नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस के खाताधारकों और नए निवेशकों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पेंशन योजनाओं के चयन से जुड़ी व्यवस्था में अहम फेरबदल होने जा रहा है। पेंशन फंड नियामक पीएफआरडीए ने विभिन्न पेंशन योजनाओं के नामकरण और उनके ऑनलाइन प्रदर्शन को लेकर नए दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। इस नए कदम का प्रमुख लक्ष्य निवेशकों के लिए विभिन्न पेंशन फंड प्रबंधकों द्वारा संचालित योजनाओं को समझना, उनके स्वरूप को पहचानना और आपस में तुलना करना काफी सरल बनाना है। डिजिटल इंटरफेस पर अब पेंशन सब्सक्राइबर्स को उनकी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार ही योजनाओं के स्पष्ट विकल्प पेश किए जाएंगे।
नियामक संस्था पीएफआरडीए ने 2 नवंबर 2026 को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी कर इन सभी संशोधनों की विस्तृत जानकारी साझा की है। यह नई व्यवस्था 1 दिसंबर 2026 से पूरी तरह लागू कर दी जाएगी। नियामक के अनुसार, ये ताजा निर्देश पूर्व में 28 अगस्त 2026 को जारी किए गए सर्कुलर में आंशिक संशोधन के रूप में तैयार किए गए हैं ताकि पूरी प्रणाली में एकरूपता और पारदर्शिता लाई जा सके।
मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क में नामकरण की एक समान व्यवस्था
पीएफआरडीए ने मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (एमएसएफ) के दायरे में आने वाली सभी पेंशन स्कीमों के लिए एक मानकीकृत नामकरण प्रणाली लागू करने का आदेश दिया है। अब सभी पंजीकृत पेंशन फंड प्रबंधकों को अपनी योजनाओं के नाम एक तयशुदा और स्वीकृत प्रारूप के अनुरूप ही रखने होंगे। इस बदलाव के जरिए सब्सक्राइबर्स अलग-अलग फंड घरानों की योजनाओं को बिना किसी संशय के आसानी से पहचान सकेंगे। नए नियमों में स्पष्ट किया गया है कि ए से ई तक के कैटेगरी कोड अब योजनाओं के आधिकारिक नाम का हिस्सा नहीं बनाए जाएंगे। इसके अलावा, यदि कोई पेंशन फंड प्रबंधक किसी एक ही निवेश श्रेणी के तहत एक से अधिक योजनाएं चला रहा है, तो उन दोनों योजनाओं के नाम पूरी तरह भिन्न, स्पष्ट और विशिष्ट होने अनिवार्य होंगे ताकि निवेशकों में किसी तरह का भ्रम न रहे।
प्रचार सामग्री में जोखिम और निवेश श्रेणी बताना हुआ अनिवार्य
नियामक ने केवल योजना का शीर्षक प्रदर्शित करने की पुरानी परिपाटी को अपर्याप्त माना है। नए दिशा-निर्देशों के तहत पेंशन फंडों के लिए यह बाध्यकारी होगा कि वे अपने विज्ञापनों, मीडिया अभियानों और अन्य सभी सार्वजनिक संचार सामग्रियों में योजना के नाम के साथ-साथ उसकी वास्तविक श्रेणी अथवा ग्रोथ कैटेगरी का स्पष्ट रूप से उल्लेख करें। इस अनिवार्य प्रकटीकरण से आम निवेशकों को यह समझने में सीधी मदद मिलेगी कि संबंधित योजना किस प्रकार की परिसंपत्तियों में निवेश करती है और उसमें उनकी पूंजी पर कितना वित्तीय जोखिम शामिल है।
पॉइंट ऑफ प्रेजेंस प्लेटफॉर्म पर सभी पेंशन विकल्पों की उपलब्धता
पेंशन योजनाओं के वितरण में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (पीओपी) प्लेटफॉर्मों के लिए भी पीएफआरडीए ने कड़े नियम तय किए हैं। सामान्य तौर पर, जो भी पीओपी अपने डिजिटल चैनल या पोर्टल के जरिए ग्राहकों के एनपीएस खाते खुलवाते हैं, उन्हें निवेशक द्वारा चयनित निवेश श्रेणी में मौजूद सभी पंजीकृत पेंशन फंडों की उपलब्ध योजनाओं को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करना होगा। नियमों के अनुसार, पीओपी अपनी मर्जी से किसी विशेष फंड की योजना को सूची में सबसे ऊपर दिखा सकता है या किसी स्कीम को डिफॉल्ट चयन के रूप में पहले से चुनकर पेश कर सकता है। हालांकि, ऐसा करने के बावजूद उसे उसी श्रेणी के अंतर्गत आने वाले अन्य सभी पेंशन फंडों के विकल्पों को भी स्क्रीन पर पूरी तरह दिखाना होगा, ताकि निवेशक को निष्पक्ष चुनाव का मौका मिले।
पेंशन फंड की अपनी वेबसाइट और आधिकारिक केंद्रीय प्रणाली की व्यवस्था
यदि किसी पेंशन फंड प्रबंधक के पास स्वयं का पीओपी लाइसेंस भी मौजूद है और कोई निवेशक अपनी व्यक्तिगत इच्छा से सीधे उस पेंशन फंड की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर एनपीएस खाता खोलता है, तो ऐसी स्थिति में उस प्लेटफॉर्म पर केवल उसी फंड प्रबंधक की स्कीमें दिखाने की छूट दी जाएगी। दूसरी तरफ, एनपीएस सेंट्रल और सीआरए (सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी) के मुख्य प्लेटफॉर्मों पर नियम पूरी तरह निष्पक्ष रहेगा। सीआरए और सेंट्रल सिस्टम पर निवेशक द्वारा चुनी गई किसी भी श्रेणी के तहत आने वाले सभी पेंशन फंडों की संपूर्ण योजनाओं की सूची को निष्पक्ष रूप से प्रदर्शित करना आवश्यक होगा।
















