दुनिया के सबसे बड़े प्रिडिक्शन मार्केट्स में शुमार पॉलीमार्केट के ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर दो अलग-अलग विदेशी चुनावों को लेकर अजीबोगरीब वित्तीय गतिविधियां सामने आई हैं। मतदान खत्म होने और नतीजे लगभग तय हो जाने के बाद भी इन बाजारों में 60 करोड़ डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का ट्रेडिंग वॉल्यूम दर्ज किया गया। राजनीतिक दांवों में आमतौर पर इतना बड़ा वॉल्यूम कभी देखने को नहीं मिलता, खासकर तब जब दांव जीतने वाले मुख्य चेहरों के बजाय उन उम्मीदवारों पर लगे हों जिनकी जीत की कोई संभावना ही नहीं थी। वित्तीय विश्लेषक और अर्थशास्त्री इसे ट्रेडिंग वॉल्यूम में जानबूझकर किया गया फर्जीवाड़ा और संभावित टोकन हासिल करने की होड़ मान रहे हैं।
इथियोपिया के चुनावों में अनूठा ट्रेडिंग पैटर्न
इस साल गर्मियों के दौरान इथियोपिया के आम चुनाव में प्रधानमंत्री अबी अहमद की प्रॉस्पेरिटी पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की थी। संसद की 438 सीटों पर कब्जा जमाकर उन्होंने अगले पांच साल के कार्यकाल के लिए अपनी राह आसान कर ली, जबकि उनके सबसे नजदीकी प्रतिद्वंद्वी को महज 13 सीटें ही मिल सकीं। प्रिडिक्शन मार्केट्स का बुनियादी नियम यह है कि जिस नतीजे की संभावना सबसे मजबूत होती है, उस पर सबसे ज्यादा पैसा लगता है। प्रमुख दावेदारों पर ट्रेडिंग वॉल्यूम हमेशा कमजोर उम्मीदवारों से कई गुना अधिक होता है। हालांकि इथियोपिया के बाजार में यह चलन बिल्कुल उलट गया।
अबी अहमद की जीत पर सिर्फ 1,73,000 डॉलर का दांव लगा, जबकि उनके चीफ ऑफ स्टाफ शिमेलीस अब्दीसा के देश का अगला नेता बनने के कॉन्ट्रैक्ट्स पर 4.1 करोड़ डॉलर से ज्यादा का कारोबार हो गया। पूरे इथियोपियाई बाजार में कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम 28.5 करोड़ डॉलर के पार निकल गया, और इसमें से लगभग सारा पैसा उन नामों पर लगा जो रेस में कहीं थे ही नहीं।
आपस में ही सौदे घुमाते दिखे दो-दो खाते
इस कारोबार की फोरेंसिक पड़ताल करने वाली फर्म एमएसआर डिकोड के प्रमुख और पॉलीमार्केट के पूर्व ट्रेडर क्रिस पार्क के अनुसार, लगभग 28.4 करोड़ डॉलर का कारोबार ऐसे खातों के जोड़ों के जरिए हुआ जो लगातार एक-दूसरे से ही कॉन्ट्रैक्ट्स खरीद और बेच रहे थे। बर्नार्ड कॉलेज में प्रिडिक्शन मार्केट्स पर रिसर्च करने वाले अर्थशास्त्र के प्रोफेसर राजीव सेठी ने साफ कहा कि यह सीधे तौर पर वॉल्यूम मैनिपुलेशन यानी आंकड़ों को कृत्रिम रूप से फुलाने का मामला है।
पॉलीमार्केट की ग्लोबल इंटेलिजेंस और इन्वेस्टिगेशंस प्रमुख शाना बॉतिस्ता ने बताया कि उनकी टीम ने इस गतिविधि को तुरंत चिह्नित किया, जांच की और संबंधित खातों पर ट्रेडिंग की पाबंदी लगा दी। हालांकि यह सवाल अनुत्तरित रह गया कि प्लेटफॉर्म की तरफ से रोक लगाए जाने से पहले इन खातों को सैकड़ों मिलियन डॉलर का लेनदेन करने की अनुमति कैसे मिलती रही।
ज़ॉम्बी मार्केट और महीनों तक चलती रही बेतुकी ट्रेडिंग
पॉलीमार्केट के नियमों के अनुसार इथियोपियाई बाजार का आधिकारिक निपटारा अक्टूबर में प्रधानमंत्री के औपचारिक शपथ ग्रहण के बाद ही होना था। इसका सीधा मतलब यह निकला कि अहमद की जीत पक्की हो जाने के बाद भी यह मार्केट कई महीनों तक खुला रहा। चुनाव खत्म होने के बाद 123 दिनों तक ऐसे सौदे लगातार दर्ज होते रहे, जिससे परेशान होकर कई सामान्य उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाए कि आखिर यह बाजार अब तक बंद क्यों नहीं किया गया।
प्रोफेसर राजीव सेठी ने इस स्थिति को 'ज़ॉम्बी मार्केट' करार दिया है। यह एक ऐसा मंच बन जाता है जहां लोग उन घटनाओं पर भी खरीद-बिक्री जारी रखते हैं जो या तो पहले ही घट चुकी हैं या जिनका होना अब पूरी तरह नामुमकिन हो चुका है।
रोमानियाई चुनाव में भी सामने आई भारी गड़बड़ी
