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पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में उठाए सवाल, तकनीक और सप्लाई चेन पर छिड़ी जंगव्यापार
13 अक्तू॰ 2026, 11:46 am (15 दिन पहले)· 1

पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में उठाए सवाल, तकनीक और सप्लाई चेन पर छिड़ी जंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि आज दुनिया में सप्लाई चेन, एनर्जी और तकनीक को दबाव और दबदबे का हथियार बनाया जा रहा है। उन्होंने भारत के डिजिटल पेमेंट, स्टार्टअप इकोसिस्टम और समावेशी विकास मॉडल को दुनिया के सामने रखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए वैश्विक स्तर पर चल रहे शक्ति संघर्ष और बदलते समीकरणों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऊर्जा, खनिज और तकनीक जैसी जरूरी चीजें नियंत्रण और दबाव का जरिया बन चुकी हैं। वैश्विक मंच पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि 21वीं सदी का यह दशक कई बड़ी चुनौतियों से घिरा हुआ है, जिसमें महामारी से लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में छिड़े युद्ध और व्यापारिक बाधाएं शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो माध्यम कभी देशों को आपस में जोड़ते थे, वे अब संघर्ष और वर्चस्व के हथियार के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं।

सप्लाई चेन और तकनीक पर नियंत्रण की जंग

समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विककरण के दौरान जिन रास्तों और तंत्रों का निर्माण हुआ था, वे अब सप्लाई चेन की रुकावटें और अड़चनें बन चुके हैं। एनर्जी सप्लाई, क्रिटिकल मिनरल्स, पेमेंट गेटवे और आधुनिक तकनीक पर कब्जे की होड़ मची हुई है। दुनिया जब एक संकट से बाहर निकलने का रास्ता खोजती है, तब तक एक और नया संकट सामने आ जाता है। इन सबके बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर क्षेत्र में कार्यप्रणाली को बदल रहा है और कई देश उम्रदराज होती आबादी की समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। ऐसे में वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत और सवाल भरोसे का बन गया है, जहां संकट के समय आपूर्ति जारी रहने और समझौतों के पालन की गारंटी की आवश्यकता है।

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डिजिटल भुगतान और समावेशी विकास की मिसाल

भारत की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने विदेशी मेहमानों को देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का अनुभव लेने का आमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह देश में एक सामान्य स्ट्रीट वेंडर और एक बड़े कार शोरूम का पैमाना भले ही अलग हो, लेकिन दोनों एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। यह समावेशी तकनीक की असली ताकत को दर्शाता है, जो समाज के हर वर्ग को समान अवसर प्रदान कर रही है।

स्टार्टअप्स और लोकतंत्र की अनूठी ताकत

देश में नवाचार और उद्यमिता के बढ़ते दायरे पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले भारत में कुछ सौ स्टार्टअप हुआ करते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर ढाई लाख से अधिक हो चुकी है। इनमें से लगभग आधे स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से उभरकर सामने आए हैं और करीब 45 प्रतिशत स्टार्टअप्स में एक महिला डायरेक्टर या पार्टनर की मौजूदगी है। इसके अलावा, भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए उन्होंने कहा कि देश में 100 से अधिक भाषाएं, लगभग 80,000 रजिस्टर्ड अखबार और प्रकाशन, तथा 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल मौजूद हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में देश में 50 करोड़ से ज्यादा यूट्यूब और इंस्टाग्राम यूजर्स हैं, जो विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते हैं और चर्चा करते हैं।

सत्ता और तकनीक का उद्देश्य

मानवीय मूल्यों और गवर्नेंस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सशक्त करने की यह भावना केवल उपदेश देने के लिए नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों की भारतीय परंपरा ने हमें यही सिखाया है। इस वर्ष ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया में नई ताकतें उभर रही हैं। आज के इस दौर में डेटा, ज्ञान और नवाचार ही असली ताकत हैं। हालांकि, मुख्य सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका उपयोग कैसे किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने ब्लूमबर्ग और उनकी पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण आयोजन को पहली बार भारत में सफलतापूर्वक आयोजित करने और सही समय पर सही मंच चुनने के लिए बधाई दी।

सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भाषण कहां दिया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संबोधन ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में दिया।
फोरम में किन प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई?
फोरम में ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, तकनीक और सप्लाई चेन पर बढ़ते नियंत्रण और वैश्विक दबाव के मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत में स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर कितनी हो गई है?
भारत में स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 2.5 लाख से अधिक हो गई है।
कितने प्रतिशत स्टार्टअप्स में महिला डायरेक्टर या पार्टनर हैं?
लगभग 45 प्रतिशत स्टार्टअप्स में एक महिला डायरेक्टर या पार्टनर शामिल हैं।
भारत में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या क्या है?
भारत में 50 करोड़ से ज्यादा यूट्यूब यूजर्स और 50 करोड़ से ज्यादा इंस्टाग्राम यूजर्स हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·14 दिन पहले

प्रधानमंत्री ने सप्लाई चेन और तकनीक के हथियार बनने की बात बिल्कुल सही उठाई है, पर क्या सिर्फ भरोसे की बात करने से ये देश अपनी हरकतों से बाज आ जाएंगे? दुनिया के बड़े देश आसानी से कहां मानते हैं।

Rohan Gupta@rohan-gupta·14 दिन पहले

जिस तरह से टेक और सप्लाई चेन को देशों पर दबाव बनाने का हथियार बनाया जा रहा है, वह वाकई चिंता की बात है। अच्छी बात यह है कि भारत डिजिटल पेमेंट और स्टार्टअप के मामले में खुद को मजबूत कर रहा है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·14 दिन पहले

रोहन, बिल्कुल सही कहा। अमेरिका में भी अब यही बहस चल रही है कि क्रिटिकल मिनरल्स और चिप सप्लाई पर दूसरों की निर्भरता कितनी खतरनाक होती जा रही है।

Michael Anderson@michael-anderson·14 दिन पहले

तकनीक को दबाव का हथियार बताना ठीक है, पर आज के दौर में हर देश अपने हित पहले देखता है।

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

माइकल, सही बात है। आज के इस दौर में सप्लाई चेन और डिजिटल एसेट्स को हथियार बनाना ही सबसे बड़ा जोखिम बन गया है, जिस पर पीएम मोदी ने बिल्कुल सही ध्यान खींचा है।

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