घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे सत्र मुनाफावसूली का दबाव बना रहा। मिडिल ईस्ट में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और दुनिया भर की अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों ने फूंक-फूंककर कदम रखा, जिसके चलते पूरे दिन बाजार में उठापटक जारी रही। जोखिम घटाने की मंशा से कई निवेशकों ने अपने फायदे वाले सौदों को भुनाया, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर बोझ साफ नजर आया।
राहत की बात यह रही कि जब-जब बाजार नीचे फिसला, तब-तब निचले स्तरों पर खरीदारी निकलती रही, जिसके कारण कोई बड़ी टूट नहीं देखी गई। अब शुक्रवार के कारोबार से पहले संकेत उत्साहजनक दिख रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी करीब 245 अंक की बढ़त के साथ 23,445 के आसपास कारोबार कर रहा है, जिससे घरेलू बाजार के दमदार आगाज की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस तेजी के पीछे कुछ ठोस कारण काम कर रहे हैं।
एशियाई बाजारों की मजबूती से बढ़ा निवेशकों का हौसला
वैश्विक मोर्चे से आज सकारात्मक संकेत आ रहे हैं। एशिया के बड़े शेयर बाजार हरे निशान में डटे हुए हैं, जिसका सीधा असर भारतीय निवेशकों के भरोसे पर पड़ा है। हांगकांग का हेंग सेंग सूचकांक 1.34 फीसदी, शंघाई कंपोजिट 0.91 फीसदी और जापान का निक्केई करीब 4 फीसदी की मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक भी जोरदार तेजी दिखा रहा है।
जानकारों का मानना है कि एशियाई बाजारों की यह मजबूती भारतीय बाजार पर भी छाप छोड़ सकती है। अगर वैश्विक संकेत आगे भी इसी तरह अनुकूल बने रहे, तो घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल और पुख्ता हो सकता है।
कच्चे तेल में नरमी से बाजार को मिली राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में ढील देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड करीब 1.23 फीसदी की गिरावट के साथ 89.27 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। तेल के दाम में आई यह नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए शुभ संकेत मानी जाती है।
विश्लेषकों के मुताबिक, अगर कच्चा तेल सस्ता बना रहता है तो महंगाई पर पड़ने वाला दबाव हल्का हो सकता है। इसके साथ ही सरकार और कंपनियों की लागत में भी कमी आ सकती है, जिसका असर शेयर बाजार और समूची अर्थव्यवस्था, दोनों पर दिख सकता है।
निफ्टी के लिए 23,000 बना मजबूत सहारा
एक रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार के सत्र में निफ्टी के 23,000 के आसपास तगड़ी खरीदारी देखी गई। हर गिरावट पर निवेशक खरीदारी करते दिखे, जिसके चलते यह स्तर एक मजबूत सपोर्ट के रूप में उभरकर सामने आया है। तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि जब तक यह स्तर कायम है, तब तक बाजार में किसी बड़ी कमजोरी की आशंका कम है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली चिंता बनी हुई है। विदेशी पूंजी की निकासी और डॉलर की मजबूती की वजह से रुपये पर भी दबाव बना रहा। इसके बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को संभाले हुए है।
फिलहाल बाजार सतर्कता के साथ, लेकिन सकारात्मक संकेतों के बीच कारोबार कर रहा है। निवेशकों की निगाहें मिडिल ईस्ट के ताजा घटनाक्रम, विदेशी निवेश के रुझान और वैश्विक बाजारों की चाल पर टिकी हुई हैं।













