भारतीय शेयर बाजार के कारोबार में सोमवार, 7 जुलाई को एक दिलचस्प रुख देखने को मिला, जहां विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने खरीदारी की कमान संभाली, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने बिकवाली दर्ज की। बाजार के विश्लेषक FIIs के लगातार दूसरे दिन निवेश जारी रखने को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, DIIs द्वारा की गई बिकवाली यह स्पष्ट करती है कि बाजार के ऊंचे स्तरों पर निवेशक मुनाफावसूली को प्राथमिकता दे रहे हैं।
लेनदेन के ताजा आंकड़े
शेयर बाजार के आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो विदेशी निवेशकों ने कुल 18,414.01 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 18,020.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह उनकी शुद्ध खरीदारी 393.19 करोड़ रुपये रही। इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 18,897.44 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे लेकिन 19,280.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले, जिससे उनकी शुद्ध बिकवाली 383.43 करोड़ रुपये दर्ज की गई। यह आंकड़े बाजार में चल रहे दोहरे रुख को दर्शाते हैं।
साल 2026 की व्यापक तस्वीर
भारतीय बाजार के प्रति विदेशी और घरेलू निवेशकों के नजरिए में बड़ा अंतर रहा है। साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने कुल 3.47 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अब तक 4.66 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश कर बाजार को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया है। इसी घरेलू समर्थन की वजह से विदेशी बिकवाली के दबाव के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी बरकरार रही है।
बाजार का प्रदर्शन और आगे की राह
जून तिमाही के नतीजों के आगमन से पहले बाजार में सकारात्मकता का माहौल रहा, जिसके चलते सोमवार को सेंसेक्स 270.01 अंक यानी 0.35 फीसदी की बढ़त के साथ 77,732.95 पर बंद हुआ। इसी तरह, निफ्टी 50 में 61.20 अंक यानी 0.25 फीसदी की वृद्धि हुई और यह 24,193.30 के स्तर पर समाप्त हुआ। बाजार को मुख्य रूप से ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों में आई तेजी से सहारा मिला। बजाज ब्रोकिंग के अनुसार, पिछले पांच हफ्तों में निफ्टी ने 1,500 अंकों की दौड़ लगाई है, जिसके चलते निकट भविष्य में यह 24,200 से 24,600 के दायरे में सीमित रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गिरावट में इंडेक्स 24,200 से 24,000 तक आता है, तो यह निवेश के लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है, जबकि 24,600 के स्तर को पार करने पर यह 24,800 की दिशा में बढ़ सकता है।











