साउथ कोरिया के अपबिट एक्सचेंज ने लिस्ट किया USELESS, कीमत में नई तेजी के आसारबुध का गोचर बदलेगा किस्मत, 5 दिन बाद से इन 7 राशियों की चमकेगी तकदीरमानसून में लौकी की फसल पर काले धब्बे दिखें तो समझ जाएं एन्थ्रेक्नोज का हमला, ऐसे करें बचावराजसमंद के केलवा में महिलाओं ने हाथों से गढ़ीं 21 मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं, दिया प्रकृति बचाने का संदेशयूपी में रिटायरमेंट के बाद भी डॉक्टरों को मिलेगा पांच साल का सेवा विस्तार, मरीजों को होगा फायदाअमेरिकी डॉलर में रिकवरी और मध्य पूर्व में तनाव के बीच सोने की कीमतों में शुरुआती बढ़त पर लगी ब्रेकराज्य की भर्ती व्यवस्था सुधारने महाराष्ट्र सरकार ने बनाई विशेष समिति, छह डिवीजनों में जाकर सुनेगी छात्रों की बातसचिन पायलट की राहुल और प्रियंका गांधी के साथ तस्वीरें, राजस्थान की राजनीति में अशोक गहलोत के लिए बड़े संकेतकोटक811 के जीरो बैलेंस अकाउंट पर मिलेगा 5.50% तक रिटर्न, जानिए ऑनलाइन कैसे खोलें खाताऑस्ट्रेलियन डॉलर में मजबूती कायम, महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का रुख बना हुआ है मुख्य फोकस
रसोई के बजट पर पड़ा असर, प्याज-तेल की महंगाई से बढ़ी घर की थाली की लागतव्यापार
8 सित॰ 2026, 7:05 pm (1 घंटे पहले)· 2

रसोई के बजट पर पड़ा असर, प्याज-तेल की महंगाई से बढ़ी घर की थाली की लागत

अगस्त में शाकाहारी थाली की लागत बढ़कर 29.5 रुपये और नॉन-वेज थाली की कीमत 57.5 रुपये पहुंच गई, क्योंकि प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी महंगे हुए, हालांकि आलू-टमाटर सस्ते होने से कुछ राहत मिली।

देश में घर पर बनने वाले खाने पर भी अब महंगाई का असर साफ दिखने लगा है। अगस्त में प्याज, खाना पकाने का तेल और रसोई गैस महंगे होने से घरेलू भोजन की लागत में मामूली इजाफा हुआ, हालांकि आलू और टमाटर के दाम गिरने से यह बढ़ोतरी ज्यादा बड़ी नहीं दिखी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिसर्च शाखा क्रिसिल इंटेलिजेंस हर महीने अपनी 'रोटी राइस रेट' रिपोर्ट में इसी तरह के आंकड़े जारी करती है, ताकि पता चल सके कि रसोई का खर्च किस दिशा में बढ़ या घट रहा है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में एक शाकाहारी थाली बनाने की औसत लागत बढ़कर 29.5 रुपये पर पहुंच गई। यह जुलाई के मुकाबले 1 फीसदी ज्यादा है और पिछले साल अगस्त की तुलना में भी 1 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाता है। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी बड़ी वजह प्याज, खाद्य तेल, चावल और एलपीजी रहे, क्योंकि इन चारों के दाम पिछले साल के मुकाबले ऊंचे बने रहे और इनका सीधा असर रोजाना के खाने की लागत पर पड़ा।

ये भी पढ़ें

प्याज ने सबसे ज्यादा जेब ढीली की

सारी चीजों में सबसे तेज उछाल प्याज में देखने को मिला। एक साल पहले अगस्त में प्याज का भाव करीब 28 रुपये किलो था, जो इस साल अगस्त में बढ़कर 40 रुपये किलो तक पहुंच गया, यानी सालभर में करीब 43 फीसदी की तेजी। सिर्फ सालाना नहीं, महीने के हिसाब से भी प्याज जुलाई के मुकाबले 17 फीसदी महंगा हुआ। इसकी वजह मार्च-अप्रैल में महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि बताई गई, जिसने फसल को नुकसान पहुंचाया और बाद के महीनों में सप्लाई कम कर दी।

तेल और गैस ने भी बढ़ाया बोझ

रसोई की बाकी जरूरी चीजों ने भी दबाव बढ़ाया। खाद्य तेल की कीमत पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी और एलपीजी सिलेंडर की कीमत 10 फीसदी ज्यादा रही, जबकि चावल भी महंगा बिका, जिसका असर थाली की कुल लागत पर पड़ा। हालांकि पूरा महीना महंगाई भरा नहीं रहा। अगस्त में आलू के दाम 12 फीसदी और टमाटर के दाम पूरे 28 फीसदी तक गिरे, जिससे सब्जियों में आई इस राहत ने बढ़ोतरी को उतना बड़ा नहीं होने दिया, जितनी वह हो सकती थी।

अगर पूरी तस्वीर देखें तो शाकाहारी थाली की लागत में सिर्फ 1 फीसदी की बढ़ोतरी भले ही मामूली लगे, लेकिन इसके पीछे प्याज, तेल, चावल और गैस में आई तेज महंगाई और आलू-टमाटर में मिली राहत के बीच एक बड़ी खींचतान चल रही है। यही वजह है कि किराने का बिल हमेशा महंगाई के बड़े आंकड़ों की सीधी लाइन में नहीं चलता, क्योंकि प्याज जैसी चीजें एक फसल सीजन से दूसरे तक तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती हैं।

नॉन-वेज थाली पहुंची 57.5 रुपये पर

अगस्त में नॉन-वेज थाली की लागत 57.5 रुपये रही, जो पिछले साल के इसी महीने से 5 फीसदी ज्यादा है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह ब्रॉयलर चिकन का भाव रहा, जो सालाना आधार पर करीब 10 फीसदी बढ़ गया। लेकिन जुलाई से तुलना करें तो नॉन-वेज थाली की लागत असल में 1 फीसदी घट गई, क्योंकि श्रावण महीने में मांस की मांग परंपरागत रूप से कम रहती है और इसी दौरान ब्रॉयलर के दाम में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।

सवाल-जवाब

अगस्त में शाकाहारी थाली की कीमत कितनी रही?
29.5 रुपये, जो जुलाई और पिछले साल अगस्त दोनों से 1 फीसदी ज्यादा है।
नॉन-वेज थाली की लागत कितनी रही?
अगस्त में यह 57.5 रुपये रही, जो पिछले साल से 5 फीसदी ज्यादा है, हालांकि जुलाई से यह 1 फीसदी सस्ती हुई।
प्याज के दाम इतने क्यों बढ़े?
मार्च-अप्रैल में महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान पहुंचा, जिससे सप्लाई घटी और प्याज सालाना 43 फीसदी महंगा हो गया।
क्या सभी चीजें महंगी हुईं?
नहीं, आलू 12 फीसदी और टमाटर 28 फीसदी सस्ते हुए, जिससे थाली की कुल लागत में बढ़ोतरी सीमित रही।
यह आंकड़े किसने जारी किए?
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिसर्च शाखा क्रिसिल इंटेलिजेंस ने अपनी 'रोटी राइस रेट' रिपोर्ट में यह आंकड़े दिए हैं।
नॉन-वेज थाली जुलाई से सस्ती क्यों हुई?
श्रावण महीने में मांस की मांग कम होने से ब्रॉयलर चिकन के दाम में 4 फीसदी की गिरावट आई, जिससे नॉन-वेज थाली की लागत घट गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR