भीलवाड़ा क्षेत्र में पशुपालन करने वाले किसानों के घरों और बाड़ों में आमतौर पर बड़ी मात्रा में गोबर इकट्ठा होता रहता है। अक्सर किसान इस गोबर को खुले मैदान में एक साथ ढेर के रूप में फेंक देते हैं और फसल बुआई के वक्त सीधे खेत में इस्तेमाल कर लेते हैं। हालांकि, गोबर को लंबे समय तक बिना ढके खुले आसमान के नीचे छोड़ना कृषि के लिहाज से सही नहीं माना जाता है। तेज धूप और गर्मी की वजह से गोबर में मौजूद कई जरूरी सूक्ष्म जीव और उपयोगी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जबकि यही सूक्ष्म जीव मिट्टी की सेहत सुधारने और पौधों को पोषण देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
छायादार जगह पर खाद तैयार करने की सही विधि
बेहतर गुणवत्ता वाली खाद बनाने के लिए किसानों को किसी छायादार स्थान पर गड्ढा खोदना चाहिए। इस गड्ढे में गोबर डालने के बाद उसे ढककर या पूरी तरह छांव में रखना बेहद जरूरी है, साथ ही उसमें समय-समय पर नमी बनाए रखनी चाहिए। अगर खेत या घर के पास गड्ढा खोदने की सुविधा उपलब्ध न हो, तो गोबर को किसी घनी छांव वाले स्थान पर ढेर के रूप में भी सुरक्षित रखा जा सकता है। उचित नमी और छांव मिलने पर गोबर धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से सड़ने लगता है और उच्च गुणवत्ता वाली खाद में तब्दील हो जाता है।
घरेलू कचरे और मेंगनी से बढ़ाएं खाद की ताकत
यदि किसान बेहद उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करना चाहते हैं, तो वे गोबर के साथ घर से निकलने वाले बेकार फल और सब्जियों के छिलकों के साथ-साथ बकरी की मेंगनी को भी इसमें मिला सकते हैं। ऐसा करने से खाद में जैविक पदार्थों की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इस प्रकार तैयार की गई जैविक खाद जब खेत की मिट्टी में मिलाई जाती है, तो यह मिट्टी के भीतर जैविक तत्वों को बढ़ाकर उसकी कुल उर्वरता में सुधार करती है। इस तरह की जैविक खाद का निरंतर उपयोग करने से मिट्टी की आंतरिक संरचना मजबूत होती है और उसकी पानी रोककर रखने की क्षमता भी बेहतर हो जाती है।
खाद के पकने की पहचान और बुआई से पहले का समय
जब गोबर पूरी तरह से सड़ जाता है, तो उसका रंग बदलकर गहरा भूरा या काला होने लगता है और वह हाथों से छूने पर पूरी तरह भुरभुरा नजर आता है। इसके अलावा, सड़े हुए गोबर से आने वाली पुरानी तीखी दुर्गंध खत्म हो जाती है और उसकी बनावट बिल्कुल साधारण मिट्टी जैसी हो जाती है, जिसके बाद ही इसे खेतों में डालना चाहिए। कभी भी कच्चे या बिना सड़े हुए गोबर को सीधे खेत में डालने से बचना चाहिए, क्योंकि पहले उसे पूरी तरह सड़ाकर खाद के रूप में बदलना ज्यादा फायदेमंद होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गोबर की इस खाद को फसल की बुआई से ठीक पहले डालने के बजाय बुआई से लगभग 20 से 25 दिन पहले खेतों में डालना ज्यादा असरदार रहता है। खाद बिखेरने के बाद खेत की अच्छी तरह जुताई कर देनी चाहिए ताकि खाद मिट्टी के कण-कण में भली-भांति मिल जाए। इससे खाद को मिट्टी के साथ घुलने-मिलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है और आने वाली फसल को सुचारू रूप से पोषण मिलने में मदद मिलती है। जिन इलाकों में बाढ़ का खतरा रहता है, वहां के किसान संभावित बाढ़ आने से पहले ही खेतों में खाद डालकर जुताई का काम पूरा कर सकते हैं।
केंचुआ खाद बनाते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
जब किसान केंचुआ खाद यानी वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर रहे हों, तब भी उनके लिए किसी ठंडी और छायादार जगह का चयन करना बेहद जरूरी हो जाता है। बहुत तेज धूप और अत्यधिक गर्मी के कारण केंचुओं और अन्य उपयोगी सूक्ष्म जीवों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए पूरी प्रक्रिया के दौरान खाद के ढेर में उचित नमी बनाए रखना बहुत आवश्यक है, हालांकि इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि वहां जरूरत से ज्यादा पानी न भर जाए। इस प्रकार वैज्ञानिक और सही तरीकों से तैयार की गई गोबर की खाद खेत की मिट्टी को लंबे समय तक उपजाऊ और टिकाऊ बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होती है।



















