केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में करदाताओं और व्यापारिक समुदाय के लिए व्यापक नीतिगत रियायतों को मंजूरी दी गई है। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य कर अनुपालन की प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाना और अनजाने में हुई तकनीकी चूकों पर अत्यधिक कठोर दंडात्मक कदमों पर विराम लगाना है। नए विनियामक ढांचे के तहत सामान्य त्रुटियों, तकनीकी गड़बड़ियों या रिटर्न जमा करने में हुए विलंब के मामलों में प्रशासन का ध्यान केवल बकाया कर वसूली, लागू ब्याज और अनुपातिक अर्थदंड तक ही केंद्रित रहेगा।
टैक्स अफसरों के पास से गिरफ्तारी का अधिकार खत्म
व्यापारियों के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए परिषद ने वस्तु एवं सेवा कर कानून के अंतर्गत कर अधिकारियों के सीधे गिरफ्तारी करने के विशेषाधिकार को पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया है। इसके अतिरिक्त आपराधिक अभियोजन की न्यूनतम वित्तीय देयता सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर सीधे ₹5 करोड़ करने की संस्तुति की गई है। कानून में पहले से मौजूद न्यूनतम अनिवार्य कारावास की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है। भविष्य में किसी भी गंभीर प्रकरण में कारावास या आर्थिक जुर्माने के निर्धारण का पूरा दायित्व संबंधित न्यायिक अदालतों के स्वविवेक पर छोड़ दिया गया है।
सामान्य पेनल्टी में 60 फीसदी की कटौती
नियमों में स्पष्ट वर्गीकरण न होने वाले मामलों के लिए देय सामान्य पेनल्टी की अधिकतम राशि को पूर्व के ₹25,000 से घटाकर मात्र ₹10,000 नियत किया गया है। यदि कोई कारोबारी अपने विवरण पत्र दाखिल करने में देर करता है अथवा भुगतान में पीछे रह जाता है, तो उससे नियमों के अनुसार रिकवरी, ब्याज और सीमित पेनल्टी ही ली जाएगी। सामान्य कारोबारी परिस्थितियों में किसी भी उद्यमी के खिलाफ अनावश्यक उत्पीड़क या दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई जाएगी।
10 हजार रुपये तक के मामलों में नोटिस से मुक्ति
छोटे दुकानदारों और लघु उद्यमियों को बड़ी कानूनी उलझनों से बचाने के लिए परिषद ने ₹10,000 अथवा उससे कम राशि के बकाये वाले मामलों में जीएसटी नोटिस जारी करने पर पूर्ण रोक लगा दी है। इसके समानांतर, पूर्व से लंबित पड़े ऐसे सभी पुराने नोटिसों को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। पूरे देश में विभागीय नोटिस और जांच की प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर साझा मानक स्थापित करने की सिफारिश की गई है।
ट्रांजिट जांच के लिए संयुक्त आयुक्त की मंजूरी अनिवार्य
सड़क मार्ग से माल परिवहन के दौरान रास्ते में होने वाली मनमानी जांच को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। माल की भौतिक जांच, वाहनों को रोकने अथवा जब्ती का अधिकार अब केवल माल भेजने वाले या प्राप्त करने वाले राज्य के अधिकार क्षेत्र वाले अधिकारियों के पास ही सीमित रहेगा। किसी भी खेप को केवल ठोस खुफिया इनपुट मिलने पर ही बीच रास्ते में रोका जा सकेगा, जिसके लिए कम से कम संयुक्त आयुक्त स्तर के वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व प्रशासनिक स्वीकृति आवश्यक होगी।
त्वरित रिफंड और 10 दिन में पंजीकरण रद्दीकरण
पंजीकरण और अनुपालन को सुगम बनाने के लिए अतिरिक्त कारोबारी शाखा जोड़ने जैसे सामान्य संशोधनों को अब स्वतः डिजिटल स्वीकृति दी जाएगी। पंजीकरण रद्द करने के आवेदनों के निपटारे की समयसीमा को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। इसके अलावा जोखिम विश्लेषण प्रणाली के आधार पर लगभग 90 प्रतिशत वैध रिफंड दावों को आवेदन के तीन कार्यदिवसों के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। नकद बहीखाते में जमा अधिशेष राशि का रिफंड स्वतः मंजूर होने से उद्यमों के पास कार्यशील पूंजी का संकट दूर होगा।
















