हिमाचल प्रदेश के चंबा दौरे के दौरान प्रशासनिक बैठकों और औपचारिक कार्यक्रमों के बीच एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। तीसा में रात्रि विश्राम के बाद जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आम नागरिकों की समस्याएं सुन रहे थे, तभी एक नन्हीं छात्रा अपनी व्यथा बताते हुए फफक पड़ी। बीते तीन वर्षों से अपनी मां के स्नेह और सान्निध्य से वंचित यह मासूम केवल इतना चाहती थी कि उसकी सरकारी शिक्षिका मां का कार्यक्षेत्र उसके गृह जिले के नजदीक कर दिया जाए, ताकि परिवार एक साथ रह सके।
मासूम वंशिका की भावुक अपील और मुख्यमंत्री का भरोसा
चुराह क्षेत्र की निवासी वंशिका ठाकुर ने रुंधे गले से मुख्यमंत्री को बताया कि वह फिलहाल पांचवीं कक्षा में पढ़ रही है और साथ ही नवोदय प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई है। चौथी कक्षा तक तो वह अपनी मां के साथ ही रहती थी, लेकिन उसके बाद पढ़ाई और परिस्थितियों के कारण उसे अलग रहना पड़ रहा है। उसकी मां, जो कि जेबीटी शिक्षक हैं और उनका नाम नारो है, पिछले 3 साल से गृह क्षेत्र से लगभग 700 किलोमीटर दूर शिमला जिले के नेरवा में पदस्थ हैं। इतनी भारी दूरी के कारण मां-बेटी का रोज मिलना तो दूर, नियमित संपर्क भी कठिन बना हुआ है। बच्ची की पीड़ा सुनकर मुख्यमंत्री ने तुरंत संवेदनशीलता दिखाई और भरोसा दिया कि शिक्षिका का तबादला घर के नजदीकी विद्यालय में करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को इस संबंध में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए।
शिक्षा सुधारों और सीबीएसई संबद्धता पर सरकार का जोर
इस मुलाकात से पहले मुख्यमंत्री चुराह विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत भंजराड़ू कला मंच में एक विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रेखांकित किया कि दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। राज्य में राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं और सीबीएसई पाठ्यक्रम से जुड़े संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है। सरकार हर विधानसभा हलके में कम से कम दो से तीन सीबीएसई स्कूल शुरू कर चुकी है और आने वाले समय में समूचे प्रदेश के भीतर 100 से अधिक नए सीबीएसई विद्यालय स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पारदर्शी व्यवस्था के तहत मेरिट के आधार पर 2,700 से अधिक नए शिक्षकों की भर्ती संपन्न कराई जा चुकी है ताकि किसी भी संस्थान में अध्ययन कार्य बाधित न हो।
रैंकिंग में छलांग और पूर्ववर्ती नीतियों पर समीक्षा
शैक्षणिक प्रदर्शन के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सुनियोजित सुधारों का नतीजा है कि गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा के राष्ट्रीय सूचकांक में हिमाचल प्रदेश वर्ष 2025 में पांचवें पायदान पर पहुंच गया है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व भाजपा सरकार के समय वर्ष 2021 में राज्य इस सूची में फिसलकर 21वें स्थान पर था। मुख्यमंत्री के अनुसार पूर्ववर्ती सरकार ने पर्याप्त मानव संसाधन और बुनियादी ढांचे का प्रबंध किए बिना अंधाधुंध तरीके से कई शैक्षणिक और स्वास्थ्य केंद्र खोल दिए थे। मौजूदा व्यवस्था ने संस्थाओं का व्यावहारिक युक्तिकरण किया और खाली पड़े हजारों शिक्षक पदों को भरकर जमीनी स्तर पर पढ़ाई का स्तर सुधारा है।
कल्याणकारी योजना से महिलाओं को राहत की तैयारी
जनसभा के मंच से मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी पहल का भी ऐलान किया। आगामी माह से राज्य भर में ‘मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ विधिवत प्रारंभ की जाएगी। इस कल्याणकारी कार्यक्रम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त पंजीकृत परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ मिलेगा और विशेष स्वास्थ्य बीमा कार्ड के जरिए मुफ्त इलाज की सुविधा भी सुनिश्चित की जाएगी। केवल चुराह विधानसभा क्षेत्र की ही बात करें तो वहां करीब 15 हजार महिलाओं को इस योजना के दायरे में लाकर सीधा संबल पहुंचाया जाएगा।



















