रांची टी20 में क्या प्लेइंग इलेवन बदलेगी टीम इंडिया, संजू सैमसन और मयंक यादव पर निगाहेंपुरानी पल्सर के इंजन से जबलपुर के छात्रों ने बनाई फॉर्मूला स्टाइल रेसिंग कारतरंग शक्ति-2026 में गरजा जोधपुर का आसमान, सूर्यकिरण और सारंग के साथ लड़ाकू विमानों ने दिखाया दमअवैध अफीम की खेती पर मणिपुर पुलिस का कड़ा रुख, गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्क करने की दी चेतावनीडिनर का मेन्यू तय करने में कपल्स के बीच क्यों बढ़ती है उलझन, जानिए रोजमर्रा के इस सवाल का मनोवैज्ञानिक पहलूओपन-सोर्स एआई स्टार्टअप नाउसरिसर्च ने जुटाई 90 मिलियन डॉलर की फंडिंग, मूल्यांकन पहुंचा 1.5 बिलियन डॉलरलाइव स्पोर्ट्स पर सोशल नेटवर्क X का नया दांव, गेमटाइम हब से अब जुड़ा मेजर लीग बेसबॉलनाना पाटेकर के निधन पर विवादित टिप्पणी कर फंसीं तनुश्री दत्ता, इंटरनेट पर भारी विरोधअमेज़न का नया 'अबाउट यू' फीचर दिखा रहा है आपकी हर निजी आदत का पूरा ब्योराचुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी सांसदों का राजघाट मार्च, पुलिस ने सीमित नेताओं को दी जाने की छूट
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में कर सुधारों पर मुहर, अधिकारियों के अरेस्ट पावर खत्मव्यापार
8 अक्तू॰ 2026, 7:26 pm (1 घंटे पहले)· 0

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में कर सुधारों पर मुहर, अधिकारियों के अरेस्ट पावर खत्म

57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में कर अधिकारियों के गिरफ्तारी अधिकार को समाप्त कर दिया गया है और अभियोजन की सीमा बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही छोटे मामलों में नोटिस से मुक्ति और तीन दिनों में रिफंड के नए प्रावधान तय किए गए हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में करदाताओं और व्यापारिक समुदाय के लिए व्यापक नीतिगत रियायतों को मंजूरी दी गई है। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य कर अनुपालन की प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाना और अनजाने में हुई तकनीकी चूकों पर अत्यधिक कठोर दंडात्मक कदमों पर विराम लगाना है। नए विनियामक ढांचे के तहत सामान्य त्रुटियों, तकनीकी गड़बड़ियों या रिटर्न जमा करने में हुए विलंब के मामलों में प्रशासन का ध्यान केवल बकाया कर वसूली, लागू ब्याज और अनुपातिक अर्थदंड तक ही केंद्रित रहेगा।

टैक्स अफसरों के पास से गिरफ्तारी का अधिकार खत्म

व्यापारियों के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए परिषद ने वस्तु एवं सेवा कर कानून के अंतर्गत कर अधिकारियों के सीधे गिरफ्तारी करने के विशेषाधिकार को पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया है। इसके अतिरिक्त आपराधिक अभियोजन की न्यूनतम वित्तीय देयता सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर सीधे ₹5 करोड़ करने की संस्तुति की गई है। कानून में पहले से मौजूद न्यूनतम अनिवार्य कारावास की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है। भविष्य में किसी भी गंभीर प्रकरण में कारावास या आर्थिक जुर्माने के निर्धारण का पूरा दायित्व संबंधित न्यायिक अदालतों के स्वविवेक पर छोड़ दिया गया है।

सामान्य पेनल्टी में 60 फीसदी की कटौती

नियमों में स्पष्ट वर्गीकरण न होने वाले मामलों के लिए देय सामान्य पेनल्टी की अधिकतम राशि को पूर्व के ₹25,000 से घटाकर मात्र ₹10,000 नियत किया गया है। यदि कोई कारोबारी अपने विवरण पत्र दाखिल करने में देर करता है अथवा भुगतान में पीछे रह जाता है, तो उससे नियमों के अनुसार रिकवरी, ब्याज और सीमित पेनल्टी ही ली जाएगी। सामान्य कारोबारी परिस्थितियों में किसी भी उद्यमी के खिलाफ अनावश्यक उत्पीड़क या दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई जाएगी।

