भारतीय रक्षा और विमानन क्षेत्र में लड़ाकू विमानों की चर्चाओं के बीच सरकारी विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल ने नागरिक उड्डयन बाजार की तरफ अपने कदम तेजी से बढ़ा दिए हैं। कंपनी बहुत जल्द सरकारी हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता कंपनी पवन हंस को चार ध्रुव एनजी मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों का पहला जत्था सौंपने की तैयारी में जुटी है। पवन हंस ने इसी साल जनवरी के महीने में कुल 10 ऐसे आधुनिक हेलीकॉप्टरों की खरीद का आधिकारिक ऑर्डर दिया था। अनुबंध की शर्तों के अनुसार, बाकी बचे 6 हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी भी इसी चालू वित्त वर्ष के भीतर पूरी किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
नागरिक उड्डयन कारोबार में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी का लक्ष्य
पवन हंस को नए हेलीकॉप्टरों की यह खेप ऐसे अहम मोड़ पर मिलने जा रही है, जब एचएएल अपने राजस्व मॉडल में बड़ा रणनीतिक बदलाव कर रही है। विमान निर्माता कंपनी ने आने वाले एक दशक के भीतर अपने कुल सालाना कारोबार का 25 प्रतिशत हिस्सा गैर-सैन्य यानी नागरिक विमानन क्षेत्र से हासिल करने का महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। मौजूदा समय में कंपनी की कुल कारोबारी कमाई में सिविल एविएशन क्षेत्र का योगदान महज पांच प्रतिशत के आसपास ही सीमित है। एचएएल के आंतरिक अनुमानों के अनुसार, भारत के भीतर आने वाले वर्षों में ध्रुव एनजी श्रेणी के लगभग 400 नए हेलीकॉप्टरों की मजबूत मांग निकलने की पूरी संभावना है।
उन्नत सुरक्षा तकनीक और आधुनिक कॉकपिट से लैस ध्रुव एनजी
ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर को पहले से स्थापित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव प्लेटफॉर्म के उन्नत ढांचे पर विकसित किया गया है। नागरिक उड्डयन मानकों पर खरा उतरने के लिए इसमें नागरिक प्रमाणीकरण प्राप्त अत्याधुनिक ग्लास कॉकपिट लगाया गया है। इसके अलावा इसमें आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम जोड़े गए हैं, जिससे पायलट को उड़ान के दौरान मौसम और आसपास की परिस्थितियों की बेहद सटीक जानकारी मिलती है। सुरक्षा मानकों को शीर्ष स्तर पर ले जाने के लिए इसमें क्रैश-रेजिस्टेंट सीटें और सेल्फ-सीलिंग फ्यूल टैंक जैसी जीवनरक्षक सुविधाएं दी गई हैं। ध्रुव के पुराने मॉडल भारतीय सशस्त्र बलों और भारतीय तटरक्षक बल में लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं, और उन संस्करणों से मिले अनुभवों के आधार पर नई पीढ़ी के इस हेलीकॉप्टर में पुरानी सभी तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियों का पूरी तरह समाधान किया गया है।
घरेलू राज्यों और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहा रुझान
एचएएल को अपने इस नए हेलीकॉप्टर के लिए न सिर्फ केंद्र सरकार के विभागों बल्कि कई राज्य सरकारों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के साथ-साथ कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्य इस बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर को लेकर गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसके साथ ही दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों को भी इस श्रेणी के हेलीकॉप्टरों के लिए मजबूत संभावित ग्राहक माना जा रहा है। एचएएल विशेष रूप से उत्तर भारत के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर पर्यटन यानी हेली-टूरिज्म की असीम संभावनाओं को भुनाने की तैयारी कर रहा है, जिससे यात्रियों को सुगम यात्रा विकल्प मिल सकें।
एलसीए तेजस कार्यक्रम और 1.1 लाख करोड़ के रक्षा सौदे
नागरिक उड्डयन में विस्तार के साथ-साथ कंपनी अपने मूल रक्षा अनुबंधों को भी गति से पूरा कर रही है। वर्ष 2010 के ऐतिहासिक अनुबंध के तहत भारतीय वायुसेना को दो अंतिम बचे एलसीए एमके-1 ट्रेनर विमान सौंपे जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। भारतीय वायुसेना ने शुरुआती आईओसी और बाद के एफओसी मानकों के तहत कुल 40 एलसीए एमके-1 जेट विमानों का ऑर्डर दिया था, जिसमें 32 सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान और 8 ट्रेनर जेट शामिल थे। इनमें से सभी 32 लड़ाकू विमान और 6 ट्रेनर पहले ही वायुसेना के बेड़े में शामिल होकर दो सक्रिय स्क्वाड्रनों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी विमानों पर भरोसा जताते हुए अब तक 180 उन्नत एलसीए एमके-1ए लड़ाकू विमानों के लिए दो बड़े सौदे किए हैं। इनमें 83 विमानों के लिए पहला अनुबंध फरवरी 2021 में हस्ताक्षरित हुआ था, जबकि 97 अतिरिक्त विमानों के लिए दूसरा अनुबंध सितंबर 2025 में तय किया गया। इन दोनों विशाल रक्षा अनुबंधों की संयुक्त कीमत लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा, नागरिक उड्डयन के मोर्चे पर कंपनी रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) के साथ मिलकर एसजे-100 क्षेत्रीय यात्री विमान परियोजना पर काम कर रही है। जनवरी में हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत में तीन वर्षों के भीतर इस दोहरे इंजन वाले नैरो-बॉडी यात्री विमान का लाइसेंस उत्पादन शुरू करने की योजना है। आने वाले समय में ध्रुव एनजी, एसजे-100 और हिंदुस्तान-228 विमान एचएएल के नागरिक उड्डयन अभियान की मुख्य रीढ़ साबित होंगे।



















