सिनेमाघरों में टिकट खरीदकर फिल्म देखने जाने वाले दर्शकों को अक्सर स्क्रीन शुरू होने से पहले लंबे विज्ञापनों और ट्रेलर्स का सामना करना पड़ता है। यदि आप भी इस बात से परेशान रहते हैं कि तय समय पर शो शुरू नहीं होता और कीमती वक्त विज्ञापनों में निकल जाता है, तो कानून इस बारे में क्या कहता है यह जानना जरूरी है। नियम यह तय करते हैं कि दर्शक का समय और पैसा व्यर्थ न जाए और सिनेमाघर अपनी मनमानी न कर सकें।
थिएटर में विज्ञापन दिखाने का कानूनी दायरा
सिनेमाघरों के पास दर्शकों को विज्ञापन दिखाने की एक निर्धारित समय-सीमा होती है। तय सीमा से अधिक देर तक कमर्शियल और प्रचार दिखाए जाने पर थिएटर संचालकों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है और हर्जाना भी भरना पड़ सकता है। इस तरह के मामलों में उपभोक्ता अदालतें कड़े फैसले सुना चुकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मनोरंजन स्थलों पर भी नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
बेंगलुरु के अभिषेक MR का चर्चित कानूनी संघर्ष
यह पूरा वाकया फरवरी 2025 का है जब बेंगलुरु के रहने वाले 30 वर्षीय अभिषेक MR ने PVR सिनेमा, INOX और BookMyShow के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वह अभिनेता विक्की कौशल की फिल्म ‘सैम बहादुर’ देखने गए थे और उन्होंने इसके लिए तीन टिकट बुक कराए थे। शो दोपहर 4:05 बजे शुरू होना था और शाम साढ़े छह बजे तक खत्म होना तय था, लेकिन असल में फिल्म 4:30 बजे शुरू हुई।
फिल्म शुरू होने से पहले करीब आधे घंटे तक उन्हें विज्ञापन और ट्रेलर्स दिखाए गए, जिससे उनका कुल 25 मिनट का कीमती समय बर्बाद हुआ। इस देरी की वजह से उनके बाद के सभी जरूरी अपॉइंटमेंट भी रद्द हो गए। इसी मानसिक परेशानी और समय की बर्बादी के खिलाफ उन्होंने कानूनी कदम उठाया और न्याय की मांग की।
सिनेमाघरों के पास कितने मिनट का होता है अधिकार
सुनवाई के दौरान PVR सिनेमा और INOX की तरफ से यह दलील दी गई कि कानून के तहत जनहित से जुड़े संदेश यानी पब्लिक सर्विस अनाउंसमेंट (PSA) दिखाना उनकी जिम्मेदारी होती है। हालांकि अदालत में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि किसी भी फिल्म की स्क्रीनिंग से पहले दिखाए जाने वाले विज्ञापनों की अधिकतम समय-सीमा केवल 10 मिनट तय की गई है। इस सीमा का उल्लंघन करना नियमों के खिलाफ माना जाता है।
कोर्ट का बड़ा फैसला और हर्जाने का आदेश
अदालत ने PVR और INOX को सेवा में कोताही बरतने और उपभोक्ता का समय नष्ट करने का दोषी पाया। कोर्ट ने दोनों कंपनियों पर कुल 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इस राशि में से 20 हजार रुपये अभिषेक MR को मानसिक प्रताड़ना और समय बर्बादी के हर्जाने के रूप में दिए जाने का आदेश दिया गया, साथ ही मुकदमे के अन्य खर्च के रूप में 8,000 रुपये भी प्रदान करने को कहा गया।



















