मुरादाबाद के किसान अब इस अनूठी योजना का सहारा लेकर अपनी बेकार और बंजर पड़ी जमीन को खेती के काबिल बना सकते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक बेहद अहम भूमि सुधार योजना है, जिसका मुख्य मकसद बेकार, बीहड़, बंजर और जलभराव से प्रभावित भूमि का उपचार करके उसे कृषि योग्य बनाना है। यह योजना प्रदेश के चुनिंदा परियोजना क्षेत्रों में उन जमीनों को सुधारने का काम करती है जो लंबे समय से किसी उपयोग में नहीं आ रही थीं। इसके दायरे में कृषि की पैदावार बढ़ाने के वास्ते बागवानी और कृषि वानिकी को भी प्रोत्साहित किया जाता है। राज्य के तमाम जिलों में इस योजना का संचालन किया जा रहा है।
कैसे काम करती है यह योजना
उप कृषि निदेशक रविकांत ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना खासतौर से ग्रामीण इलाकों की बंजर और जलभराव वाली भूमि की सेहत सुधारने के लिए चलाई जा रही है। इसके तहत किसानों की जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में नाला बंदी का काम मुख्य रूप से शामिल होता है। इसके अलावा खेतों के पास छोटी-छोटी जल संरक्षण संरचनाएं तैयार की जाती हैं ताकि खेत का पानी खेत में ही सुरक्षित रहे। इन उपायों से जमीन की पानी रोकने की क्षमता में इजाफा होता है और पानी के तेज बहाव से होने वाले मिट्टी के कटाव को भी सफलतापूर्व रोका जाता है।
चयन प्रक्रिया और किसानों को मिलने वाला लक्ष्य
अधिकारी ने आगे जानकारी दी कि मौजूदा समय में यह योजना मुरादाबाद जनपद में भूमि संरक्षण विभाग की एक खास इकाई के जरिए चलाई जा रही है। विभाग द्वारा भूमि संरक्षण से जुड़ी तमाम संरचनाएं बनाकर जमीन को उपजाऊ बनाने का काम किया जा रहा है। इस सत्र में विभाग को लगभग 100 हेक्टेयर जमीन का लक्ष्य मिला है। इस 100 हेक्टेयर के पूरे कैचमेंट एरिया में आने वाले करीब 400 से 500 किसान इस योजना का पूरा लाभ उठा सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना का फायदा कोई भी किसान व्यक्तिगत तौर पर सीधे आवेदन करके नहीं पा सकता है। इसके लिए विभाग की कंजर्वेशन यूनिट सीधे खेतों पर जाकर जमीनी स्तर पर सर्वे करती है। जिन इलाकों में पानी और मिट्टी का कटाव सबसे ज्यादा हो रहा होता है, केवल उन्हीं क्षेत्रों को इस योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर चुना जाता है।



















