है। संगठन ने इस बात पर गहरी चिंता जाहिर की है कि क्या इस दूषित या मानक स्तर से नीचे पाए गए बैच की आपूर्ति भारत के बाहर अन्य देशों में भी की गई थी। WHO ने मामले से जुड़े रिकॉल ऑर्डर, जारी किए गए अलर्ट और अब तक हुई कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की एक पूरी टाइमलाइन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
जैक्सन लैबोरेट्री के ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल
इस पूरे प्रकरण के केंद्र में दवा निर्माता कंपनी जैक्सन लैबोरेट्री (Jackson Laboratories) का नाम सामने आया है। एजेंसी के आंतरिक रिकॉर्ड्स पर नजर डालें तो इस कंपनी के 11 अन्य उत्पाद पहले से ही विवादों में रहे हैं और उनसे जुड़े विभिन्न मामले वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी के पास दर्ज हैं। यही कारण है कि कोटा की दुखद घटना के बाद इस कंपनी पर वैश्विक स्तर से सीधी निगरानी शुरू हो गई है।
मौतों और दवा की गुणवत्ता का गहरा कनेक्शन
आमतौर पर प्रसव के समय अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए ऑक्सीटोसिन का उपयोग किया जाता है, लेकिन कोटा मेडिकल कॉलेज में इसके असर न करने की वजह से कई प्रसूताओं की जान चली गई। अब WHO ने प्रसूताओं की मौतों और इस इंजेक्शन के बीच संभावित वैज्ञानिक संबंधों की स्पष्ट जानकारी मांगी है। इस अंतरराष्ट्रीय दखल के बाद देश में दवाओं के निर्माण और उनकी क्वालिटी चेक करने वाली प्रणाली की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठने लगे हैं।













