देश की राजधानी में गुरुवार को राजस्थान के प्रशासनिक और ढांचागत विकास को लेकर एक अहम राजनीतिक संवाद देखने को मिला। सूबे के मुखिया भजनलाल शर्मा ने नई दिल्ली का रुख करते हुए शीर्ष स्तर पर दो महत्वपूर्ण औपचारिक बैठकें कीं। एक ओर जहां उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रूबरू होकर प्रशासनिक मार्गदर्शन लिया, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ विस्तृत चर्चा कर रेगिस्तानी राज्य के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील साबित होने वाले पानी के मसले को मजबूती से सामने रखा। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे दौर में सामने आया है जब प्रदेश के ग्रामीण अंचल पंचायत स्तर की चुनावी गतिविधियों की गहमागहमी से गुजर रहे हैं।
प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के सफर पर शुभकामनाएं और नीतिगत मार्गदर्शन
राजधानी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार मुलाकात की। इस औपचारिक संवाद में उन्होंने शासन और लोक सेवा के क्षेत्र में पीएम के पच्चीस वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक पड़ाव पर अपनी ओर से हार्दिक बधाई दी। इसके साथ ही दोनों नेताओं के बीच प्रदेश की भावी प्रगति की रूपरेखा पर भी विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने डिजिटल मंच पर इस बैठक का ब्योरा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रधानमंत्री की निष्ठा और विकसित भारत का विस्तृत दृष्टिकोण राज्य प्रशासन के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति का काम करता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मरुधरा के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में केंद्र का लगातार सकारात्मक रुख और स्नेह बेहद संबल प्रदान कर रहा है।
राज्य के जल संकट के समाधान हेतु केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल के साथ विमर्श
प्रधानमंत्री से मिलने के उपरांत मुख्यमंत्री का अगला पड़ाव केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय रहा, जहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। भौगोलिक रूप से पानी की भारी किल्लत झेल रहे राजस्थान के लिए यह वार्ता नीतिगत स्तर पर काफी मायने रखती है। संवाद के दौरान मुख्य ध्यान प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र के लिए सिंचाई तंत्र को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।
इस विमर्श के दौरान अंतरराज्यीय और क्षेत्रीय जल संवर्धन से जुड़ी कई प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने विशेष तौर पर यमुना, किशाऊ, नर्मदा और महत्वाकांक्षी राम जलसेतु लिंक जैसी प्रमुख जल योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने इन परियोजनाओं से संबंधित अंतरराज्यीय समझौतों और स्वीकृतियों में मिल रही केंद्रीय सहायता के लिए विभागीय मंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया। राज्य के विशाल भूभाग में कृषि और आम जनजीवन सीधे तौर पर इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर है, इसलिए इन समझौतों को आगे बढ़ाना शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
साल 2047 की विकास रूपरेखा और संयुक्त प्रशासनिक प्रयास
शीर्ष नेताओं से विमर्श के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों को लेकर सरकार का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य प्रशासन वर्ष 2047 तक प्रदेश को पूर्ण रूप से विकसित राज्य के पायदान पर खड़ा करने के रोडमैप पर काम कर रहा है। दिल्ली में हुए दोनों सत्रों में मुख्य रूप से आधारभूत ढांचा, निवेश अनुकूल वातावरण और व्यवस्थित जल प्रबंधन जैसे प्रमुख स्तंभों पर जोर दिया गया।
हालांकि इन बैठकों के तुरंत बाद किसी नई आर्थिक परियोजना या क्रियान्वयन की किसी तय समयसीमा की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन मुख्यमंत्री ने साफ किया कि संघीय ढांचे में केंद्र और राज्य का यह आपसी समन्वय विकास कार्यों को गति देने में मददगार साबित होगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार जनहित से जुड़े इन बुनियादी विषयों पर तेजी से काम करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
