रोमानिया में 2024 के चुनाव को लेकर बनाए गए एक अन्य बाजार में इससे भी ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े दर्ज किए गए। वहां विदेशी दखल की आशंकाओं के चलते शुरुआती चुनाव रद्द कर दिया गया था और नए सिरे से चुनाव कराने का फैसला हुआ। पॉलीमार्केट ने पुराना बाजार बंद करने के बजाय नए विकल्प के साथ-साथ पुराने बाजार को भी खुला रखा।
प्रोफेसर सेठी और उनके साथियों द्वारा संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए तैयार किए गए एक एल्गोरिदम ने पुराने रोमानियाई बाजार के लगभग पूरे वॉल्यूम को संदिग्ध पाया। उनके विश्लेषण के अनुसार कुछ हफ्तों के दौरान इस बाजार में दर्ज हुआ 99.6 फीसदी ट्रेडिंग वॉल्यूम पूरी तरह वॉश ट्रेडिंग था। वॉश ट्रेडिंग वित्तीय धोखाधड़ी का एक ऐसा तरीका है जिसमें कोई ट्रेडर या गिरोह एक ही संपत्ति को बार-बार खुद ही खरीदता और बेचता है ताकि बाजार में भारी हलचल का भ्रम पैदा किया जा सके, जबकि वास्तव में पैसा सिर्फ खातों के बीच घूम रहा होता है। अमेरिका के नियमित वित्तीय एक्सचेंजों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और खुद पॉलीमार्केट के नियमों में भी इसे गैरकानूनी बताया गया है।
एयरड्रॉप फार्मिंग की संभावना और 9 सेकंड के सौदे
एमएसआर डिकोड के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि इन सौदों का मुख्य मकसद 'एक्टिविटी फार्मिंग' हो सकता है। क्रिप्टो जगत में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब कोई प्लेटफॉर्म भविष्य में अपना टोकन लॉन्च करने की योजना बनाता है, तो ज्यादा वॉल्यूम पैदा करने वाले खातों को मुफ्त टोकन यानी एयरड्रॉप दिए जाते हैं। साल 2025 में पॉलीमार्केट के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मैथ्यू मोडाब्बर ने एक क्रिप्टो पॉडकास्ट में कहा था कि प्लेटफॉर्म का एक टोकन आएगा, हालांकि उन्होंने विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी थी। उलम यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट एंड फाइनेंस के डायरेक्टर आंद्रे ग्वेटलर, जो प्रिडिक्शन मार्केट्स की संरचना पर शोध करते हैं, ने पुष्टि की कि यह संभावित एयरड्रॉप की फार्मिंग करने का बिल्कुल किताबी उदाहरण है।
इथियोपियाई बाजार के 38,000 से अधिक 'ट्रेड लूप्स' की जांच में यह बात साबित हुई कि यह कोई नफा-नुकसान कमाने वाले वास्तविक एल्गोरिदम नहीं थे। एक ही वॉलेट से दूसरे वॉलेट में तेजी से हुए इन सौदों में से 98 फीसदी से ज्यादा में किसी भी पक्ष को न तो एक पैसे का मुनाफा हुआ और न ही नुकसान। इन खातों ने खरीदे गए कॉन्ट्रैक्ट्स को बेचने से पहले औसतन सिर्फ नौ सेकंड तक अपने पास रखा।
अजीब दांवों का पुराना इतिहास और नियामकों की नजर
पॉलीमार्केट पर इस तरह के अजीबोगरीब सौदों का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े बाजारों में एलन मस्क और न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी जैसे नामों पर भारी ट्रेडिंग देखी गई थी, जबकि दोनों ही अमेरिका से बाहर पैदा होने के कारण राष्ट्रपति पद की दौड़ के लिए अयोग्य हैं। दूसरी तरफ पॉलीमार्केट की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कंपनी कालशी को भी हाल ही में अपनी क्रिप्टो फ्यूचर्स गतिविधियों को लेकर उठ रहे वॉश ट्रेडिंग के आरोपों पर सफाई देनी पड़ी थी।
हाल ही में पॉलीमार्केट ने 1789 कैपिटल के नेतृत्व में 1 अरब डॉलर से अधिक का भारी निवेश जुटाया है। 1789 कैपिटल वही वेंचर कैपिटल फर्म है जिसमें डोनाल्ड ट्रंप जूनियर पार्टनर हैं। इस फंडिंग के बाद पॉलीमार्केट का मूल्यांकन 21 अरब डॉलर आंका गया है और इसका वार्षिक राजस्व 1 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। कंपनी अपनी इस भारी तरक्की का ढिंढोरा अपने ट्रेडिंग वॉल्यूम के दम पर ही पीटती आई है। अमेरिकी डेरिवेटिव नियामक कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन यानी सीएफटीसी ने इस ताजा मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, हालांकि पूर्व अधिकारियों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही असामान्य ट्रेडिंग पर नियामक की कड़ी नजर होनी स्वाभाविक है।
