10 हजार रुपये तक के मामलों में नोटिस से मुक्ति

छोटे दुकानदारों और लघु उद्यमियों को बड़ी कानूनी उलझनों से बचाने के लिए परिषद ने ₹10,000 अथवा उससे कम राशि के बकाये वाले मामलों में जीएसटी नोटिस जारी करने पर पूर्ण रोक लगा दी है। इसके समानांतर, पूर्व से लंबित पड़े ऐसे सभी पुराने नोटिसों को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। पूरे देश में विभागीय नोटिस और जांच की प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर साझा मानक स्थापित करने की सिफारिश की गई है।

ट्रांजिट जांच के लिए संयुक्त आयुक्त की मंजूरी अनिवार्य

सड़क मार्ग से माल परिवहन के दौरान रास्ते में होने वाली मनमानी जांच को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। माल की भौतिक जांच, वाहनों को रोकने अथवा जब्ती का अधिकार अब केवल माल भेजने वाले या प्राप्त करने वाले राज्य के अधिकार क्षेत्र वाले अधिकारियों के पास ही सीमित रहेगा। किसी भी खेप को केवल ठोस खुफिया इनपुट मिलने पर ही बीच रास्ते में रोका जा सकेगा, जिसके लिए कम से कम संयुक्त आयुक्त स्तर के वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व प्रशासनिक स्वीकृति आवश्यक होगी।

त्वरित रिफंड और 10 दिन में पंजीकरण रद्दीकरण

पंजीकरण और अनुपालन को सुगम बनाने के लिए अतिरिक्त कारोबारी शाखा जोड़ने जैसे सामान्य संशोधनों को अब स्वतः डिजिटल स्वीकृति दी जाएगी। पंजीकरण रद्द करने के आवेदनों के निपटारे की समयसीमा को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। इसके अलावा जोखिम विश्लेषण प्रणाली के आधार पर लगभग 90 प्रतिशत वैध रिफंड दावों को आवेदन के तीन कार्यदिवसों के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। नकद बहीखाते में जमा अधिशेष राशि का रिफंड स्वतः मंजूर होने से उद्यमों के पास कार्यशील पूंजी का संकट दूर होगा।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

क्या जीएसटी अधिकारी अब किसी भी टैक्सपेयर को सीधे गिरफ्तार कर सकते हैं?
नहीं, 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में अधिकारियों के पास मौजूद गिरफ्तारी के अधिकार को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
जीएसटी में कानूनी अभियोजन की नई वित्तीय सीमा क्या है?
अब अभियोजन शुरू करने की न्यूनतम सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है।
कितनी रकम तक के जीएसटी नोटिस अब जारी नहीं किए जाएंगे?
₹10,000 या उससे कम रकम के मामलों में अब कोई नया जीएसटी नोटिस जारी नहीं किया जाएगा और पुराने लंबित नोटिस भी वापस होंगे।
सामान्य चूकों पर लगने वाली पेनल्टी में क्या कटौती की गई है?
अनिर्धारित मामलों में लगने वाली सामान्य पेनल्टी को ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 कर दिया गया है।
रास्ते में माल ले जा रहे वाहन को रोकने के लिए किसकी मंजूरी अनिवार्य होगी?
माल की जांच या जब्ती के लिए ठोस खुफिया सूचना के साथ कम से कम जॉइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होगी।
जीएसटी रिफंड कितने समय में स्वीकृत होने की उम्मीद है?
जोखिम विश्लेषण के आधार पर करीब 90 प्रतिशत पात्र रिफंड दावों को तीन कार्यदिवसों के भीतर मंजूरी मिलने की व्यवस्था की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp