मॉरीशस की सड़कों पर अचानक चली गोली ने सत्ताईस वर्षीय एलॉडी थॉमस को जिंदगी और मौत के गंभीर मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया था। ड्यूटी खत्म कर वैन से घर लौटते समय उनके कान के समीप गोली लगी, जो शरीर के अत्यंत संवेदनशील आंतरिक तंत्र को भेदती हुई भीतर धंस गई थी। स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद घाव की जगह इतनी पेचीदा थी कि मामूली सी त्रुटि भी उनके शरीर को जीवनभर के लिए लकवाग्रस्त या अक्षम बना सकती थी। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए हवाई मार्ग से भारत स्थानांतरित करना खतरे से खाली नहीं माना गया। ऐसी आपात स्थिति में कूटनीतिक समन्वय के जरिए फैसला लिया गया कि मरीज को बुलाने के बजाय भारतीय विशेषज्ञों का दस्ता खुद तत्काल मॉरीशस उड़ान भरेगा।
हिंसा भड़कने के बाद आधी रात को सक्रिय हुआ कूटनीतिक तंत्र
यह पूरा घटनाक्रम 9 अक्टूबर को उस वक्त शुरू हुआ जब एलॉडी पोर्ट लुई के दक्षिणी आवासीय इलाके से गुजर रही थीं। रास्ते में अचानक हुई फायरिंग की जद में वह आ गईं, जिसमें आरोप एक पुलिसकर्मी पर लगा। इस वारदात की खबर फैलते ही पूरे द्वीप देश में जबरदस्त जनाक्रोश उमड़ पड़ा। भीड़ ने मुख्य मार्गों की नाकेबंदी कर दी और पुलिस ठिकानों पर तोड़फोड़ शुरू हो गई, जिससे वहां बीते कई दशकों का सबसे बड़ा तनाव खड़ा हो गया। देश के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने नागरिकों से शांति बरतने की सार्वजनिक गुहार लगाई, मगर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती एलॉडी को जीवित रखने की थी।
बिगड़ते माहौल और मरीज की गिरती सेहत के बीच 10 अक्टूबर की देर रात एक अहम कदम उठाया गया। मॉरीशस के स्वास्थ्य मंत्री अनिल बच्चू ने आधी रात को पोर्ट लुई स्थित भारतीय उच्चायुक्त अनुराग श्रीवास्तव को आपातकालीन कॉल की। उन्होंने घायल युवती के उपचार हेतु भारत के शीर्ष न्यूरोसर्जन और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की फौरी तैनाती का अनुरोध किया। सूचना मिलते ही भारतीय तंत्र हरकत में आया और हैदराबाद के KIMS अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों से तुरंत संपर्क साधा गया। दोनों देशों के डॉक्टरों ने प्राथमिक रिपोर्टों का अध्ययन किया और पाया कि मरीज लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ान का दबाव कतई सहन नहीं कर सकती, इसलिए भारतीय टीम का वहां जाना ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प था।
हैदराबाद से उड़ी 13 सदस्यों की जीवन रक्षक टीम
रातोंरात जरूरी स्वीकृतियां लेकर तेरह सदस्यीय मेडिकल दस्ता तैयार किया गया, जिसमें पांच कुशल चिकित्सक और आठ विशिष्ट तकनीशियन व पैरामेडिकल कर्मी शामिल थे। 12 अक्टूबर को यह विशेष दल सीधे मॉरीशस के अस्पताल पहुंचा। हालांकि उड़ान भरने से पहले ही दोनों देशों के डॉक्टरों के बीच डिजिटल तालमेल स्थापित हो चुका था। चिकित्सकों ने संचार माध्यमों पर त्वरित संपर्क समूह बनाकर मरीज के वाइटल्स, सीटी स्कैन और न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों की निरंतर समीक्षा पहले ही शुरू कर दी थी।
भारतीय टीम की अगुवाई कर रहे डॉक्टर राकेश जाला और प्रख्यात न्यूरोसर्जन डॉक्टर कपिल खंडेलवाल ने स्थानीय चिकित्सा दल के साथ मिलकर ऑपरेशन थियेटर में मोर्चा संभाला। सर्जरी के दौरान कई घंटों तक सांसें थामने वाली परिस्थिति बनी रही। गोली पैरोटिड ग्रंथि से सटे संकरे मार्ग से होते हुए मुख्य नसों के बेहद करीब रुकी हुई थी। एक मिलीमीटर का भटकाव भी चेहरे की नसों अथवा बोलने-सुनने की क्षमता को हमेशा के लिए समाप्त कर सकता था। ऑपरेशन की गंभीरता स्पष्ट करते हुए डॉक्टर कपिल खंडेलवाल ने कहा,
न्यूरोलॉजिकल संरचनाओं को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए था।
ऑपरेशन के बाद चमत्कारिक सुधार और नई उम्मीद
घंटों चली मैराथन शल्यक्रिया आखिरकार पूरी तरह कामयाब रही और गोली को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सर्जरी के उपरांत किए गए चिकित्सकीय मूल्यांकनों में किसी प्रकार की तंत्रिका क्षति या अंदरूनी संक्रमण का कोई लक्षण नहीं मिला, जो इस प्रकार की गंभीर बुलेट इंजरी में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। ऑपरेशन समाप्त होने के बाद मुख्य सर्जनों का एक हिस्सा स्वदेश लौट आया, जबकि गहन निगरानी रखने वाले विशेषज्ञ मरीज की रिकवरी सुनिश्चित करने हेतु कुछ दिनों तक वहीं तैनात रहे।
कुछ ही दिनों के भीतर एलॉडी ने सहारा लेकर अपने पैरों पर चलने का प्रयास शुरू कर दिया। इस अविश्वसनीय सुधार से भावुक हुए डॉक्टर कपिल खंडेलवाल ने पूरे घटनाक्रम के परिणाम को एक शब्द में बयां करते हुए 'चमत्कार' करार दिया। भारतीय दल के प्रमुख डॉक्टर राकेश जाला ने भी पुष्टि की कि मरीज की शारीरिक स्थिति अब पूरी तरह खतरे से बाहर है और वह तेजी से स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर उठे सवालों का समाधान
स्थानीय स्तर पर भारतीय सर्जनों को बुलाए जाने को लेकर प्रशासनिक हलकों में कुछ सवाल भी उठे, जिस पर मॉरीशस के स्वास्थ्य मंत्री अनिल बच्चू ने सार्वजनिक मंचों पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने रेखांकित किया कि जब किसी नागरिक का जीवन दांव पर लगा हो, तब त्वरित और सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञता हासिल करना ही सरकार का सर्वोच्च दायित्व होता है। भारत और मॉरीशस के डॉक्टरों के इस साझा प्रयास ने न केवल एक युवा नागरिक को नई जिंदगी दी, बल्कि दोनों देशों के बीच मानवीय और कूटनीतिक रिश्तों की मजबूती की एक दुर्लभ नजीर भी पेश की।



















