संयुक्त अरब अमीरात का एक विशाल रेतीले क्षेत्र से गगनचुंबी इमारतों और अत्याधुनिक तकनीकी केंद्रों के रूप में बदलना दुनिया भर के लिए आकर्षण और आश्चर्य का विषय बना हुआ है। दुनिया की तमाम दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस खाड़ी देश के नए विकसित क्षेत्रों में अपना पूंजी निवेश कर रही हैं। इस असाधारण और तीव्र प्रगति के पीछे सबसे बड़ी भूमिका वहां की रणनीतिक नीति की है जिसे फ्री ज़ोन मॉडल कहा जाता है। इस विशेष प्रशासनिक व्यवस्था ने व्यापारिक गतिविधियों के लिए नौकरशाही की पारंपरिक अड़चनों को पूरी तरह दूर कर दिया है। यह एक ऐसा सफल और व्यावहारिक ढांचा है, जिसे यदि भारत के छोटे और विकासशील शहरों में सही तरीके से लागू किया जाए, तो वे भी अमेरिका जैसे विकसित देशों के आधुनिक औद्योगिक केंद्रों की तरह चमक सकते हैं।
फ्री ज़ोन व्यवस्था की बुनियादी समझ
फ्री ज़ोन मूल रूप से किसी देश के भीतर सरकार द्वारा घोषित एक ऐसा विशेष भौगोलिक क्षेत्र होता है, जहां के व्यावसायिक नियम और कानून देश के बाकी हिस्सों में लागू होने वाले सामान्य कानूनों की तुलना में बेहद सरल, लचीले और सुविधाजनक होते हैं। इन विशिष्ट क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को कई तरह की रियायतें और अतिरिक्त सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें सीमा शुल्क यानी कस्टम ड्यूटी में विशेष छूट, आसान आयात और निर्यात प्रक्रियाएं तथा टैक्स में बड़ी छूट शामिल हैं। इन अनुकूल नीतियों को इस तरह तैयार किया जाता है ताकि विदेशी निवेशकों और वैश्विक कंपनियों को नए देश में अपनी इकाइयां स्थापित करने में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधाओं का सामना न करना पड़े और उनका व्यापारिक परिचालन सुचारू रूप से चल सके।
यूएई में कैसे काम करता है यह पूरा सिस्टम
संयुक्त अरब अमीरात में फ्री ज़ोन की व्यवस्था को बेहद व्यवस्थित और क्षेत्रवार तरीके से विभाजित किया गया है, जिसके तहत लगभग 40 विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को इसके दायरे में रखा गया है। इन क्षेत्रों में विनिर्माण, अत्याधुनिक तकनीकी अनुसंधान, मीडिया उत्पादन, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय सेवाएं और कृषि-तकनीक जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर शामिल हैं। जब कोई वैश्विक कंपनी इन समर्पित ज़ोन में निवेश करने की इच्छा व्यक्त करती है, तो स्थानीय प्रशासन द्वारा उन्हें एक ही स्थान पर लाइसेंस और व्यावसायिक पंजीकरण की त्वरित सुविधा प्रदान की जाती है। इसके साथ ही सरकार उनके संचालन के लिए भूमि, अत्याधुनिक गोदाम और कारखाना स्थापित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा भी तुरंत उपलब्ध कराती है।
मालिकाना हक और टैक्स में मिलने वाले विशेष लाभ
इस पूरे मॉडल की सबसे बड़ी और आकर्षक विशेषता विदेशी कंपनियों को मिलने वाला शत-प्रतिशत यानी 100 फीसदी मालिकाना हक है। सामान्यतः किसी भी देश के मुख्य भूमि नियमों के तहत विदेशी निवेशकों को व्यवसाय चलाने के लिए स्थानीय भागीदारों के साथ मिलकर काम करना पड़ता है, लेकिन फ्री ज़ोन में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती और विदेशी निवेशक अपने व्यवसाय पर पूरा नियंत्रण रख सकते हैं। टैक्स के मोर्चे पर भी यहां बड़े वित्तीय लाभ दिए जाते हैं। यद्यपि संयुक्त अरब अमीरात में सामान्य कॉरपोरेट टैक्स की दर 9 फीसदी निर्धारित है, लेकिन इन विशेष ज़ोन में काम करने वाली पात्र कंपनियों को इस टैक्स से छूट दी जाती है, जिससे कइयों के लिए कर की प्रभावी दर शून्य हो जाती है। इसके अलावा, वहां काम करने वाले विदेशी कार्यबल को दीर्घकालिक निवास परमिट और वर्क परमिट भी अत्यंत सुगम प्रक्रियाओं के माध्यम से प्राप्त हो जाते हैं।
विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा और सिंगल विंडो प्रशासन
फ्री ज़ोन को पूर्ण रूप से सक्रिय और प्रभावी बनाने के लिए केवल नियमों में ढील देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सरकारें एक पूर्ण और आत्मनिर्भर व्यावसायिक इकोसिस्टम भी तैयार करती हैं। इसके तहत बेहतरीन परिवहन नेटवर्क, निर्बाध बिजली और जलापूर्ति, उच्च क्षमता वाली इंटरनेट कनेक्टिविटी और आधुनिक गोदामों का निर्माण किया जाता है। इसके अतिरिक्त, कागजी कार्रवाई को न्यूनतम करने के लिए सिंगल विंडो प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जाती है। इसका अर्थ यह है कि कंपनियों को विभिन्न मंजूरियों, परमिट, पंजीकरण और पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्रों के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, बल्कि एक ही एकीकृत खिड़की से उनके सभी प्रशासनिक काम निर्धारित समय सीमा के भीतर संपन्न हो जाते हैं।
भारत के लिए क्या हैं संभावनाएं और औद्योगिक अवसर
भारत के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो देश में वर्तमान समय में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए SEZ यानी स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन मॉडल पहले से ही कार्यरत है। भारत सरकार ने इसके संचालन और पंजीकरण को सरल बनाने के लिए एक समर्पित डिजिटल पोर्टल भी विकसित किया है, जिसके माध्यम से औद्योगिक गतिविधियों की निगरानी की जाती है। हालांकि, वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए इस SEZ मॉडल को और अधिक व्यापक स्तर पर अपग्रेड करने की आवश्यकता है ताकि इसे यूएई के फ्री ज़ोन की तरह अधिक स्वायत्त और आकर्षक बनाया जा सके। यदि भारत सरकार अपने विभिन्न राज्यों के छोटे और विकासशील शहरों में इस तरह की वास्तविक फ्री ज़ोन नीति को प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे बल्कि विदेशी कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना बेहद आसान हो जाएगा। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, रेलवे कोच निर्माण, सेमीकंडक्टर असेंबली और भारी मशीनरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने वाली वैश्विक कंपनियों को भारत के छोटे शहरों में आकर्षित किया जा सकता है। इससे इन शहरों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी और वे भविष्य के वैश्विक औद्योगिक केंद्र बन सकेंगे।



















