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राजेश एक्सपोर्ट्स मामले में NFRA ने शुरू की जांच, 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में गड़बड़ी का आरोपव्यापार
7 जुल॰ 2026, 11:31 pm (45 दिन पहले)· 2

राजेश एक्सपोर्ट्स मामले में NFRA ने शुरू की जांच, 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में गड़बड़ी का आरोप

नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी ने बेंगलुरु स्थित स्वर्ण रिफाइनर राजेश एक्सपोर्ट्स के वित्तीय खातों की जांच शुरू कर दी है। यह कदम सेबी द्वारा राजस्व में भारी हेरफेर के आरोपों के बाद उठाया गया है।

बेंगलुरु स्थित स्वर्ण रिफाइनिंग और आभूषण बनाने वाली कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स अब दोहरी नियामक जांच के दायरे में आ गई है। नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) ने कंपनी के राजस्व खातों में कथित तौर पर हुई 15.15 लाख करोड़ रुपये की बड़ी गड़बड़ियों की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह घटनाक्रम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा जारी उस अंतरिम आदेश के बाद सामने आया है, जिसमें वित्तीय वर्षों के दौरान कंपनी के राजस्व के गलत प्रस्तुतीकरण का गंभीर आरोप लगाया गया था।

जांच का दायरा और NFRA की भूमिका

NFRA के चेयरपर्सन नितिन गुप्ता ने एक कार्यक्रम के दौरान इस मामले में आधिकारिक जांच शुरू होने की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण ने इस दिशा में अपने स्तर पर प्रक्रिया आरंभ कर दी है। यद्यपि गुप्ता ने जांच पूरी होने की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है और न ही अभी कोई प्रारंभिक निष्कर्ष साझा किए हैं, लेकिन यह हस्तक्षेप अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। NFRA का मुख्य कार्य सार्वजनिक हित वाली इकाइयों के वैधानिक ऑडिटर्स और वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों की निगरानी करना है।

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सेबी के आरोपों का आधार

SEBI ने 3 जून को जारी अपने अंतरिम आदेश में यह आरोप लगाया था कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच अपने राजस्व के आंकड़ों में करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का हेरफेर किया है। नियामक के अनुसार, यह राशि कंपनी के उन सब्सिडियरीज के राजस्व का लगभग 99.80 फीसदी हिस्सा है, जिसे गलत तरीके से दर्शाया गया था। यह मामला सीधे तौर पर राजस्व मान्यता, समेकन प्रथाओं और ऑडिटिंग प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े करता है। इसी के चलते SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स और इसके प्रमोटर राजेश मेहता पर अगली सूचना तक प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने पर रोक लगा दी है।

कंपनी का रुख और वित्तीय चुनौतियां

अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा है कि उसके द्वारा रिपोर्ट किया गया राजस्व बिल्कुल सही है। कंपनी का दावा है कि यह पूरी स्थिति केवल गलतफहमी और संचार के अभाव (कम्युनिकेशन गैप) का परिणाम है। अब कंपनी के इस स्पष्टीकरण को SEBI की जारी जांच और NFRA की ऑडिटिंग समीक्षा के तहत परखा जाएगा। निवेशकों और कॉर्पोरेट जगत के लिए यह मामला इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि राजस्व किसी भी कंपनी की साख, मार्जिन और क्रेडिट योग्यता का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होता है।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर चर्चा

NFRA चेयरपर्सन नितिन गुप्ता ने इस मामले के संदर्भ में बोर्ड की स्वतंत्रता और जवाबदेही पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रमोटर-संचालित कंपनियों में ऐसे वातावरण की आवश्यकता है जहां कनिष्ठ स्तर के अधिकारी भी कठिन सवाल पूछने की हिम्मत रख सकें। साथ ही, उन्होंने कॉर्पोरेट गवर्नेंस में AI के इस्तेमाल को लेकर भी सचेत किया। हालांकि AI डेटा विसंगतियों को पहचानने में मदद कर सकता है, लेकिन यह मानवीय विवेक और संदेह की क्षमता की जगह नहीं ले सकता। SEBI के चीफ जनरल मैनेजर राजेश डंगेती ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि तकनीक निर्णय लेने में मदद कर सकती है, लेकिन यह नैतिक जवाबदेही को प्रतिस्थापित नहीं कर सकती।

सवाल-जवाब

राजेश एक्सपोर्ट्स पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
सेबी ने आरोप लगाया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से पेश किया है।
NFRA इस मामले में क्या कर रहा है?
NFRA ने कंपनी के वैधानिक ऑडिटर्स और वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों की जांच शुरू कर दी है ताकि यह देखा जा सके कि क्या ऑडिट में कोई गंभीर चूक हुई है।
क्या कंपनी ने इन आरोपों को स्वीकार किया है?
नहीं, राजेश एक्सपोर्ट्स ने गलत काम करने से इनकार किया है और इसे केवल संचार के अभाव (कम्युनिकेशन गैप) और गलतफहमी का मामला बताया है।
निवेशकों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
सेबी द्वारा बाजार में कारोबार करने पर रोक लगाने से कंपनी के प्रमोटर्स और निवेशकों की गतिविधियों पर तुरंत असर पड़ेगा, जब तक कि जांच पूरी नहीं हो जाती।
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